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लॉ कॉलेजों का फिजिकल निरीक्षण करें : BCI

रेगुलर पढ़ाई की जगह नहीं चलेगी कभी-कभार वीकेंड या शाम की क्लास

बंद करें प्रॉक्सी अटेंडेंस (किसी और की जगह हाज़िरी)

बिना ठीक से निरीक्षण किए जुगाड़ से मिल रही हैं लॉ कॉलेजों को मान्यता दे

निरीक्षण में क्लासरूम, लाइब्रेरी, पढ़ने की सुविधा, मौजूदा टेक्स्टबुक और जर्नल, इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस, इंटरनेट कनेक्टिविटी, मूट कोर्ट हॉल, कानूनी सहायता क्लीनिक, सेमिनार रूम, साफ़-सफ़ाई, आग से सुरक्षा के उपाय, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफ़िस और ‘लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008’ के तहत ज़रूरी अन्य सुविधाओं की हो जांच

लीगल एडिटर 

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लखनऊ, 29 अगस्त। कानूनी शिक्षा देने वाली सभी यूनिवर्सिटीज़ को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने निर्देश दिया कि वे अपने सभी संबंधित लॉ कॉलेजों का तुरंत फिजिकल निरीक्षण करें। इसके लिए छह हफ़्ते का देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी की संख्या, पढ़ाने के स्टैंडर्ड और BCI की मंज़ूरी की वैधता की जांच की जा सके।

यूनिवर्सिटीज़ के वाइस-चांसलर, रजिस्ट्रार, डीन और लॉ डिपार्टमेंट के प्रमुखों को जारी एक सर्कुलर में BCI ने कहा कि यूनिवर्सिटीज़ की लगातार यह ज़िम्मेदारी है कि वे संबंधित लॉ कॉलेजों पर नज़र रखें और एफिलिएशन (मान्यता) देने को सिर्फ़ एक बार की प्रक्रिया न समझें। BCI ने देखा है कि अदालतों ने बार-बार यूनिवर्सिटीज़ की आलोचना की है क्योंकि वे बिना ठीक से निरीक्षण किए या लॉ कॉलेजों द्वारा दी गई जानकारी की सच्चाई की जांच किए बिना ही मान्यता दे देती हैं।

BCI ने कहा कि यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट की उन मौखिक टिप्पणियों के बाद आया है, जो ‘के.आर. सुदर्शन बनाम बार काउंसिल ऑफ़ तमिलनाडु और पुडुचेरी’ मामले में की गईं। इस मामले में कानूनी शिक्षा देने वाले संस्थानों में कमियों की ओर इशारा किया गया।

यूनिवर्सिटीज़ को निर्देश दिया गया कि वे सक्षम निरीक्षण टीमें बनाएं जो संस्थानों का पूरी तरह से और हर संस्थान के हिसाब से फिजिकल निरीक्षण करें, न कि सिर्फ़ हलफ़नामे, फ़ोटो या ऑनलाइन सबमिशन पर निर्भर रहें। निरीक्षण में क्लासरूम, लाइब्रेरी, पढ़ने की सुविधा, मौजूदा टेक्स्टबुक और जर्नल, इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस, इंटरनेट कनेक्टिविटी, मूट कोर्ट हॉल, कानूनी सहायता क्लीनिक, सेमिनार रूम, साफ़-सफ़ाई, पहुंच (एक्सेसिबिलिटी), आग से सुरक्षा के उपाय, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफ़िस और ‘लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008’ के तहत ज़रूरी अन्य सुविधाओं की जांच होनी चाहिए।

BCI ने फैकल्टी की भी विस्तृत जांच अनिवार्य की, जिसमें उनकी योग्यता, नियुक्ति का रिकॉर्ड, हाज़िरी, बैंकिंग चैनल के ज़रिए सैलरी का भुगतान, UGC पे-स्केल का पालन और क्या संस्थानों में तय संख्या में खास तौर पर फुल-टाइम टीचर हैं या नहीं, ये सब शामिल है। BCI ने चेतावनी दी कि निरीक्षण के दिन फैकल्टी की अस्थायी मौजूदगी या सिर्फ़ कागज़ी रिकॉर्ड काफ़ी नहीं होंगे।

वीकेंड और शाम की क्लास बंद करें 

उल्लेखनीय है कि रेगुलेटर ने यूनिवर्सिटीज़ को निर्देश दिया कि वे ऐसे वीकेंड, शाम, कम समय वाले या शिफ्ट-आधारित लॉ कोर्स की पहचान करें और उन्हें बंद करें, जो रेगुलर कानूनी शिक्षा की अनिवार्य प्रकृति को कमज़ोर करते हैं। BCI ने कहा कि ऐसी कोई भी व्यवस्था जिसमें रेगुलर पढ़ाई की जगह कभी-कभार वीकेंड या शाम की क्लास होती हो या प्रॉक्सी अटेंडेंस (किसी और की जगह हाज़िरी) की सुविधा दी जाती हो, उसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए और ऐसी व्यवस्थाओं के तहत आगे कोई एडमिशन नहीं होना चाहिए।

