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मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से यूपी की बेटियों को लगे ‘पंख’, अब तक 250 से अधिक ने पाई सफलता

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योगी सरकार की अभ्युदय योजना का मिला लाभ, यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने लहराया परचम

एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने अब तक कराया रजिस्ट्रेशन

2025 में योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता

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महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं यूपी की बेटियां

‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए बन रहीं हैं प्रेरणा

राहुल भटनागर 

लखनऊ, 22 मार्च : उत्तर प्रदेश की बेटियां अब सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें साकार भी कर रहीं हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना इनके लिए ऐसे ‘पंख’ बनकर उभरी है, जिसके सहारे वे देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहरा रही हैं। संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में इस योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। खास बात ये है कि इस योजना के जरिए अब तक ढाई सौ से अधिक बेटियां सफलता हासिल कर चुकीं हैं और अधिकारी बनकर यूपी को दिशा दिखा रहीं हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि योगी सरकार की शिक्षा केंद्रित योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रमाण है।

महंगी कोचिंग के बिना भी बड़ी सफलता
2021 में शुरू हुई मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को जोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत मंच दिया है। खास बात यह है कि बेटियां इस योजना के जरिए महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं हैं।
‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं।

मानसी : सेल्फ स्टडी से 444वीं रैंक तक का सफर
गाजियाबाद के प्रताप विहार की रहने वाली मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 444वीं रैंक हासिल की। प्राइवेट जॉब करने वाले पिता समेत परिवार में पांच सदस्य हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मानसी ने घर पर ही तैयारी की और अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन से सफलता हासिल की।

अदिति सिंह: पढ़ाई के साथ दूसरों का भी किया मार्गदर्शन
झांसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। इंजीनियर पिता और शिक्षिका मां की बेटी अदिति ने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। खास बात यह रही कि वह स्वयं भी अभ्युदय योजना के तहत अन्य छात्रों को पढ़ाकर उनकी मदद करती रहीं।

तनीषा सिंह : घर से पढ़ाई, बड़ा मुकाम
आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल की। रेवेन्यू इंस्पेक्टर पिता और गृहिणी मां के परिवार से आने वाली तनीषा ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और अभ्युदय योजना की सहायता से सफलता प्राप्त की।

कीर्तिका सिंह : डिप्टी एसपी बन मिसाल बनीं
लखनऊ की रहने वाली कीर्तिका सिंह 2022 में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी बनीं। एटा में तैनात कीर्तिका किसान परिवार से हैं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तैयारी की और अभ्युदय योजना का लाभ उठाया।

बदलती तस्वीर : गांव-शहर हर जगह जल रही शिक्षा की लौ
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि बेटियों में आत्मविश्वास भी जगाया है। अब वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।

संदेश है साफ : अवसर मिला तो बेटियां उड़ान भरेंगी
इन सफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर सही दिशा और संसाधन मिलें, तो प्रदेश की बेटियां देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज उन लाखों सपनों को आकार दे रही है, जो कभी संसाधनों के अभाव में अधूरे रह जाते थे।

 

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