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‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर चंडीगढ़ में भव्य आयोजन

चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन, सेक्टर 38 में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
चंडीगढ़, 7 नवंबर 2025:
चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन, सेक्टर 38 में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
 
कार्यक्रम में पंजाब के माननीय राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत जीएमएसएसएस-16 के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मधुर ‘वंदे मातरम्’ गायन से हुई। इसके पश्चात शहर के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने देश की संघर्ष से प्रगति तक की यात्रा को दर्शाते हुए रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें नृत्य, नाटक और माइम प्रस्तुति शामिल थीं।
 
इस अवसर पर छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा से आए लगभग 200 विद्यार्थियों ने भी भाग लिया, जो वर्तमान में गृह मंत्रालय तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय की संयुक्त पहल 17वें जनजातीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत चंडीगढ़ भ्रमण पर हैं। उनकी सहभागिता ने कार्यक्रम में एकता और सांस्कृतिक विविधता की भावना को और प्रबल किया।
 
कार्यक्रम में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण भी किया गया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता की आत्मा, शक्ति और एकता का पवित्र मंत्र है।” उन्होंने बताया कि यह गीत भारत की स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बना, जिसने असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया और पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे ‘वंदे मातरम्’ की भावना से प्रेरित होकर 2047 तक एक आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें।
 
माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने अपने संबोधन की शुरुआत “वंदे मातरम्” के नारे से करते हुए प्रधानमंत्री को इस राष्ट्रीय आयोजन के सफल आयोजन हेतु बधाई दी। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और स्वर है, जिसे श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने भारत माता को शक्ति और भक्ति के प्रतीक रूप में चित्रित करते हुए लिखा था। यह गीत ब्रिटिश काल में लिखा गया और इसमें राष्ट्र को एक पवित्र माता के रूप में तथा नागरिकों को उसके समर्पित संतानों के रूप में दर्शाया गया है। इसके दो संस्कृत श्लोक, जिन्हें भारत का राष्ट्रगीत घोषित किया गया, राष्ट्र की आध्यात्मिक गहराई का प्रतीक हैं।
 
राज्यपाल ने आनंदमठ से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि 1905 में बंगाल विभाजन के बाद यह नारा स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक प्रेरक शक्ति बन गया। उन्होंने मांगरह धाम और जलियांवाला बाग नरसंहार का स्मरण करते हुए शहीद ऊधम सिंह जैसे वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि यह गीत धर्म, क्षेत्र और भाषा से ऊपर उठकर पूरे भारत को देशभक्ति और राष्ट्रभावना के सूत्र में जोड़ता है।
 
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में श्रीमती हरप्रीत कौर भल, मेयर, चंडीगढ़; श्री सतनाम सिंह संधू, माननीय सांसद (राज्यसभा); श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, यू.टी. चंडीगढ़; डॉ. सागर प्रीत हूडा, आईपीएस, महानिरीक्षक पुलिस, चंडीगढ़; श्री स्वप्निल एम. नाइक, सचिव (हॉस्पिटैलिटी); श्री निशांत कुमार यादव, आईएएस, उपायुक्त, चंडीगढ़; तथा प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

 
 

 
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