Skill-Based Education को लेकर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने पालमपुर में अहम बात कही
श्री साईं विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने युवाओं के लिए कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया
न्यूज़म ब्यूरो
शिमला, 23 सितम्बर | Skill Development और Entrepreneurship को उच्च शिक्षा से जोड़ने की जरूरत पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने जोर दिया।
उन्होंने पालमपुर में श्री साईं विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
राज्यपाल ने युवाओं को रोजगार तलाशने के साथ रोजगार देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
उन्होंने पर्वतीय शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध को हिमाचल के युवाओं के लिए अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया।
पालमपुर में श्री साईं विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने युवाओं की शिक्षा और भविष्य को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ कौशल, आत्मविश्वास और रोजगार की क्षमता भी दे।
राज्यपाल ने कहा कि बदलती परिस्थितियों के बीच विश्वविद्यालयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को नई तकनीक, उद्योग की जरूरतों और बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप तैयार करना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से शिक्षा के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।

Skill-Based Education: डिग्री के साथ कौशल पर जोर
Skill-Based Education के महत्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें अपनी क्षमताओं का विकास करके रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में भी काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए कई अवसर मौजूद हैं। विश्वविद्यालय ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां विद्यार्थी नए विचारों को विकसित कर सकें। इसके लिए पढ़ाई के साथ व्यवहारिक अनुभव और उद्योग से संपर्क भी जरूरी है।
Skill Development : युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करने की जरूरत

Skill Development को शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से उद्योग जगत के साथ अपने संबंध मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उनके विषय से जुड़े व्यावहारिक अनुभव मिलें, ताकि शिक्षा पूरी करने के बाद वे वास्तविक परिस्थितियों का सामना कर सकें।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए समग्र, लचीली और बहुविषयक शिक्षा पर जोर दिया। केंद्र सरकार की नीतिगत जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा में कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और अनुभव आधारित सीखने को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
Entrepreneurship : नौकरी तलाशने से आगे बढ़ने का संदेश

Entrepreneurship को लेकर राज्यपाल ने युवाओं से नए अवसर तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल नौकरी हासिल करने तक अपनी महत्वाकांक्षा सीमित न रखें। वे ऐसे विचार विकसित करें, जिनसे खुद के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और नवाचार के लिए विश्वविद्यालयों में अनुकूल वातावरण तैयार होना चाहिए। विद्यार्थियों को समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
Sri Sai University : शिक्षा यात्रा और सामाजिक भूमिका का उल्लेख
Sri Sai University की स्थापना यात्रा का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने संस्थान के शैक्षणिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की पहचान सिर्फ उसकी डिग्रियों से नहीं होती। ज्ञान, शोध, नवाचार, मूल्य और समाज में उसके योगदान से भी उसकी भूमिका तय होती है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए किसी क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रभाव व्यापक हो सकता है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही शिक्षा और विकास से जुड़े अवसर मिल सकते हैं।
Mountain Education : पर्वतीय क्षेत्र में नए अवसरों पर जोर

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की पर्वतीय और पर्वतारोहण गतिविधियों से जुड़ी शिक्षा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल के पहाड़ केवल प्राकृतिक पहचान नहीं हैं। वे पर्यटन, साहसिक खेल, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार से भी जुड़े हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय से शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध और व्यावहारिक अनुभव को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल विकसित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे हिमाचल के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकते हैं।
विद्यार्थियों को अनुशासन और मेहनत का संदेश
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने शिक्षकों का सम्मान करने और लगातार सीखते रहने की बात कही। साथ ही तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने पर जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों से असफलता से घबराने के बजाय उसे सीखने का अवसर मानने को कहा। राज्यपाल ने अनुशासन, कड़ी मेहनत और ईमानदारी को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों के रूप में अपनाने का संदेश दिया।
समारोह में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा, कुलपति प्रोफेसर वी.पी. पटियाल, कुलाधिपति एस.के. पुंज और विश्वविद्यालय प्रबंधन से जुड़े अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हिमाचल के राज्यपाल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति की संवैधानिक भूमिका भी निभाते हैं।
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