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निराशा के अंधेरे से लौटे 867 लोग, नागपुर के इस क्लिनिक ने जगाई जीने की उम्मीद

आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे 1,443 लोगों ने मांगी मदद, इलाज और काउंसलिंग के जरिए मानसिक संकट से उबरने की दिशा में बढ़े कदम।

राहुल गुप्ता

नागपुर, 12 अक्टूबर। मानसिक संघर्ष से गुजर रहे लोगों को समय पर मदद और उपचार मिले, तो उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई जा सकती है। नागपुर के क्षेत्रीय मनोरोग अस्पताल में संचालित ‘सुसाइड प्रिवेंशन क्लिनिक’ के आंकड़े इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने लाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले तीन से चार वर्षों में आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे 867 लोगों को उपचार और काउंसलिंग की मदद से इन विचारों से बाहर निकलने में सहायता मिली है।

1,443 लोगों ने क्लिनिक में मांगी मदद

क्षेत्रीय मनोरोग अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 2023 से 2026 के बीच अवसाद और आत्महत्या के गंभीर विचारों के कारण कुल 1,443 लोगों ने इस क्लिनिक में मदद ली। इनमें 849 पुरुष और 594 महिलाएं शामिल थीं।

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समाज में अक्सर यह धारणा रहती है कि पुरुष अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं करते। हालांकि, क्लिनिक में मदद लेने वाले पुरुषों की अधिक संख्या मानसिक तनाव और सहायता की जरूरत से जुड़े सवालों को सामने लाती है।

फिलहाल क्लिनिक में 648 लोगों का उपचार जारी है। मनोचिकित्सक और काउंसलर उन्हें मानसिक संकट से उबरने में मदद कर रहे हैं।

विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक परेशानी

रिपोर्ट के अनुसार, पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा तनाव विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन रहा है। 2023-24 में 16 विद्यार्थियों ने अवसाद के कारण क्लिनिक में मदद मांगी थी। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 22 और 2025-26 में 30 हो गई। वर्ष 2026 के शुरुआती आंकड़ों में अब तक 12 विद्यार्थियों का नाम दर्ज किया गया है।

पढ़ाई का दबाव, प्रतिस्पर्धा, करियर को लेकर अनिश्चितता और आभासी दुनिया के कारण बढ़ता अकेलापन विद्यार्थियों के मानसिक तनाव से जुड़े संभावित कारणों में शामिल हैं। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भूमिका अहम हो जाती है।

किसान और आम नागरिक भी मानसिक संकट से जूझ रहे

मानसिक तनाव का सामना करने वालों में किसान भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं, फसल खराब होने और कर्ज के बोझ जैसी परेशानियों से जूझ रहे 123 किसानों ने पिछले कुछ वर्षों में इस केंद्र में उपचार लिया।

इसके अलावा, घरेलू विवाद, आर्थिक तंगी और रिश्तों में तनाव जैसी समस्याओं से परेशान 1,248 आम नागरिकों ने भी आत्महत्या के विचारों से बाहर निकलने के लिए क्लिनिक की मदद ली।

समय पर बातचीत और उपचार से मिल सकती है मदद

यदि परिवार, मित्रों या आसपास किसी व्यक्ति के व्यवहार में लगातार उदासी, चुप्पी या बेचैनी दिखाई दे, तो उससे संवेदनशीलता के साथ बातचीत करना जरूरी है। बिना आलोचना किए उसकी बात सुनना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना उपयोगी हो सकता है।

मानसिक संकट से गुजर रहे व्यक्ति को अकेला महसूस नहीं होने देना और समय पर पेशेवर सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। मुश्किल समय में भी मदद के रास्ते मौजूद हैं और उचित उपचार के जरिए स्थिति में सुधार संभव है।

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