पंचकूला के भानु स्थित आईटीबीपी प्रशिक्षण केंद्र में महत्वपूर्ण आयोजन हुआ
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के तत्वावधान में वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई
न्यूज़म ब्यूरो
पंचकूला, 15 सितंबर। पंचकूला के भानु में नॉर्थ जोन इंटर-सीएपीएफ डिबेट कॉम्पिटिशन 2026 हुआ। दीप भाटिया ने गंभीर संकट में भी Human Rights की रक्षा पर जोर दिया।

Human Rights पर हुआ सार्थक विमर्श
इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय बेहद महत्वपूर्ण और समसामयिक रखा गया था।
विषय था, “सबसे बुरे संकट में भी मानव अधिकार वैकल्पिक नहीं हैं।”
प्रतिभागियों ने संकट के दौरान मानव अधिकारों की भूमिका पर विचार रखे।
उन्होंने सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन पर भी चर्चा की।
मानव गरिमा की रक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण तर्क सामने आए।
प्रतियोगिता का उद्देश्य सुरक्षाबलों में मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना था।
इसके साथ अधिकारियों और जवानों को अपने विचार रखने का मंच मिला।
प्रतिभागियों ने तथ्यों और तर्कों के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए।
दीप भाटिया ने मानव गरिमा पर दिया जोर
हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया मुख्य अतिथि रहे।
उन्होंने प्रतियोगिता में जूरी सदस्य की जिम्मेदारी भी निभाई।
दीप भाटिया ने प्रतिभागियों के विचारों और प्रस्तुतीकरण की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के लिए मानव अधिकारों की समझ जरूरी है।
उन्होंने इसे केवल कानूनी आवश्यकता तक सीमित नहीं माना।
उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा चुनौतियां कितनी भी गंभीर क्यों न हों।
मानव गरिमा और अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने प्रतियोगिता को विचारों के आदान-प्रदान का बेहतर माध्यम बताया।
ऐसे आयोजनों से अलग-अलग दृष्टिकोण समझने का अवसर मिलता है।
कई केंद्रीय बलों ने लिया हिस्सा

प्रतियोगिता में कई केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टीमों ने हिस्सा लिया।
इसमें आईटीबीपी, सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल शामिल रहे।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया।
रेलवे सुरक्षा बल और असम राइफल्स की टीमें भी शामिल हुईं।
सशस्त्र सीमा बल ने भी प्रतियोगिता में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रत्येक बल की हिंदी और अंग्रेजी श्रेणी में टीमें शामिल हुईं।
दोनों भाषाओं में प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष और विपक्ष में तर्क रखे।
हर भाषा में चौदह प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रतिभागियों ने तथ्यों और तर्कों के जरिए विषय के पहलू सामने रखे।
तीन सदस्यीय जूरी ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता में तीन सदस्यीय जूरी ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
जूरी में दीप भाटिया भी शामिल रहे।
पंजाब विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. नमिता गुप्ता भी जूरी में रहीं।
पंचकूला की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुक्ता कुमार भी शामिल रहीं।
जूरी ने प्रतिभागियों के तर्कों और विषय की समझ को परखा।
प्रस्तुतीकरण और प्रभावी अभिव्यक्ति का भी मूल्यांकन किया गया।
जूरी सदस्यों ने प्रतिभागियों की विषय पर पकड़ की सराहना की।
उन्होंने समसामयिक मानव अधिकार मुद्दों की समझ को भी सराहा।
हिंदी श्रेणी में असम राइफल्स आगे
हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बेहतर प्रदर्शन किया।
पक्ष में असम राइफल्स के सूरज कुमार झा प्रथम रहे।
सीआईएसएफ के विकाश कुमार मिश्रा ने दूसरा स्थान हासिल किया।
बीएसएफ की अंकिता सिंह तीसरे स्थान पर रहीं।
विपक्ष में असम राइफल्स के किशन रॉय प्रथम रहे।
सीआईएसएफ के विशाल कपासिया ने दूसरा स्थान हासिल किया।
आईटीबीपी के कैलाश कुमार रावत तीसरे स्थान पर रहे।
टीम परिणाम में असम राइफल्स पहले स्थान पर रही।
सीआईएसएफ की टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया।
दोनों टीमों ने राष्ट्रीय स्तर के लिए क्वालीफाई किया।
अंग्रेजी श्रेणी में भी असम राइफल्स प्रथम
अंग्रेजी श्रेणी में भी प्रतिभागियों ने प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए।
पक्ष में असम राइफल्स के मेजर एस. कृष्ण कुमार प्रथम रहे।
आईटीबीपी के कमलप्रीत सिंह ने दूसरा स्थान हासिल किया।
सीआईएसएफ के युमखैबाम एल. लिवांग तीसरे स्थान पर रहे।
विपक्ष में असम राइफल्स की सपना चौहान प्रथम रहीं।
आरपीएफ की रेशमा कौर ने दूसरा स्थान हासिल किया।
आईटीबीपी के मोहन सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
टीम परिणाम में असम राइफल्स ने पहला स्थान हासिल किया।
आईटीबीपी की टीम दूसरे स्थान पर रही।
दोनों टीमों ने राष्ट्रीय स्तर के लिए जगह बनाई।
विजेताओं को किया गया सम्मानित

प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
उन्हें बेहतर तर्क और विषय की समझ के लिए सम्मान मिला।
प्रभावी अभिव्यक्ति और प्रस्तुतीकरण को भी सराहा गया।
कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की प्रशंसा हुई।
आयोजकों ने प्रतियोगिता को विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताया।
इससे सुरक्षाबलों में अधिकारों को लेकर समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भानु प्रशिक्षण केंद्र की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में भानु प्रशिक्षण केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आईटीबीपी अधिकारियों ने आयोजन में आवश्यक सहयोग और समन्वय दिया।
भानु प्रशिक्षण केंद्र के महानिरीक्षक रामाकांत शर्मा ने सहयोग किया।
उपमहानिरीक्षक वी.वी. नेगी ने भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वी.वी. नेगी को प्रतियोगिता का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था।
उनके मार्गदर्शन में आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।
प्रतिभागियों के प्रबंधन और कार्यक्रम संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया।
आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से पूरा किया गया।
ब्रिगेडियर जे.एस. गोऱाया ने भी व्यवस्थाओं की सराहना की।
उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र की ओर से मिले सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
Human Rights के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर
हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा भी मौजूद रहे।
उन्होंने ऐसे आयोजनों को जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं।
इनसे सुरक्षाबलों में मानव गरिमा और संवैधानिक मूल्यों की समझ बढ़ती है।
उन्होंने कानून के शासन के प्रति संवेदनशीलता को भी जरूरी बताया।
सुरक्षा बलों की जिम्मेदारियों के दौरान अधिकारों की रक्षा महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जटिल परिस्थितियों में संतुलित दृष्टिकोण जरूरी होता है।
सुरक्षा और मानव अधिकारों के बीच संवेदनशील संतुलन आवश्यक है।
उन्होंने संवाद और विमर्श को इसी दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
ऐसे आयोजन सुरक्षाकर्मियों को अलग-अलग परिस्थितियों को समझने में मदद करते हैं।
प्रतियोगिता ने सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े विषयों पर विचार का अवसर दिया।
कार्यक्रम में तर्क, संवाद और संवेदनशीलता पर विशेष जोर दिखाई दिया।
इस पहल से सुरक्षाबलों में मानव अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश गया।
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