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300 करोड़ की जमीन का घोटाला हरियाणा विधानसभा में गूंजा

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विधायक भारत भूषण बत्तरा ने उठाया हरियाणा टेलीकॉम प्रकरण, पूछा – NCLT के फैसले से पहले 70 करोड़ का पेनल ब्याज कैसे माफ, 300 करोड़ की जमीन 25.14 करोड़ में कैसे ट्रांसफर हुई ?

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़ 6 मार्च : रोहतक के बहुचर्चित करीब 300 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े घोटाले का मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा। रोहतक से कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्तरा ने हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड से जुड़े पूरे प्रकरण को सदन में प्रमुखता से उठाते हुए सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।

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बत्तरा ने कहा कि यह मामला केवल एक कंपनी के दिवालिया होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य सरकार की भूमिका, प्रशासनिक जवाबदेही, संभावित राजस्व हानि, बेनामी लेन-देन और राजनीतिक संरक्षण जैसी कई गंभीर आशंकाएं जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने बताया कि हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड, जिसकी स्थापना स्वर्गीय चौधरी देवेंद्र सिंह ने की थी, वर्ष 2019-20 में आर्थिक संकट के कारण बंद हो गई। उस समय कंपनी पर करीब 96 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसमें से लगभग 86.6 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों का बकाया था।

एक निजी कंपनी द्वारा लगभग 8 करोड़ रुपये की वसूली के लिए NCLT में दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद 12 अप्रैल 2023 को समाधान योजना के तहत कंपनी को 25.14 करोड़ रुपये में अधिग्रहित करने की मंजूरी दे दी गई। निर्धारित समय पर भुगतान न होने पर 4 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी जब्त की गई, जिसके बाद एक अन्य इकाई द्वारा 21.14 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा कराया गया।

बत्तरा ने सदन में कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन का कलेक्टर रेट करीब 75 करोड़ रुपये है, NCLT में जिसकी कीमत 200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई और स्थानीय बाजार में जिसकी कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, वही संपत्ति मात्र 25.14 करोड़ रुपये में कैसे ट्रांसफर कर दी गई।

उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं 86 करोड़ रुपये से अधिक की लेनदार थी, तब सरकार ने IBC की धारा 30(2) के तहत समाधान योजना पर प्रभावी आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई। साथ ही धारा 61 के तहत अपील क्यों नहीं की गई और यदि अपील लंबित है तो राज्य हित की रक्षा के लिए अंतरिम आवेदन क्यों नहीं दिया गया।

बत्तरा ने यह भी सवाल उठाया कि NCLT के अंतिम फैसले से पहले ही लगभग 70 करोड़ रुपये से अधिक का पेनल ब्याज माफ कर NDC जारी करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे-छोटे मामलों में सुप्रीम कोर्ट तक चली जाती है, लेकिन यहां सैकड़ों करोड़ रुपये के संभावित नुकसान के बावजूद भी सरकार की चुप्पी समझ से परे है।

विधायक बत्तरा ने प्रकरण में बेनामी लेन-देन की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार NCLT के सामने रेजोल्यूशन अप्लिकेंट के रूप में अभिमन्यु महलावत का नाम था, लेकिन अंतिम नियंत्रण किसी अन्य कंपनी को मिल गया। भुगतान भी एक तीसरी इकाई “किशोरी जी” के माध्यम से किया गया, जिसकी राशि करीब 50 अलग-अलग लोगों से एकत्रित की गई बताई जा रही है।

बत्तरा ने कहा कि यदि वास्तविक लाभार्थी और प्रत्यक्ष क्रेता अलग-अलग हैं तो यह बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम 1988 के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मामला और गंभीर तब हो जाता है जब अपील लंबित है और विधिवत लाइसेंस भी जारी नहीं हुआ, इसके बावजूद “मांझी होम्स” नाम से आवासीय व वाणिज्यिक कॉलोनी का प्रचार किया जा रहा है, लेआउट जारी किए जा रहे हैं और लोगों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

बत्तरा ने कहा कि यह हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम 1975 की धारा 7 का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होता है। इसके अलावा करीब 18 एकड़ क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ों की कटाई की सूचना भी सामने आई है, जो यदि बिना अनुमति के हुई है तो यह पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य को सैकड़ों करोड़ रुपये की संभावित राजस्व हानि, प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल, बेनामी लेन-देन की आशंका और भोली-भाली जनता को भ्रमित करने का गंभीर मुद्दा जुड़ा हुआ है।

विधायक भारत भूषण बत्तरा ने सदन के माध्यम से मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए, फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए, जब तक मामला अंतिम रूप से स्पष्ट न हो किसी भी प्रकार का लाइसेंस जारी न किया जाए और बिना लाइसेंस कॉलोनी विकसित करने व प्लॉट बेचने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य को जानबूझकर राजस्व हानि पहुंचाई गई है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। बत्तरा ने कहा कि यदि यह पूरा प्रकरण कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ सीधा विश्वासघात है!

 

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