चंडीगढ़। 7 नवंबर 25,
पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के हिंदी विभाग में महान वैष्णव भक्त एवं विद्वान प्रो. लक्ष्मीनारायण शर्मा की स्मृति में “प्रो. लक्ष्मीनारायण शर्मा: विचार और विरासत” विषय पर दो दिवसीय स्मृति एवं साहित्य उत्सव का शुभारंभ आई.सी.एस.एस.आर. परिसर के गोल्डन जुबली हॉल में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय गान से हुई। विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. अशोक कुमार ने स्वागत भाषण में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने गुरुओं के आदर्शों का अनुसरण कर ही हम ज्ञान की श्रेष्ठ परंपरा को आगे बढ़ा सकते हैं।
बीज वक्तव्य डॉ. गोविन्द सिंह (अध्यक्ष, मीडिया सलाहकार समिति, उत्तराखंड सरकार) ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रो. शर्मा की भाषा में गहन साहित्यिकता और भारतीय चिंतन की झलक मिलती है। मुख्य अतिथि प्रो. धर्मानंद शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग) ने उन्हें भारतीय विचार परंपरा का सच्चा साधक बताया। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. संतोष कुमारी शर्मा, डॉ. माधव कौशिक और श्री राजीव प्रसाद शामिल रहे।
प्रथम तकनीकी सत्र “वैष्णव भक्त: प्रो. लक्ष्मीनारायण शर्मा” विषय पर केंद्रित रहा, जिसकी अध्यक्षता डॉ. ईश्वर पवार ने की। मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि ज्ञान वही सार्थक है जो समय के प्रश्नों का समाधान दे। इस सत्र में डॉ. सरिता चौहान, रमनीक पंडित, डॉ. ऋतू भनोट, डॉ. जितेश पांडेय और डॉ. विनोद कुमार ने विचार रखे।
पुस्तक विमोचन समारोह में “प्रो. लक्ष्मीनारायण शर्मा: विचार और विरासत” तथा “शहर शहर सैलाब” का लोकार्पण हुआ। अध्यक्षता प्रो. कृष्ण कुमार कौशिक ने की। इस अवसर पर प्रो. अशोक कुमार और डॉ. अश्वनी शांडिल्य ने पुस्तकों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का समापन कवि सम्मेलन से हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. बलवेंद्र सिंह ने की। इसमें अश्वनी शांडिल्य, नारायण सिंह भदौरिया, विजय चौधरी और गणेश गनी ने काव्य पाठ किया।