जेओए लाइब्रेरी भर्ती को वित्त विभाग से दो साल पहले मिली सहमति, लेकिन नहीं पूरी हुई भर्ती प्रक्रिया
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार नौकरियों के नाम पर सदन से लेकर सड़क तक झूठ बोल रही है। यह सरकार युवा और स्थायी नौकरी विरोधी है। कैबिनेट में नौकरियां घोषित की जाती हैं, फिर उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। सामान्य भर्ती की बात छोड़ दीजिए, जो भर्तियां माननीय न्यायालय के संज्ञान में हैं, उनकी स्टेटस रिपोर्ट भी सरकार माननीय उच्च न्यायालय को उपलब्ध करवाने से कतराती है। इसी तरह सरकार की ज्यादातर घोषणाएं, चाहे वे बजट की हों या कैबिनेट की, कागजों में ही सिमटकर रह जाती हैं। ताजा मामला जेओए लाइब्रेरी भर्ती का है, जिसमें सरकार ने मार्च 2024 से ही 771 पदों पर चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जानी थी। इनमें से 235 पदों पर वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी थी। लेकिन 78 पदों पर भर्ती शुरू हुई, वह भी अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंची और न ही लगातार न्यायालय में स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिस पर न्यायालय द्वारा कड़ा रुख अपनाया गया। यह हालत उन भर्तियों की है, जिन पर माननीय न्यायालय की नजर है। बाकी भर्तियों का क्या हाल होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने पांच लाख नौकरियों की झूठी गारंटी देकर सत्ता हासिल की थी और सत्ता में आने के बाद से ही लोगों को नौकरियों से हटाने तथा पद समाप्त करने की मुहिम चला रखी है। कभी एसडीओ के पद खत्म किए जाते हैं, तो कभी ड्राइवर के और कभी चौकीदार के पद खत्म किए जाते हैं। कभी एक साथ डेढ़ लाख से ज्यादा पद समाप्त करने का रिकॉर्ड बनाया जाता है। कोविड के समय अपनी जान पर दांव पर लगाने वाले युवाओं को नौकरी से निकाल दिया जाता है। सरकार सिर्फ मित्रों की सरकार बनकर काम कर रही है। फिनायल बेचने वाले मित्रों ने नर्स भर्ती के लिए आउटसोर्स एजेंसियां खोल रखी हैं। उनके जरिए जमकर धांधली हो रही है। सरकार के मंत्री मंचों से खुलेआम यह बताते हैं कि उन्होंने कितने लोगों को सिफारिश के आधार पर नौकरियां दिलवाई हैं।
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