Follow

कांग्रेस का वोट बैंक का '‘बैलेंस’' खत्म

Listen to this article

लेखक : पंडित मोहनलाल बडौली
प्रदेश अध्यक्ष, 
भाजपा- हरियाणा

महाराष्ट्र के BMC सहित 29 प्रमुख महानगरपालिकाओं के नगर निकाय चुनाव चुनाव नतीजों ने देश भर की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी भाजपा की ज़बरदस्त लोकप्रियता को पुनः दर्ज कर दिया है। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने प्रचंड बहुमत के साथ विजय प्राप्त की, जबकि विपक्षी महा विकास अघाड़ी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यह परिणाम न केवल स्थानीय स्तर पर विकास की जीत है, बल्कि भाजपा के राष्ट्रवाद और समावेशी शासन के पक्ष में जनता का स्पष्ट जनादेश भी है।

वर्ष 2026 के पहले चुनाव नतीजों में भाजपा के राष्ट्रवाद की जीत और विपक्ष के संकीर्ण और विभाजनकारी प्रांतवाद व भाषावाद की करारी हार हुई है। महाराष्ट्र की जनता ने इस चुनाव में स्पष्ट संदेश दिया है कि अब क्षेत्रीय विभाजनकारी राजनीति और संकीर्ण प्रांतवाद की भारत की राजनीति में कोई जगह नहीं है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा वर्षों से दोहराए जाने वाले ‘मराठी मानूस’ और ‘मी-मुंबईकर’ जैसे नारे, जो अक्सर उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय प्रवासियों के खिलाफ उन्माद फैलाने के लिए इस्तेमाल होते रहे, अब पूरी तरह से महाराष्ट्र की जनता ने अस्वीकार कर दिए गए हैं।

Advertisement

मुंबई जैसी वैश्विक आर्थिक राजधानी में जनता ने विकास, सुरक्षा और समावेशिता को प्राथमिकता दी। महायुति की जीत यह साबित करती है कि महाराष्ट्र अब उन राजनीतिक ताकतों को स्वीकार नहीं करता जो भाषा, क्षेत्र या प्रवासी बनाम स्थानीय के नाम पर समाज को बांटते हैं। यह उन लोगों के लिए ज़ोरदार तमाचा है जो गरीब उत्तर भारतीय मजदूरों को पीटने या दक्षिण भारतीयों को मुंबई से भगाने की भाषा बोलते रहे। जनता ने साफ कह दिया कि महाराष्ट्र सबका है और विकास हर किसी के लिए है। BMC में ठाकरे परिवार का 30 साल पुराना दबदबा टूट गया, जो एक बड़ा प्रतीकात्मक बदलाव है।

साथ ही महाराष्ट्र की उस भूमि से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ जहाँ आज से 140 वर्ष पूर्व 1885 में कांग्रेस की अंग्रेजों द्वारा स्थापना की गई थी। जनता ने कांग्रेस की वोट बैंक की घृणित राजनीति का भी अंत किया।

चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद कांग्रेस की बचकाने बहाने बनाने, जनादेश को अस्वीकार करने, लोकतंत्र के विरुद्ध अविश्वास फैलाने और हार को स्वीकार न करने पुरानी आदत फिर सामने आई। राहुल गांधी और उनकी टीम ने चुनाव आयोग पर बिना ठोस सबूत के आरोप लगाए, मतदान प्रक्रिया पर बचकाने सवाल उठाए लेकिन हकीकत यह है कि जनता ने कांग्रेस की विचारधारा को पूरी तरह नकार दिया।

महाराष्ट्र के अधिकांश प्रमुख नगर निगमों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला या बहुत कम सीटें मिलीं। कई जगहों पर पार्टी का सूपड़ा पूरी तरह साफ हो गया। यह परिणाम कांग्रेस के लिए गहरी चेतावनी है कि वोट बैंक की राजनीति अब नहीं चलती। ‘वोट बैंक का बैंक बैलेंस’ खत्म हो चुका है। जनता अब उन दलों को चुनती है जो वास्तविक विकास, सुरक्षा और राष्ट्रहित की बात करते हैं, न कि पुरानी जाति-क्षेत्र आधारित राजनीति की।

भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने विकास और एकता का संदेश दिया। भाजपा के नेतृत्व में महायुति की यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कुशल रणनीति और भाजपा के मजबूत संगठन क्षमता का परिणाम है। 29 में से अधिकांश महानगरपालिकाओं में महायुति का कब्जा हो गया, जिसमें BMC, पुणे, नागपुर, ठाणे, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, कल्याण-डोंबिवली जैसे बड़े शहर शामिल हैं। जबकि जनता ने उद्धव-राज गठबंधन, पाँवर-परिवार की जुगलबंदी और कांग्रेस गठबंधन की पूरी तरह नकार दिया।
यह विकास और विश्वास की राजनीति की जीत है। यह जीत देशभर के आगामी विधानसभा तथा अन्य चुनावों के लिए भी मजबूत संकेत है। देशभर की तरह महाराष्ट्र की जनता ने भी साफ कर दिया है कि वह जातिवाद, क्षेत्रवाद या विभाजनकारी राजनीति नहीं चाहती। वह राष्ट्रवाद, विकास, समावेशी शासन और एकजुट महाराष्ट्र चाहती है। ठाकरे बंधुओं की सियासी महत्वाकांक्षा और कांग्रेस की पुरानी रणनीति अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
यह चुनाव महाराष्ट्र के इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। जहां जनता ने संकीर्णता को ठुकराकर एक बड़े, मजबूत, समृद्ध और एकजुटता की नींव रख दी है।

 

What are your Feelings
Advertisement
Tap to Refresh