जिला न्यायालय परिसर पंचकूला और कालका में हुआ राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
न्यूज़म ब्यूरो
पंचकूला : मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पंचकूला अजय कुमार घनघस ने जानकारी दी कि जगदीप सिंह लोहान, सदस्य सचिव, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के तहत और संजय संधिर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, डीएलएसए पंचकूला के मार्गदर्शन में पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन जिला न्यायालय परिसर, पंचकूला के साथ-साथ उप-मंडल कालका में भी किया गया।
सीजेएम अजय कुमार घनघस ने बताया कि लोक अदालत के सुचारू और प्रभावी संचालन के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचकूला की मंजूरी से आठ पीठों (बेंचों) का गठन किया गया था। इन पीठों की अध्यक्षता विजयंत सहगल अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचकूला, बिक्रमजीत अरोड़ा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचकूला, रेखा प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय पंचकूला, कीर्ति वशिष्ठ सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ प्रभाग) पंचकूला, अपर्णा भारद्वाज मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचकूला, मनमीत कौर घुमन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पंचकूला, अरुणिमा चौहान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पंचकूला और अभिमन्यु राजपूत उप-मंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट कालका द्वारा की गई ।
इस अवसर पर जगदीप सिंह लोहान, सदस्य सचिव, हलसा ने स्वयं जिला न्यायालय परिसर, पंचकूला का दौरा किया और लोक अदालत की पीठों के कामकाज की समीक्षा की। अपने दौरे के दौरान उन्होंने कार्यवाही का अवलोकन किया और विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे को सुगम बनाने तथा पक्षों के बीच सद्भाव बहाल करने में न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं द्वारा किए गए निष्ठापूर्ण प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मुकदमों से जुड़े लोगों से भी बातचीत की और लोक अदालत के ज़रिए अपने मामलों के निपटारे के बारे में उनके अनुभव सुने। कई लोगों ने बताया कि लोक अदालत से उन्हें राहत और संतोष का एहसास हुआ, क्योंकि उनके विवाद बिना किसी लंबी कानूनी लड़ाई के तनाव के, एक सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण माहौल में सुलझ गए। लोगों ने अपने विवादों के तीव्र, सौहार्दपूर्ण और मानवीय तरीके से समाधान पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की।
लोक अदालत के दौरान विभिन्न श्रेणियों के मामले उठाए गए और उनका निपटारा किया गया। इनमें राजस्व मामले, मुकदमे से पहले के चरण में बैंक ऋण वसूली के मामले, समझौता योग्य आपराधिक मामले, दीवानी विवाद, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के मामले, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैवाहिक विवाद, यातायात चालान, भूमि अधिग्रहण के मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत मामले, सेवा मामले और अन्य विविध मामले शामिल थे।
जगदीप सिंह लोहान ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय की सच्ची भावना का प्रतिनिधित्व करती है, जहाँ न केवल विवादों का निपटारा होता है, बल्कि बातचीत और आपसी समझ के ज़रिए रिश्तों को भी सुधारा जाता है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोक अदालत पक्षों को अपने विवाद शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करती है, जिससे कीमती समय और मुकदमेबाज़ी का खर्च बचता है, और साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है।
अजय कुमार घनघस ने कहा कि ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकूला विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की संस्कृति को मज़बूत करने और समाज में सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जनता को प्रोत्साहित किया कि वे सभी के लिए सुलभ न्याय सुनिश्चित करने की परिकल्पना के अनुरूप, अपने विवादों को शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए लोक अदालतों का लाभ उठाएँ।
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