प्रेस रिलीज़ में कहा गया, 

“यूनिवर्सिटीज़ को यह भी निर्देश दिया गया कि वे ऐसी किसी भी मंज़ूरी न मिली हुई वीकेंड या शाम की क्लास, या शिफ्ट-बेस्ड व्यवस्था की पहचान करें और उसे बंद करें, जो रेगुलर लॉ कोर्स की ज़रूरी शर्तों को कमज़ोर करती हो। पार्ट-टाइम स्टूडेंट्स या नौकरीपेशा लोगों के लिए रेगुलर पढ़ाई की जगह कभी-कभार वीकेंड या शाम की क्लास चलाने, या प्रॉक्सी अटेंडेंस (किसी और की जगह हाज़िरी) की सुविधा देने वाली किसी भी व्यवस्था को तुरंत बंद करना होगा और ऐसी किसी भी व्यवस्था के तहत आगे कोई एडमिशन नहीं दिया जाएगा। बार काउंसिल ऐसे लोगों को वकालत करने की इजाज़त नहीं देगी।”

BCI के सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि –

“नियमों के अनुसार, रेगुलर कोर्स का मतलब है ऐसा कोर्स जो दिन में कम से कम पाँच घंटे चले (जिसमें तय ब्रेक भी शामिल हो) और जिसका वर्किंग शेड्यूल हफ़्ते में कम से कम तीस घंटे का हो। ऐसी कोई भी व्यवस्था जो लॉ कोर्स के रेगुलर होने की ज़रूरी शर्त को कमज़ोर करती हो, रेगुलर पढ़ाई की जगह कभी-कभार वीकेंड या शाम की क्लास चलाती हो, या प्रॉक्सी अटेंडेंस की सुविधा देती हो, उसे तुरंत बंद कर दिया जाना चाहिए। ऐसी मंज़ूरी न मिली हुई व्यवस्थाओं में एडमिशन की इजाज़त नहीं दी जाएगी।”

छह हफ़्ते की समय-सीमा

BCI ने निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया – जिसमें इंस्पेक्शन, जांच-पड़ताल, सही आदेश जारी करना और यूनिवर्सिटी-वाइज़ कंबाइंड रिपोर्ट जमा करना शामिल है – छह हफ़्ते के अंदर पूरी कर ली जाए। यूनिवर्सिटीज़ से यह भी कहा गया कि वे तीन वर्किंग दिनों के अंदर सर्कुलर मिलने की पुष्टि करें, एक नोडल ऑफ़िसर नियुक्त करें और अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले लॉ कॉलेजों की पूरी लिस्ट दें। तय समय में यह प्रक्रिया पूरी न होने पर मामले को रेगुलेटरी विचार के लिए बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया की सक्षम कमिटी के सामने रखा जाएगा।

जहाँ ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, लाइब्रेरी, पढ़ाने के घंटों या अन्य ज़रूरी नियमों में कमियां पाई जाती हैं, वहां यूनिवर्सिटीज़ को निर्देश दिया गया है कि वे मान्यता सस्पेंड या रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करें और गंभीर उल्लंघनों की रिपोर्ट BCI को दें। उनसे यह भी कहा गया है कि वे वेरिफ़ाई करें कि हर कोर्स, सेक्शन और इनटेक के पास BCI की वैलिड और लागू मंज़ूरी है; साथ ही यह भी साफ़ किया गया कि यूनिवर्सिटी की मान्यता, BCI की मान्यता की जगह नहीं ले सकती।

राजधानी के कई लॉ कॉलेज को मिली है फर्जी मान्यता

राजधानी के कई लॉ कॉलेज को लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी मान्यता मिली हुई है। हालत यह है कि इन कॉलेज में अप्रूव टीचर नहीं है वेबसाइट और पोर्टल पर टीचरों के नाम कुछ और लिखे होते हैं और मौके पर पढ़ने वाले कोई और होते हैं यही नहीं अधिकतर कॉलेज में तो लॉ की कक्षाएं ही नहीं चलती हैं। मजेदार बात तो यह भी है कि लखनऊ विश्वविद्यालय ने खुद ही लॉ की सीट्स बढ़ाने के लिए अपनी इंजीनियरिंग की बिल्डिंग को लॉ की बता करके BCI से मान्यता ले ली है। जिसको लेकर पिछले दिनों खूब हंगामा हुआ था, और इस मामले में जब विश्वविद्यालय के प्रवक्ता से पूछा गया तो उन्होंने रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया हुआ नोटिफिकेशन दिखा दिया।

 

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