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Petrol Diesel Price Hike पर फिलहाल राहत

Petrol Diesel Price Hike Petrol Diesel Price Hike
Petrol Diesel Price Hike

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है
इससे भारत के कच्चे तेल के आयात बिल पर दबाव बढ़ा है

न्यूज़म ब्यूरो

नई दिल्ली,   10 सितंबर | कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद Petrol Diesel Price Hike की तत्काल संभावना कम है। भारत का क्रूड बास्केट 108.91 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। इससे आयात बिल और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चा तेल 110 डॉलर से ऊपर टिकने पर घरेलू ईंधन कीमतों में बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।

Petrol Diesel Price Hike पर क्या है संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर ही दाम बदल सकते हैं।
जानकारों का कहना है कि 110 डॉलर से ऊपर कीमत टिकने पर दबाव बढ़ेगा।
फिलहाल घरेलू ईंधन कीमतों में तत्काल बदलाव की संभावना कम बताई गई है।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है।
वहीं डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है।
आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव हुआ था।

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Crude Oil प्रिंसेस बढ़ने से आयात बिल पर दबाव

सितंबर में अब तक भारतीय क्रूड बास्केट का औसत 102.11 डॉलर रहा है।
अगस्त में यह औसत 90.19 डॉलर प्रति बैरल था।
इस तरह सितंबर में औसत कीमत में करीब 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

ब्रेंट क्रूड बुधवार को 100.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
बाद में यह करीब 99.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
अगस्त की शुरुआत से ब्रेंट की कीमत करीब 25 प्रतिशत बढ़ चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी महंगी पड़ती है।
इससे भारत की आयात लागत में प्रतिदिन करीब 42 मिलियन डॉलर बढ़ सकते हैं।

Oil Marketing Companies पर बढ़ा दबाव

कच्चे तेल की महंगाई से तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
सितंबर की शुरुआत में पेट्रोल पर विपणन मार्जिन नकारात्मक पांच रुपये प्रति लीटर था।
डीजल पर यह मार्जिन नकारात्मक 23 रुपये प्रति लीटर बताया गया।

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की वित्तीय स्थिति पर भी असर पड़ा है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इन कंपनियों का कर्ज बढ़ा है।

Crude Import Bill में बड़ी बढ़ोतरी

भारत ने वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती चार महीनों में 63.37 अरब डॉलर खर्च किए।
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह राशि 40.55 अरब डॉलर थी।
इस अवधि में कच्चे तेल के आयात खर्च में करीब 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

West Asia Conflict से आपूर्ति की चिंता

ईरान समर्थित हूती समूह के हमलों ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है।
सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
लाल सागर के रास्ते कच्चे तेल की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि अमेरिका, कनाडा और गुयाना जैसे देशों ने उत्पादन बढ़ाया है।
फिर भी वैश्विक तेल आपूर्ति में इस साल कमी का अनुमान है।

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