डीएवी इंटर, डिग्री कॉलेज और संस्कृत विद्यालय में रुका वेतन
एक नवंबर को हुआ था मैनेजर मनमोहन तिवारी का निधन, क्रिमिनेशन के पहले ही बेटे ने दिखा दी साधारण सभा की बैठक
पूर्व मैनेजर अभिषेक तिवारी ने लविवि और डीआईओएस को भेजा पत्र
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी के 100 वर्ष पुराने प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान डीएवी इंटर कॉलेज, बालिका इंटर कॉलेज, संस्कृत विद्यालय और डीएवी डिग्री कॉलेज, खेल का मैदान समेत संस्थान से जुड़े अन्य चीजों पर अपना कब्जा बनाने के लिए एक तरफ जहां जूतम पैजार की नौबत है। तो वहीं आर्य समाज लखनऊ, गणेशगंज से सम्बंद्ध इन सभी शिक्षण संस्थान से जुड़े सभी कॉलेजों के शिक्षकों का वेतन रुक गया है। एक नवंबर 2025 की दोपहर को कॉलेज के मैनेजर मनमोहन तिवारी का निधन हो गया था। 2 नवंबर को उनका पार्थिव शरीर पहले कॉलेज ले जाया गया था और उसके बाद 4 बजे के करीब बैकुंठ धाम में क्रिमिनेशन हुआ था, लेकिन मैनेजमेंट पर कब्जे को लेकर उनके बड़े बेटे आनंद मोहन तिवारी ने दो नवंबर की दोपहर 2 बजे से ही कागजों में हेर फेर करके संस्था के साधारण सभा की बैठक दिखा दी। जिसको लेकर एडेड कॉलेजों के मैनेजरों में काफी चर्चा है।

हालांकि मौके पर रहे सभी लोग अच्छी तरह से जानते हैं निधन के बाद ऐसा कोई मौका आया ही नहीं, जिस मौके पर बैठक की जाए या इस तरह की कोई कार्रवाई की जाए लेकिन मैनेजमेंट पर कब्जे को लेकर तीन तरफ से तलवार खींच गई है। इसमें दो उनके बेटे आनंद मोहन तिवारी और अभिषेक तिवारी आमने-सामने है तो वही उनके एक चाचा भी कॉलेज पर कब्जा पाने के लिए ताल ठोक रहे हैं। दरअसल मनमोहन तिवारी के जीवित रहते ही उनके सगे छोटे बेटे अभिषेक तिवारी करीब 2009 से ही इंटर कॉलेज के मैनेजर बन चुके थे और मैनेजमेंट का सारा काम काम देखते थे जबकि मनमोहन तिवारी डिग्री कॉलेज, बालिका इंटर कॉलेज और संस्कृत विद्यालय, और खेल का मैदान इत्यादि के काम देखा करते थे।
2022 में बालिका इंटर कॉलेज को एक अन्य फर्जी कमेटी बनाकर उस पर कब्जे की तैयारी की गई, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में मामला फंस गया और उस पर कंट्रोलर बैठा दिया, तब से अब तक बालिका इंटर कॉलेज में कंट्रोलर बैठा हुआ है जबकि 2023 में एक अन्य विवाद के चलते इंटर कॉलेज के प्रबंधन का विवाद डेप्युटी रजिस्ट्रार चिट्स फंड्स एंड सोसाइटी, मंडलायुक्त और हाईकोर्ट में जाकर फंस गया। इस उठापठक में इंटर कॉलेज का मैनेजमेंट भी मनमोहन तिवारी के हाथ में आ गया, जिसको लेकर हाईकोर्ट में रिट अभी तक लंबित है। लेकिन उससे भी बड़ा घटनाक्रम 10 अक्टूबर 2025 को आया। दरअसल सोसाइटी एक्ट के तहत तत्कालीन रजिस्ट्रार विनय कुमार श्रीवास्तव ने 10 अक्टूबर 2020 से 5 वर्ष की अवधि के लिए आर्य समाज लखनऊ गणेशगंज लखनऊ समिति को नवीनीकृत किया था, इसके पहले कि अगले वर्ष का नवीनीकरण हो पाता, मैनेजर मनमोहन तिवारी का निधन हो गया।
अब सारी प्रक्रिया यहीं पर फंस गई है लेकिन इसके बावजूद भी मैनेजमेंट पर कब्जे को लेकर डिग्री कॉलेज और इंटर कॉलेज के कुछ खास लोग उनके बड़े बेटे को मैनेजर बनाने के लिए उल्टे सीधे सलाह रहे हैं। इसी के तहत मनमोहन तिवारी के क्रिमिनेशन के पूर्व ही साधारण सभा की एक बैठक दिखा दी और तो और 05 तारीख को उनके शुद्धि (प्रार्थना सभा) के दिन नई कमेटी भी बना ली और प्रशासन योजना के उलट अपने सभी रिश्तेदारों को भर लिया, लेकिन सच्चाई यह भी है कि जब तक इन सभी नियुक्तियों को डिप्टी रजिस्ट्रार मान्य नहीं करेगा, तब तक यह सब हवा हवाई बातें रहेंगी। और डिप्टी रजिस्ट्रार ने पहले ही संस्था की सूची मान्य करने को लेकर आदेश दे रखा है, ऐसे में अभी कई चीजे लंबित है।

