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कलाकारों की मनमोहक अदाओं व लोक वाद्य यंत्रों से निकली सुरीली धुनों के पर्यटक हो रहे हैं मंत्रमुग्ध

कुरुक्षेत्र/चण्डीगढ़, 22 नवंबर। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के तट पर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर कई ढोल-नगाड़े के साथ-साथ डेरू वाले संगीत ने पर्यटकों को नाचने पर मजबूर कर रहे है। गौरतलब है कि 15 नवंबर से ही शिल्प और सरस मेले की शुरुआत के साथ ही यह कलाकार महोत्सव में पहुंच गए थे और लगातार अपने-अपने राज्यों के लोक नृत्यों के माध्यम से पर्यटकों का मनोरंजन करने का काम कर रहे है।
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महोत्सव के यादगारी पलों को पर्यटक कर रहे मोबाइल कैमरों में कैद
 
 
 
सुबह से सायं तक महोत्सव से सुनहरी यादें लेकर घर को लौट रहे है पर्यटक
 
 
 
कुरुक्षेत्र/चण्डीगढ़, 22 नवंबर। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के तट पर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर कई ढोल-नगाड़े के साथ-साथ डेरू वाले संगीत ने पर्यटकों को नाचने पर मजबूर कर रहे है। गौरतलब है कि 15 नवंबर से ही शिल्प और सरस मेले की शुरुआत के साथ ही यह कलाकार महोत्सव में पहुंच गए थे और लगातार अपने-अपने राज्यों के लोक नृत्यों के माध्यम से पर्यटकों का मनोरंजन करने का काम कर रहे है।
 
 
 
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 5 दिसंबर तक चलने वाले अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट और सरस मेले में पर्यटकों के मनोरंजन के लिए और इस महोत्सव को भव्य स्वरूप देने के लिए कई तरह के लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाए जा रहे है। इस महोत्सव में जहां एक और हरियाणा और पंजाब की लोक संस्कृति देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर जम्मू एंड कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, दिल्ली, लद्दाख सहित कई राज्यों की अदभुत लोक संस्कृति देखने को मिल रही है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में आने वाले पर्यटक इन राज्यों की अदभुत और संगीतमय लोक संस्कृति को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए है।
 
 
 
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला के अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि महोत्सव में इन लोक कलाकारों ने अपना जौहर और अपने-अपने राज्यों की लोक संस्कृति को ब्रह्मसरोवर के तट पर दिखाकर इस भव्य आयोजन को और भव्य बनाने का काम किया है। इन लोक कलाकारों ने इस महोत्सव में ऐसा रंग भर दिया है कि इनको देखने वाले पर्यटकों को नाचने पर मजबूर कर दिया है। 
 
इस अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की गूंज यहां ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी सुनने को मिल रही है, दूर दराज से आने वाले पर्यटक जहां अपने राज्यों में जाने के बाद भी इस महोत्सव की जमकर प्रशंसा कर रहे है, वहीं इस महोत्सव के यादगारी पलों को अपने मोबाईल कैमरों में कैद करने का काम भी कर रहे है। यह पर्यटक इस महोत्सव का का सारा दिन खूब आनंद लेकर सुनहरी यादों के साथ अपने-अपने घरों को लौट रहे है।
 
 
 
ब्रह्मसरोवर के चारों तरफ बिखर चुकी है भारतीय संस्कृति की महक
 
ब्रह्मसरोवर के पावन तटों पर भारतीय संस्कृति की महक को दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है। इस संस्कृति की महक का एहसास करने के बाद एकाएक देश-विदेश के लोग अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की ओर खिंचे चले आ रहे है। इस महोत्सव में जहां शिल्पकार अपनी शिल्पकला से पर्यटकों को मोहित कर रहे है, वहीं विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार पर्यटकों का खूब मनोरंजन कर रहे है। अहम पहलू यह है कि ब्रह्मसरोवर की सदरियों में लगे स्टॉलों में भारतीय संस्कृति को दर्शन करवाती अद्भुत शिल्पकला से भारतीय संस्कृति की महक चारों तरफ फैल चुकी है और यहां पर आने वाले पर्यटक इसका जमकर आनंद उठा रहे है।
 
 
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव शिल्प और सरस मेले के 8वें दिन सुबह और शाम के समय दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों का विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार मनोरंजन करने का काम कर रहे है। उत्तरी तट पर जहां राजस्थानी लोक कलाकार कच्ची घोड़ी नृत्य की प्रस्तुति देकर पर्यटकों को नृत्य करने के लिए उत्साहित कर रहे है, वहीं उत्तर पश्चिमी तट पर बीन-बांसुरी की धुन पर लोक कलाकार भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे है। इस पावन तट के चारों तरफ किसी न किसी प्रदेश के कलाकर, बाजीगर, बहरुपिए भी पर्यटकों को लुभा रहे थे। शनिवार को इस शिल्प मेले की रौनक को बढ़ाने का काम विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों व विद्यार्थियों ने किया।
 
 
आसमान में खिली धूप ने महोत्सव के माहौल को और भी मनमोहक कर दिया, महोत्सव में आए विद्यार्थियों व पर्यटकों ने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया। बच्चों, जवान और बुजुर्गों ने महोत्सव में जमकर खरीददारी की और विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान मदमस्त होकर नृत्य किया। 
 
प्रशासन की तरफ से महोत्सव में पर्यटकों, शिल्पकारों, कलाकारों के लिए अच्छे प्रबंध किए गए है और यह सरस और शिल्प मेला पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। महोत्सव में 24 नवंबर से शुरु होने वाले मुख्य कार्यक्रमों के लिए केडीबी और प्रशासन द्वारा सभी तैयारियों को पूरा किया जा रहा है ताकि महोत्सव में आने वाले पर्यटकों को महोत्सव के दौरान सुखद अनुभूति मिले और वह यहां से अच्छी यादें अपने साथ लेकर वापिस जाएं।
 
 
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर ब्रह्मसरोवर का तट विभिन्न राज्यों की संस्कृति को अपने आगोश में समेट रहा है। इस तट पर विभिन्न राज्यों की संस्कृति पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। इस तट पर भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति को एक साथ देखने का मौका मिल रहा है। शिल्प और सरस मेले में ब्रह्मसरोवर के तट पर चारों तरफ लगे स्टालों पर पर्यटक जमकर खरीदारी कर रहे है। यह दुकान भारतीय शिल्पकला के सौंदर्य को भी चरितार्थ कर रही है।
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