न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 19.01.26 : यूटी चंडीगढ़ उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने आज एस्टेट कार्यालय तथा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय का दौरा कर संपत्ति से संबंधित अभिलेखों के स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण कार्य की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरे का उद्देश्य एक समग्र, सटीक एवं विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली के निर्माण हेतु किए जा रहे कार्य की गति एवं गुणवत्ता का आकलन करना था। इस अवसर पर उपायुक्त के साथ सहायक एस्टेट अधिकारी (AEO) तथा कैपिटल रिकॉर्ड सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जो इस डिजिटलीकरण कार्य को क्रियान्वित करने वाली एजेंसी है।
समीक्षा के दौरान एजेंसी द्वारा अवगत कराया गया कि रिकॉर्ड स्कैनिंग का कार्य सितंबर 2025 से प्रारंभ किया गया था। एस्टेट कार्यालय में उपलब्ध संपत्ति फाइलों से संबंधित कुल लगभग 20 लाख दस्तावेजों में से अब तक लगभग 16 लाख दस्तावेजों की स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है। इसी प्रकार, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में कुल 26 लाख दस्तावेजों में से लगभग 17 लाख दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी कर ली गई है।

बताया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन की इस महत्वपूर्ण सुधार पहल के अंतर्गत सार्वजनिक रिकॉर्ड से संबंधित तीन प्रमुख कार्यालयों — सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (रजिस्ट्री रिकॉर्ड), एस्टेट कार्यालय (संपत्ति रिकॉर्ड) तथा राजस्व कार्यालयों (राजस्व रिकॉर्ड) — को डिजिटलीकरण हेतु चिन्हित किया गया है।
डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को सटीकता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों में संपादित किया जा रहा है। सर्वप्रथम भौतिक रिकॉर्ड का व्यवस्थित रूप से स्कैनिंग किया जाता है, इसके पश्चात स्कैन किए गए डाटा का प्रूफरीडिंग, फिर कठोर गुणवत्ता जांच (क्वालिटी चेक) की जाती है तथा अंततः प्रत्येक रिकॉर्ड की प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक फाइल (ई-फाइल) तैयार कर सुरक्षित रूप से संग्रहीत की जाती है। यह बहु-स्तरीय प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि डिजिटल रिकॉर्ड पूर्ण, त्रुटिरहित एवं दीर्घकालिक आधिकारिक उपयोग के लिए उपयुक्त हों।
समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने स्कैन किए गए डाटा की पुनः जांच एवं सत्यापन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भविष्य में यह डिजिटल डाटाबेस विभिन्न विभागों एवं हितधारकों द्वारा संदर्भ, सत्यापन एवं नागरिक सेवाओं के लिए उपयोग में लाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की त्रुटि के प्रति शून्य सहनशीलता अपनाई जाए तथा प्रत्येक चरण में सख्त गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उपायुक्त ने एजेंसी को निर्देश दिए कि शेष कार्य को निर्धारित समयसीमा के अनुसार मार्च 2026 तक पूर्ण किया जाए। उन्होंने पुनः स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण प्रशासनिक सुधार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता, कार्यकुशलता तथा सार्वजनिक रिकॉर्ड तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।
इस पहल से अनेक लाभ प्राप्त होंगे, जिनमें भौतिक स्थान की बचत, रिकॉर्ड की त्वरित एवं सुगम उपलब्धता, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा एवं संरक्षण तथा सार्वजनिक रिकॉर्ड का एक स्थायी एवं भरोसेमंद डिजिटल भंडार तैयार होना शामिल है। इससे शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा नागरिकों को तेज एवं प्रभावी सेवाएं प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्य की प्रगति पर सतत निगरानी रखें तथा समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित किया जा सके।