सूची नहीं है मान्य, कोर्ट में है विवाद
लखनऊ। आर्य समाज लखनऊ, गणेशगंज से सम्बंद्ध इन सभी शिक्षण संस्थानों का मामला मंडलायुक्त कार्यालय से होता हुआ चिट्स फंड्स एंड सोसाइटी के डेप्युटी रजिस्टार से होते हुए हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में लंबित पड़ा हुआ है। इसके अलावा खेल के मैदान के ठेके को लेकर और विद्यालय से सटी दुकानों के मालिकाना हक को लेकर भी मनमोहन तिवारी पर कई मुकदमे उनके परिवार के लोगों ने ही दर्ज कराये थे। इसी बीच जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार पांडे के कार्यालय की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद इंटर कॉलेज पर मनमोहन तिवारी ने कब्जा कर लिया था, जो 10 अक्टूबर तक था। लेकिन 10 अक्टूबर 2025 को 5 साल का रजिस्ट्रेशन खत्म हो चुका था, ऐसे में विधिक रूप से कोई भी कहीं का मैनेजर नहीं था, शायद यही कारण था कि वेतन बिल पर कोई हस्ताक्षर नहीं थे और नवंबर 2025 के वेतन बिल पर भी कोई हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का दो महीने का वेतन रुका हुआ है।
इस मामले में डीएवी इंटर कॉलेज के पूर्व मैनेजर अभिषेक तिवारी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से शिकायत की थी। रजिस्ट्रार भावना मिश्रा ने बताया कि यदि महाविद्यालय की प्रबंध समिति में कोई भी परिवर्तन किया जाता है तो उसे अभिषेक तिवारी को भी अवगत कराया जाए। उन्होंने अभिषेक तिवारी के पत्र के मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया है।

दो महीने का वेतन फंसा, प्रिंसिपल नहीं दे रहे लेटर
लखनऊ। डीएवी एडेड इंटर कॉलेज के शिक्षकों/कर्मचारियों और डिग्री के भी शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन भुगतान नहीं मिला है। दरअसल निधन से पहले भी मैनेजर मनमोहन तिवारी कुछ दिनों से बीमार थे, ऐसे में अक्टूबर और नवंबर माह का वेतन भुगतान किसी भी कॉलेज का नहीं हुआ है। यही नहीं उनका रजिस्ट्रेशन भी 10 अक्टूबर को समाप्त हो गया था तो वह विधिक रूप से हस्ताक्षर भी नहीं कर सकते थे, यही कारण था कि मामला लटका हुआ ही था कि तभी उनका दुखद निधन हो गया।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय हो या आरएचईओ सभी मौके की नजाकत देख रहे हैं। लेकिन यदि कॉलेज के प्रिंसिपल लिखित में जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार पांडे के कार्यालय को पत्र दे दे तो कॉलेज में एकल संचालन करते हुए वेतन भुगतान कराया जा सकता है लेकिन न केवल मास्टर बल्कि प्रिंसिपल भी डरे हुए हैं कि नया मैनेजमेंट उनके साथ क्या सलूक करेगा, इसलिए वे पत्र नहीं दे रहे हैं। डीआईओएस कार्यालय का कहना है कि अभी तक उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है, यदि कोई पत्र मिलता है तो नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।