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“वक्त बदल गया, पर मोहब्बत का रंग रहा वही”

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “ढाई आखर प्रेम का” नाटक का सफ़ल मंचन

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कालिदास सभागार विरसा विहार केंद्र पटियाला में कलंदर सोसाइटी जयपुर के कलाकार ढाई आखर प्रेम का नाटक का मंचन करते हुए।

न्यूज़म ब्यूरो

पटियाला, 8 मार्च : उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) पटियाला द्वारा केंद्र के निदेशक एम फुरकान खान के अगवानी मे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर काली दास ऑडिटोरियम, विरसा विहार केंद्र मे जयपुर की कलंदर सोसाइटी के कलाकारों ने “ढाई आखर प्रेम का” नाटक का शानदार सफ़ल मंचन किया।

कलाकारों ने अपने सफ़ल अभिनय से दर्शकों को पूरी तरह नाटक से जोड़े रखा। इस नाटक के निर्देशक रूचि भार्गव नरूला थी। जब कि नाटक के लेखक बसंत कन्नेटकर थे।

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इस नाटक की खास बात ये रही कि वर्ष 1974 मे भी ये नाटक पटियाला की सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी मे भी मंचित हुआ था ।जो कि मुंबई से फिल्म ऐक्टर मनमोहन कृष्ण की टीम ने किया था। अब 52 वर्षो के बाद जयपुर के कलाकारों ने इसे पटियाला मे मंचित किया।

“ढाई आखर प्रेम का” एक हल्की-फुल्की, संवेदनशील और व्यंग्यात्मक रोमांटिक कॉमेडी है, जो पीढ़ियों के बीच प्रेम की पुनरावृत्ति और उसकी विडंबनाओं को दर्शाती है।

कहानी एक जीवंत मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। प्रोफेसर मार्तंड वर्मा और प्रियम्वदा — जो स्वयं कभी विद्रोही प्रेमी रहे थे — अब अपनी गृहस्थी में रमे हुए हैं।

पच्चीस वर्ष पूर्व दोनों ने अपने प्रेम के लिए परिवार का विरोध झेला था। आज उनकी बेटी बबली अपने प्रिय बाजा बाबू से प्रेम करती है। विडंबना यह है कि कभी विद्रोही रही प्रियम्वदा अब अपनी बेटी के प्रेम का विरोध उसी प्रकार करने लगती हैं जैसे कभी उनकी माँ ने किया था। नाटक प्रेम की इस चक्रीय प्रकृति को हास्य और संवेदना के साथ प्रस्तुत करता है। जिसमे “वक्त बदल गया, पर मोहब्बत का रंग वही रहा।”

 

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