हरियाणा कैबिनेट ने स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार के लिए फार्मेसी अधिकारियों की भर्ती के नियमों में ढील दी
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 24 मार्च। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट (ग्रुप-C) सेवा नियम, 1998 में संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य पूरे राज्य में कर्मचारियों की कमी को दूर करना और स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार करना है।
वर्ष 2021 में फार्मासिस्ट के पद का नाम बदलकर फार्मेसी अधिकारी किए जाने के बाद, न्यूनतम योग्यता को बढ़ाकर फार्मेसी में स्नातक डिग्री (Bachelor’s Degree) कर दिया गया था, साथ ही अस्पताल-आधारित फार्मेसी सेवाओं में अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त भी जोड़ दी गई थी। हालाँकि, इन कड़े मानदंडों के कारण पात्र उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो गई, जिससे सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में पद खाली रहने लगे। इस समस्या को दूर करने के लिए कैबिनेट ने सेवा नियमों से अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त को हटाने की मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि इस कदम से पात्र उम्मीदवारों का दायरा काफी बढ़ जाएगा और भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी आएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, कैबिनेट ने फार्मेसी अधिकारी के पद के लिए भर्ती अनुपात में बदलाव को मंजूरी दी है। सीधी भर्ती का हिस्सा 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पदोन्नति (promotion) का कोटा 25 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
कैबिनेट ने सेवा नियमों में संशोधित वेतनमानों को शामिल करने की भी मंजूरी दी है। फार्मेसी अधिकारियों के लिए वेतन स्तर को FPL-6 से अपडेट करके FPL-6A कर दिया गया है, जिसमें संशोधित मूल वेतन (basic pay) 39,900 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे वित्त विभाग पहले ही मंजूरी दे चुका है।
उम्मीद है कि इस कदम से हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी, क्योंकि इससे योग्य फार्मेसी अधिकारियों की समय पर भर्ती सुनिश्चित होगी और पूरे राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की कमी को दूर किया जा सकेगा।
हरियाणा मंत्रिमंडल ने ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के पात्रता मानदंडों में किया संशोधन
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पैरा-मेडिकल एवं विविध पद (राज्य समूह ‘ग’) सेवा नियम, 1998 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई। इस संशोधन का उद्देश्य ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (OTA) पद के लिए शैक्षणिक योग्यताओं को अद्यतन एवं युक्तिसंगत बनाना है।
यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण में समय के साथ हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पूर्व में इस पद के लिए पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ जैसे संस्थानों से ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट का विशिष्ट डिप्लोमा कोर्स आवश्यक था। हालांकि, वर्ष 2009 से ऐसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम बंद कर दिए गए हैं और उनकी जगह बैचलर ऑफ साइंस इन मेडिकल टेक्नोलॉजी (ऑपरेशन थिएटर/एनेस्थीसिया) जैसे डिग्री आधारित कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने वर्तमान शैक्षणिक मानकों के अनुरूप संशोधित पात्रता मानदंडों को मंजूरी दी है। संशोधित नियमों के अनुसार, सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी के पास 10+2 विज्ञान (भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा जीवविज्ञान/गणित) के साथ किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से बैचलर डिग्री इन मेडिकल टेक्नोलॉजी (ऑपरेशन थिएटर/एनेस्थीसिया) होना अनिवार्य होगा। हिंदी या संस्कृत के ज्ञान संबंधी प्रावधान यथावत रखे गए हैं।
संशोधनों के तहत पदोन्नति एवं प्रतिनियुक्ति के माध्यम से नियुक्ति के पात्रता मानदंडों को भी युक्तिसंगत बनाते हैं । पदोन्नति के लिए अभ्यर्थी के पास 10+2 विज्ञान के साथ किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के ऑपरेशन थिएटर में समूह-डी कर्मचारी के रूप में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। वहीं प्रतिनियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के साथ ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के रूप में संबंधित अनुभव अनिवार्य होगा।
इस निर्णय से राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के ऑपरेशन थिएटरों में योग्य तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा मानकों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
हरियाणा मंत्रिमंडल ने उपयोगिता प्रमाण पत्रों के मानक प्रारूप को दी मंजूरी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अनुदान सहायता के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) प्रस्तुत करने हेतु मानक प्रारूप लागू करने के लिए हरियाणा वित्तीय नियम, खंड-1 के नियम 8.14 (ख) में संशोधन को मंजूरी दी गई।
वर्तमान में अनुदान प्राप्त करने वाले संस्थानों, स्थानीय निकायों, बोर्डों, निगमों और सहकारी समितियों को यह पुष्टि करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है कि निधि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया है, जबकि मौजूदा नियमों के तहत कोई एकसमान प्रारूप निर्धारित नहीं था, जिसके कारण रिपोर्टिंग में भिन्नताएं पैदा हुई और एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।
इस कमी को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल ने नियमों में उपयोगिता प्रमाण पत्र का विस्तृत प्रारूप शामिल करने को मंजूरी दी। मानकीकृत प्रारूप को सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले सभी विभागों और संस्थाओं में एकरूपता लाने के लिए तैयार किया गया है और इसमें हरियाणा के प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं पात्रता) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है।
संशोधित प्रावधान के तहत अनुदान स्वीकृत करने या निकालने के लिए जिम्मेदार अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि अनुदान से जुड़ी सभी शर्तें पूरी हो गई हैं। उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रधान महालेखाकार के साथ सहमति से तय अंतराल पर निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नियमों में सत्यापन तंत्र भी अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें अभिलेखों का रखरखाव, सहायक दस्तावेजों की प्रस्तुति और निधियों के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लेखा परीक्षा या निरीक्षण शामिल हैं।
इस निर्णय से हरियाणा के विभिन्न विभागों और संस्थानों में सार्वजनिक धन के उपयोग में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रेजरी नियमों के तहत लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) के प्रारूप में संशोधन को दी मंजूरी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा ट्रेजरी नियम, वॉल्यूम-II के नियम 4.176 के अंतर्गत निर्धारित लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) के प्रारूप में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई है। यह नियम हरियाणा राज्य में लागू है।
यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों से संबंधित वित्तीय अभिलेखों की प्रणाली को आधुनिक एवं अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसका उपयोग विशेष रूप से किसी सरकारी कर्मचारी का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरण के समय होता है। लास्ट पे सर्टिफिकेट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें कर्मचारी के वेतन, भत्तों, कटौतियों, ऋणों एवं अग्रिमों से संबंधित विस्तृत जानकारी होती है, जिससे विभागों के बीच वित्तीय प्रक्रिया का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है।
वित्त विभाग के स्वीकृति के अनुसार, लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) के संशोधित प्रारूप में हालिया प्रशासनिक एवं वित्तीय सुधारों के अनुरूप कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। नए प्रारूप में विशेष रूप से यूनिक कोड पेयी तथा स्थायी सेवानिवृत्ति खाता नंबर (PRAN) को शामिल करने का प्रावधान किया गया है, जो हाल के वर्षों में कर्मचारी के वित्तीय अभिलेखों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त, सेवा की पूरी अवधि के सत्यापन से संबंधित एक नया कॉलम भी जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।
संशोधित प्रारूप में अब कर्मचारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे—लेवल, बेसिक पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही, इनकम टैक्स, GPF/PRAN, सब्सक्रिप्शन, एडवांस और रिकवरी सहित पूरी कटौती लेने का भी प्रावधान शामिल किया गया है।