कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच आईटी और सर्विसेज शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव, बैंकिंग, रियल्टी, ऑटो और एफएमसीजी इंडेक्स भी लाल निशान में
Rahul Gupta
मुंबई, 9 सितंबर।
भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 533 अंक टूटकर 75,044 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 135 अंक फिसलकर 23,498 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव आईटी और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में बिकवाली से बना। इसके अलावा बैंकिंग, रियल्टी, ऑटो और एफएमसीजी इंडेक्स भी लाल निशान में रहे। दूसरी ओर, फार्मा, मेटल और एनर्जी शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली।
आईटी और सर्विसेज शेयरों ने बढ़ाया दबाव
शुरुआती कारोबार में आईटी और सर्विसेज सेक्टर के शेयर बाजार की गिरावट की प्रमुख वजह बने। सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज सबसे ज्यादा नुकसान में रहे।
इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटो, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, कंजम्पशन, ऑयल एंड गैस और इंडिया मैन्युफैक्चरिंग सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
फार्मा, मेटल और एनर्जी शेयरों में खरीदारी
गिरावट के बीच निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी पीएसई, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज हरे निशान में रहे।
सेंसेक्स पैक में एलएंडटी, एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त में कारोबार करते दिखे।
एचसीएल टेक और इंफोसिस समेत कई दिग्गज शेयर टूटे
शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टीसीएस आईटी सेक्टर के प्रमुख लूजर्स रहे। इनके अलावा एचयूएल, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स के शेयर भी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता का बाजार लाल निशान में कारोबार करता दिखा।
अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद
अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए। डाउ जोंस 1।18 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में 0।32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा समय में बाजार पर दो बड़ी चुनौतियों का असर दिखाई दे रहा है। पहली चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को बताया जा रहा है, जिसके कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।
आईपीओ मार्केट से भी घट रही लिक्विडिटी
बाजार में दबाव की दूसरी बड़ी वजह तेजी से बढ़ता आईपीओ मार्केट बताया जा रहा है। नए आईपीओ में निवेश के लिए पैसा बाजार से निकलने के कारण शेयर बाजार में लिक्विडिटी कम होने की बात विशेषज्ञों ने कही है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में इस वजह का असर कच्चे तेल की कीमतों से भी ज्यादा दिखाई दे सकता है।
22 प्रतिशत तक पहुंचा आईपीओ का औसत लिस्टिंग गेन
विशेषज्ञों के मुताबिक, जून के बाद से आईपीओ का औसत लिस्टिंग गेन बढ़कर करीब 22 प्रतिशत हो गया है। बेहतर लिस्टिंग गेन के कारण रिटेल और इंस्टीट्यूशनल दोनों तरह के निवेशकों की आईपीओ मार्केट में दिलचस्पी बढ़ी है।
इस साल अब तक निफ्टी का रिटर्न करीब -9।5 प्रतिशत रहा है। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने एक्सचेंजों के जरिए करीब 2।84 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी बेची है। इसके बावजूद एफआईआई ने आईपीओ बाजार में करीब 36,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
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