Follow

रोहतक में वर्बल ऑटोप्सी परियोजना का किया जाएगा पायलट परीक्षण : डॉ.सुमिता मिश्रा

हरियाणा में मृत्यु के कारणों से जुड़ी जानकारी की उपलब्धता व गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए रोहतक में वर्बल ऑटोप्सी परियोजना का किया जाएगा पायलट परीक्षण

चंडीगढ़, 6 अक्तूबर – हरियाणा में मृत्यु के कारणों से जुड़ी जानकारी की उपलब्धता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए रोहतक जिले में आईसीएमआर-वित्तपोषित वर्बल ऑटोप्सी परियोजना का पायलट परीक्षण करेगा। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के तहत रोहतक को पायलट जिले के रूप में चुना गया है। इस परियोजना का उद्देश्य स्वास्थ्य नियोजन और सार्वजनिक स्वास्थ्य निर्णयों को समर्थन देने के लिए मृत्यु के कारणों की अधिक व्यवस्थित जानकारी जुटाना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि इस परियोजना के तहत कार्यान्वयन अवधि के दौरान लगभग 5,000 मौतों को शामिल किया जाएगा। इस पहल के तहत स्वास्थ्य प्रणाली के नामित कर्मी पात्र मौतों की पहचान करेंगे और एक निर्धारित मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से वर्बल ऑटोप्सी (मौखिक) साक्षात्कार आयोजित करेंगे। साक्षात्कार के दौरान एकत्र की गई जानकारी की समीक्षा बाद में एक चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाएगी, जो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मृत्यु का कारण तय करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मौतों की परिस्थितियों और उनके संभावित कारणों की जानकारी प्रदान करके नियमित मृत्यु रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी बनाना है। मृत्यु के कारणों से जुड़ा अधिक सटीक डेटा स्वास्थ्य अधिकारियों को जिला स्तर पर मृत्यु दर के पैटर्न को समझने में मदद करेगा और साक्ष्य-आधारित योजना एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के प्राथमिकीकरण को आसान बनाएगा।

उन्होंने कहा कि कार्यान्वयन की अवधि लगभग 8 महीने तय की गई है और इसे रोहतक जिला स्वास्थ्य प्रशासन के समन्वय से मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इस अभ्यास में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर  और मेडिकल ऑफिसर शामिल होंगे। परियोजना के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक पूर्ण वर्बल ऑटोप्सी के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को 100 रुपये और जानकारी की समीक्षा कर मृत्यु का कारण तय करने के लिए मेडिकल ऑफिसर को 100 रुपये का मानदेय निर्धारित किया गया है।

Advertisement

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत एक डिजिटल वर्कफ़्लो का पालन किया जाएगा, जिसमें वर्बल ऑटोप्सी साक्षात्कार निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे। इस अभ्यास में शामिल कर्मियों को कार्यप्रणाली और डिजिटल प्रक्रिया पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह पहल मृत्यु के कारणों की जानकारी को दस्तावेज़बद्ध करने और रिपोर्ट करने में स्वास्थ्य कर्मचारियों की क्षमता को मजबूत करने का भी प्रयास करती है।

एम्स, नई दिल्ली ने रोहतक में मौजूदा स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के माध्यम से परियोजना के कार्यान्वयन के लिए हरियाणा स्वास्थ्य विभाग से सहयोग मांगा है। इस पायलट परीक्षण से जिला स्तर पर मृत्यु के कारणों की जानकारी के संग्रह और दस्तावेज़ीकरण के लिए प्रणालियों को मजबूत करने का अनुभव मिलने की उम्मीद है।

 

पढ़ने के लिए धन्यवाद

आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

Advertisement
↑
Tap to Refresh