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Sant Baba Ishar Singh के 51वें बरसी समागम में पहुंचे CM सैनी, ₹21 लाख की घोषणा

Sant Baba Ishar Singh के 51वें बरसी समागम में CM नायब सिंह सैनी पिहोवा पहुंचे

उन्होंने संत की शिक्षाओं को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया और ₹21 लाख की घोषणा की

न्यूज़म ब्यूरो

नई दिल्ली , 17 सितंबर | Sant Baba Ishar Singh ने नाम-सिमरन, गुरबाणी और सेवा से मानव कल्याण का संदेश दिया। पिहोवा में 51वें बरसी समागम में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संत-महापुरुषों के जीवन को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि संत बाबा ईशर सिंह जी ने अपना जीवन नाम-सिमरन, गुरबाणी, कीर्तन, सेवा और मानव कल्याण को समर्पित किया।

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मुख्यमंत्री कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित जुरासी में संत बाबा ईशर सिंह दरबार पहुंचे। यहां उन्होंने संत बाबा ईशर सिंह जी राड़ा साहिब वालों के 51वें बरसी समागम में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने संत को श्रद्धापूर्वक नमन किया और साध-संगत का अभिनंदन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को 21 लाख रुपये देने की घोषणा की।

Sant Baba Ishar Singh की शिक्षाएं आज भी दे रही प्रेरणा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि संत-महापुरुषों का जीवन समाज को सही दिशा देता है। उन्होंने कहा कि संत बाबा ईशर सिंह जी ने पूरी जिंदगी सिमरन, गुरबाणी और सेवा को महत्व दिया।

उनकी साधना और सेवा की परंपरा आज भी श्रद्धालुओं को प्रेरणा दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी महापुरुष की बरसी केवल उन्हें याद करने का अवसर नहीं है। यह उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का अवसर भी है।

उन्होंने कहा कि संत शरीर रूप में हमारे बीच नहीं होते। लेकिन उनकी वाणी, विचार और सेवा की परंपरा समाज का मार्गदर्शन करती रहती है।

सेवा, सिमरन और मानव कल्याण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत बाबा ईशर सिंह जी की शिक्षाओं में सेवा और मानव कल्याण का विशेष महत्व था। समाज के प्रति समर्पण की भावना को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि संतों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर समाज में सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

भगवान विश्वकर्मा जयंती और PM मोदी के जन्मदिवस का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन विशेष महत्व रखता है। देशभर में भगवान विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। भगवान विश्वकर्मा को सृजन, निर्माण, कौशल और श्रम का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस भी है। इस अवसर पर देश और प्रदेश में सेवा, जनभागीदारी और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

5 अगस्त 1905 को हुआ था संत बाबा ईशर सिंह का जन्म

मुख्यमंत्री ने संत बाबा ईशर सिंह जी के जीवन और योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि संत बाबा ईशर सिंह जी का जन्म 5 अगस्त 1905 को पंजाब के पटियाला जिले के गांव आलोवाल में हुआ था।

उनके माता-पिता का नाम माता रतन कौर जी और सरदार राम सिंह नंबरदार जी था। बचपन में उनका नाम गुलाब सिंह था।

युवावस्था में उन्हें संत अत्तर सिंह जी रेरू साहिब वालों का सान्निध्य मिला। उनके मार्गदर्शन से उन्होंने अमृत छका और गुलाब सिंह से ईशर सिंह बने।

इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन सिमरन, सेवा और गुरमत के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।

51वें बरसी समागम में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

मुख्यमंत्री ने 51वें बरसी समागम के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संत बाबा मनी सिंह जी की अगुवाई में समागम श्रद्धा और धार्मिक भावना के साथ आयोजित किया गया।

समागम में श्री अखंड पाठ साहिब और सहज पाठ साहिब के भोग आयोजित हुए। इसके अलावा धार्मिक दीवान, संत समागम और कवि दरबार भी हुए।

कार्यक्रम में अरदास और अमृत संचार सहित कई धार्मिक आयोजन भी संपन्न हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन संगत को गुरु-घर से जोड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से संतों की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

बड़ी संख्या में साध-संगत ने लिया हिस्सा

समागम में बड़ी संख्या में साध-संगत ने भाग लिया। इस अवसर पर मुख्य जत्थेदार बाबा श्री मनी सिंह जी भी उपस्थित रहे।

पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, वरिष्ठ भाजपा नेता जयभगवान और जिला परिषद चेयरपर्सन कंवलजीत कौर मौर भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

इसके अलावा बाबा सुरजीत सिंह जी, बाबा दिलबाग सिंह जी, सरपंच निशान सिंह और मीडिया कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी उपस्थित रहे। उपायुक्त विश्राम मीणा सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी समागम में शिरकत की।

मुख्यमंत्री ने संत बाबा ईशर सिंह जी की शिक्षाओं को याद करते हुए सेवा, सिमरन, सद्भाव और मानव कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

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