सरकारी मकान पाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को देना होगा स्वयं आवास में रहने का प्रमाण-पत्र
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 7 अगस्त। हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ में आवंटित सरकारी मकानों के दुरुपयोग, विशेषकर सबलेटिंग (किराये पर देने) पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ऐसे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) लेने का निर्णय लिया है, जिन्हें यूटी चंडीगढ़ प्रशासन अथवा राज्य सरकार द्वारा सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक आवंटी को यह प्रमाणित करना होगा कि उसने आवंटित सरकारी आवास किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं दिया है तथा वह स्वयं उसी आवास में रह रहा है।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि यूटी चंडीगढ़ की हाउस अलॉटमेंट कमेटी के सचिव ने सरकार को अवगत कराया है कि पंजाब एवं हरियाणा सरकारों, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को जनरल पूल से आवंटित सरकारी आवासों में सबलेटिंग, अनधिकृत कब्जे, दुरुपयोग तथा बिना अनुमति किए गए निर्माण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी पात्र सरकारी कर्मचारियों से स्व-प्रमाणन प्राप्त किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवंटित सरकारी आवास का उपयोग नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।
मुख्य सचिव रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा विधानसभा, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी), लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के इंजीनियर-इन-चीफ सहित सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रणाधीन ऐसे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से निर्धारित प्रमाण-पत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें, जिन्हें सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं।
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