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शिरोमणी अकाली दल ने गर्वनर से सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करने की अपील की

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अकाली प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से कहा कि यदि स. मजीठिया को कोई नुकसान हुआ तो मुख्यमंत्री और डीजीपी गौरव यादव की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया जाएगा

चंडीगढ़ / 16जनवरी : शिरोमणी अकाली दल ने आज राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से पूर्व मंत्री स. बिक्रम सिंह मजीठिया की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी निर्देश पारित करने की अपील की, क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार यां पंजाब के डीजीपी पर भरोसा नही किया जा सकता कि वह  वरिष्ठ अकाली नेता की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएंगें।

राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं ने स. बिक्रम सिंह मजीठिया की जान को गंभीर खतरे के बारे में अवगत कराते हुए नेता के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ आप सरकार के इशारे पर उनके साथ किए जा रहे दुव्र्यवहार का भी हवाला दिया।

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वरिष्ठ नेताओं में बलविंदर सिंह भूंदड़,  महेशइंदर सिंह ग्रेवाल डाॅ. दलजीत सिंह चीमा, बीबा गनीव कौर मजीठिया,अर्शदीप सिंह कलेर,दमनबीर सिंह सोबती ने कहा कि स. मजीठिया और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए कोई भी ठोस कदम नही उठाया जा रहा किया जा रहा, जबकि केंद्रीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर हाईकोर्ट के निर्देशों में कहा गया था कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि अकाली नेता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए नाभा जेल की कोठरी में और कैमरे लगाए जा रहे हैं।

नेताओं ने जोर देकर कहा कि इन अतिरिक्त कैमरों की कोई आवश्यकता नही है, क्योंकि स. मजीठिया पर नजर रखने के लिए पहले से ही कई कैमरे लगाए जा चुके हैं। उन्होने कहा कि स. मजीठिया के वाॅशरूम और शौचालय की ओर कैमरा लगाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उन्हें बिना कपड़ों यां कम कपड़ों में और बिना पगड़ी  यां ‘परने ’के रिकाॅर्ड किया जा सके। नेताओं ने कहा कि यह अकाली नेता की निजा का उल्लंघन करने और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

पूरे मामले के बारे में बताते हुए नेताओं ने कहा कि स. मजीठिया की सुरक्षा से समझौता करने का प्रयास 29 मार्च को शुरू हुआ, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान और एडीजीपी (सुरक्षा) के इशारे पर अकाली नेता की सुरक्षा मनमाने ढ़ंग से गैरकानूनी रूप से हटा ली गई, जबकि उन्हे जेड सुरक्षा प्राप्त थी। नेताओं ने कहा कि जब स. मजीठिया ने इस संबंध में हाईकोर्ट का रूख किया तो डीजीपी गौरव यादव ने एक झूठा हलफनामा दायर  किया जिसमें कहा गया कि किसी आतंकवादी संगठन यां गैंगस्टरों से नेता की जान को कोई खतरा नही है।

इस ज्ञापन में कहा गया कि इस साल 1 जनवरी को दो डीआईजी ने स. मजीठिया से जेल में मुलाकात की और उन्हे सूचित किया कि उन्हे सूचना मिली है कि जेल परिसर के अंदर बी.के.आई द्वारा जेल परिसर के अंदर उन्हें निशाना बनाया जाएगा। इसमें कहा गया है कि जब जेल सुपरिडेंट से पूछे जाने के बावजूद इस मुददे पर चुप्पी साध ली तो स. मजीठिया ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को अपनी जान के खतरे के बारे में सूचित कियया। इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ नेता के वकील को भी इस खतरे की आशंका से संबंधित खुफिया जानकारी नही दी गई।

ज्ञापन में कहा गया कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि जिस तरह से गैंगस्टरों ने सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा हटाए जाने की जाने की खुफिया जानकारी की तरह ही इसे भी मीडिया में उसी तरह से प्रसारित किया गया । इसमें यह भी बताया गया कि 15 जनवरी को बीबा गनीव कौर मजीठिया जब अपने पति से मिलने नाभा जेल में गई तो उनकी मुलाकात रिकाॅर्ड करने के लिए कैमरे लगाए गए थे। उन्होने कहा,‘‘ इस बात की गंभीर आशंका है कि कैमरों में माइक भी लगाए गए हैं।’’

नेताओं ने राज्यपाल को बताया कि उन्हें राज्य सरकार यां पंजाब के डीजीपी पर कोई भरोसा नही है और अगर स. मजीठिया को कोई नुकसान हुआ तो इसके लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी गौरव यादव की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

अकाली प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता पर किए जा रहे हमले को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। सरकार पंजाब केसरी समूह को उसकी प्रेस और उससे जुड़े कारोबारों पर छापे मार कर डरा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि  21 अक्टूबर 2025 से पंजाब केसरी ग्रुप के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से संबंधित विपक्ष के आरोपों के बारे एक समाचार के प्रकाशन के बाद शुरू हुई।  प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इसके बाद 2 नवंबर को पंजाब केसरी ग्रुप को दिए जाने वाले विज्ञापन पर रोक लगा दी गई और जनवरी में ग्रुप को प्रिंटिग प्रेस और एक होटल पर छापे मारे गए ।प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि होटल के आबकारी लाइसेंस और बिजली कनेक्शन भी रदद कर दिया गया। इस बात पर जोर देते हुए कि इस तरह के कृत्यों से लोकतंत्र कमजोर होता है , राज्यपाल से लोकतंत्र को कमजोर होने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। 

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