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राजस्थान के बारां में AAP की बड़ी जीत, कांग्रेस का 15 साल पुराना कब्जा खत्म; पंजाब चुनाव पर भी नजर

बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया, कांग्रेस को 18 और बीजेपी को 9 सीटें मिलीं; नोखा में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला

राहुल गुप्ता
जयपुर, 15 सितंबर।

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन कुछ नतीजों ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के 15 साल पुराने कब्जे को खत्म करते हुए 60 में से 31 वार्ड जीत लिए हैं। बहुमत के लिए भी 31 सीटों की जरूरत थी, यानी आप ने अपने दम पर बोर्ड बनाने का आंकड़ा हासिल कर लिया है।

बारां में कांग्रेस को 18, बीजेपी को 9 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 2 वार्डों में जीत मिली। राजस्थान में सीमित राजनीतिक आधार वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह नतीजा स्थानीय राजनीति में अपनी जगह मजबूत करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

बारां में कैसे बदला राजनीतिक समीकरण?

बारां में लंबे समय से मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच माना जाता रहा था, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी ने इस समीकरण को बदल दिया।

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  • आप — 31 वार्ड
  • कांग्रेस — 18 वार्ड
  • बीजेपी — 9 वार्ड
  • निर्दलीय — 2 वार्ड

60 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी और आप ने ठीक इतनी सीटें जीत लीं। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए पार्टी को किसी दूसरी पार्टी या निर्दलीय पार्षद के समर्थन की जरूरत नहीं होगी।

बारां में आप के चुनाव अभियान में स्थानीय नेतृत्व और मुद्दों पर खास जोर रहा। नगर परिषद के पूर्व सभापति कमल राठौड़ ने पार्टी की ओर से चुनाव का नेतृत्व किया। राठौड़ ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। इसके बाद वे बीजेपी और कांग्रेस में भी रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव प्रचार में अरविंद केजरीवाल के नाम और तस्वीर को प्रमुखता देने के बजाय स्थानीय मुद्दों और स्थानीय चेहरों पर ज्यादा ध्यान दिया गया।

सभापति पद पर शीतल राठौड़ की दावेदारी

आप के बहुमत हासिल करने के बाद अब नजर सभापति पद के लिए उम्मीदवार के चयन पर है। बारां नगर परिषद का सभापति पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है।

कमल राठौड़ की पत्नी शीतल राठौड़ ने वार्ड 37 से चुनाव जीता है और उन्हें सभापति पद की मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

वार्ड 46 से आप उम्मीदवार कमल राठौड़ ने कहा कि बारां की जनता ने विकास को चुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्ट नेताओं को जनता ने नकार दिया है। राठौड़ ने कहा कि पार्टी अब लोगों की उम्मीदों को पूरा करने पर ध्यान देगी।

नोखा में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला

राजस्थान के नोखा में कांग्रेस के लिए नतीजे और ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहे। 45 वार्ड वाली नोखा नगर पालिका में सीपीआईएम ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

बीजेपी को 13 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस एक भी वार्ड जीतने में सफल नहीं रही।

सीपीआईएम ने अपनी जीत के पीछे स्थानीय और आर्थिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से चलाए जा रहे अभियान को प्रमुख कारण बताया है। पार्टी का दावा है कि बीजेपी से नाराजगी और कांग्रेस की कमजोर मौजूदगी ने उसके लिए राजनीतिक जगह बनाई।

राजस्थान में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

राजस्थान के 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में बीजेपी कुल मिलाकर सबसे बड़ी पार्टी रही। बीजेपी ने 4,179 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3,613 वार्ड मिले।

बीजेपी ने 10 नगर निगमों में से चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को 63, आम आदमी पार्टी को 42, माकपा को 38, बसपा को 19 और भारत आदिवासी पार्टी को 8 वार्डों में जीत मिली।

इन चुनावों में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाओं समेत कुल 309 शहरी स्थानीय निकाय शामिल थे।

हालांकि, बारां और नोखा जैसे नतीजे यह संकेत देते हैं कि राजस्थान में विपक्षी राजनीति का पूरा स्पेस केवल कांग्रेस और बीजेपी तक सीमित नहीं है। कुछ इलाकों में मतदाता तीसरे विकल्प को भी मौका दे रहे हैं।

पंजाब चुनाव से क्यों जुड़ रहा बारां का नतीजा?

राजस्थान में आप की जीत के बाद अब अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है और 2022 के विधानसभा चुनाव में उसने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं।

2027 में आप के सामने सत्ता बचाने की चुनौती होगी, जबकि कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी। बीजेपी भी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की बात कह चुकी है। वहीं शिरोमणि अकाली दल अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटा है।

ऐसे में पंजाब का मुकाबला इस बार केवल आप और कांग्रेस के बीच सीमित रहने की संभावना नहीं है।

कांग्रेस के लिए राजस्थान का बड़ा संदेश

बारां में आप की जीत को पंजाब के संदर्भ में सीधे चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता, लेकिन इससे कांग्रेस के सामने एक राजनीतिक चुनौती जरूर सामने आती है। अगर विपक्षी वोट अलग-अलग दलों और विकल्पों में बंटता है तो कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी मुश्किल हो सकती है।

पंजाब में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया है और संगठन में एकजुटता पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि विधानसभा चुनाव से पहले किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा।

AAP के सामने भी आसान नहीं होगी राह

राजस्थान के बारां की जीत आम आदमी पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन पंजाब में पार्टी के सामने स्थिति अलग है। यहां आप खुद सरकार में है और उसे विपक्षी दल के तौर पर नहीं, बल्कि सत्ता में किए गए कामकाज के आधार पर जनता के सवालों का जवाब देना होगा।

2022 में मिले भारी बहुमत को दोहराना पार्टी के लिए आसान नहीं माना जा रहा। सत्ता विरोधी भावना, आर्थिक चुनौतियां और सक्रिय विपक्षी दल 2027 के चुनाव में अहम मुद्दे हो सकते हैं।

आप भी चुनावी तैयारी में जुट गई है और 117 विधानसभा सीटों पर जमीनी फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

बीजेपी भी बना रही नई रणनीति

पंजाब में बीजेपी क

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