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पंजाब यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय फार्माकोलॉजी सम्मेलन का भव्य समापन
चंडीगढ़, 22 नवंबर। पंजाब विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज (यूआईपीएस) में आज भारतीय फार्माकोलॉजिकल सोसायटी का 55वां वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'आईपीएसकॉन- 2025' सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में दवा खोज से क्लिनिक तक की यात्रा, अनुवादात्मक शोध, फार्माकोविजिलेंस, हर्बल-ड्रग अंतः क्रियाओं के खतरे, नैनो तकनीक और भारत को सक्रिय फार्मास्यूटिकल सामग्री (एपीआई) तथा मुख्य प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) में आत्म निर्भर बनाने पर गहन चर्चा हुई।
….अंतिम दिन की प्रमुख झलकियां :
महाराष्ट्र राज्य चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय की एमेरिटस प्रोफेसर डॉ निलीमा क्षीरसागर ने दो चौंकाने वाले क्लिनिकल मामले साझा किए। एक इंजीनियरिंग छात्र को आयुर्वेदिक दर्द निवारक लेने से बार-बार आंतरिक रक्तस्राव हुआ। जांच में पता चला कि दवा में 500 मिलीग्राम एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड (एस्पिरिन) छिपा था।
मिर्गी से पीड़ित एक छात्र की दवा फेनाइटोइन का असर एक कथित आयुर्वेदिक स्मृति-वर्धक उत्पाद लेने से पूरी तरह समाप्त हो गया।
डॉ क्षीरसागर ने चेतावनी दी कि बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा या हर्बल उत्पाद नहीं लेना चाहिए।
सीएसआईआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ ज्योति यादव ने युवा शोधकर्ताओं में कौशल विकास पर बल दिया।
पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ पी. एल. शर्मा ने कहा, “अच्छा विज्ञान महंगे उपकरणों पर नहीं, अच्छी सोच पर निर्भर करता है।”
सीडीआरआई ओरेशन, डॉ एस.सी. लाहिड़ी ओरेशन, डॉ एस.बी. पांडेय ओरेशन (सेमाग्लूटाइड की सफलता गाथा पर) और डॉ ललिता कर्देश्वरन ओरेशन (विकसित भारत@2047 के लिए फार्माकोलॉजी 4.0) आयोजित हुए।
डॉ शिव प्रकाश रंथम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता–मशीन लर्निंग आधारित ड्रग डिस्कवरी प्लेटफॉर्म
‘एपिक्यूल' का लाइव प्रदर्शन किया। पशु परीक्षण के नैतिक विकल्प के रूप में ज़ेब्राफिश को 21वीं सदी का सबसे प्रभावी मॉडल बताया गया। लास वेगास से आए डॉ बुद्धदेब डॉन ने कोशिका चिकित्सा (सेल थेरेपी) में 2025 की वैश्विक प्रगति पर प्रकाश डाला।
फार्माकोलॉजी क्विज़ में विजेताओं को 12,000, 9,000 और 6,000 रुपये के नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। युवा शोधकर्ताओं को 25 से अधिक पुरस्कार दिए गए।
समापन सत्र में यूआईपीएस के चेयरपर्सन प्रो. अनिल कुमार ने सभी वक्ताओं, प्रतिनिधियों, प्रायोजकों और छात्रों का धन्यवाद करते हुए कहा, “यह सम्मेलन सिर्फ एक वैज्ञानिक आयोजन नहीं, बल्कि सुरक्षित, नवाचारी और आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करने का संकल्प था।”
देश-विदेश से बड़ी संख्या में आए शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों और उद्योग विशेषज्ञों की उपस्थिति में संपन्न यह सम्मेलन भारतीय फार्माकोलॉजी के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय बन गया।
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