न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 14 जनवरी : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम समाज को सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
मुख्यमंत्री सेक्टर-23 स्थित सनातन धर्म मंदिर, चंडीगढ़ में आयोजित भागवत कथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इससे पूर्व उन्होंने श्री कृष्ण लीला का मंचन देखा और भगवान श्री कृष्ण जी की आरती भी उतारी।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की शिक्षाएं मानव जीवन को धर्म, कर्म और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन और उनके उपदेश आज भी समाज को दिशा प्रदान करते हैं और वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकले गीता के अमर संदेश को मानव-मात्र तक पहुंचाने के लिए हर साल कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन करती है। इस दौरान प्रदेश में जिला व ब्लाक स्तर पर भी अनेक आयोजन किए जाते हैं और पूरा हरियाणा गीतामय हो जाता है।
उन्होंने बताया कि गत 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होकर हमारा उत्साह तो बढ़ाया ही है , साथ ही, उन्होंने हर व्यक्ति को गीता के जुड़ने का संदेश भी दिया। आज गीता महोत्सव की परंपरा उनके मार्गदर्शन में विश्वव्यापी हो चुकी है। इसी दौरान, प्रधानमंत्री जी ने ज्योतिसर तीर्थ में महाभारत थीम पर आधारित ज्योतिसर अनुभव केंद्र का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से अपील की कि आप इस अनुभव केंद्र का विजिट अवश्य करें ताकि आप महाभारत के जीवित वृत्तांत को अनुभव कर सकें।
मुख्यमंत्री ने इस आध्यात्मिक आयोजन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं में सकारात्मक संस्कार विकसित करने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थाएं और आध्यात्मिक संत समाज में एकता, शांति और सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार समाज कल्याण, सांस्कृतिक उत्थान और सामाजिक समरसता से जुड़े ऐसे सभी प्रयासों को निरंतर सहयोग देती रहेगी। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने समाज की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की।