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”सारथी” से विद्यार्थियों को सिर्फ कौशल नहीं, बल्कि हृदय का आजीवन परिवर्तन भी मिलता है : एच राजेश प्रसाद

पीजीआईएमईआर में ‘सारथी दिवस’ का द्वितीय वार्षिक आयोजन
स्वैच्छिक सेवा और रूपांतरकारी रोगी देखभाल की भावना को किया सम्मानित
सारथी सहानुभूति, करुणा, सामाजिक उत्तरदायित्व और अनुभवात्मक शिक्षण पर है आधारित है 
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 5 मई 2026 : एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने मंगलवार को ‘सारथी दिवस’ का द्वितीय वार्षिक आयोजन किया, जो सारथी (Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes) के दो सफल वर्षों को समर्पित है। यह एक अभिनव, स्वयंसेवी-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य संस्थान में रोगी देखभाल और सुगमता को सुदृढ़ बनाना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद उपस्थित रहे, जबकि सचिव (शिक्षा) चंडीगढ़ प्रशासन प्रेरणा पुरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर; पंकज राय  उपनिदेशक (प्रशासन); प्रो. संजय जैन, अधिष्ठाता (अनुसंधान); प्रो. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमईआर सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य एवं एनएसएस समन्वयक भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रोजेक्ट सारथी की विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें पिछले दो वर्षों की यात्रा को एक सुसंगठित रोगी-सहायता प्रणाली के रूप में दर्शाया गया। एक विशेष रूप से तैयार फिल्म के माध्यम से इस पहल के विकास और प्रभाव को प्रदर्शित किया गया। इसके पश्चात 25 सहयोगी शैक्षणिक संस्थानों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें प्राचार्यों, नोडल एनएसएस अधिकारियों तथा समर्पित सारथी स्वयंसेवकों (‘ब्रेवहार्ट्स’) को रोगी अनुभव में सुधार हेतु उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि एच. राजेश प्रसाद ने सारथी कार्यक्रम को सहानुभूति, करुणा, सामाजिक उत्तरदायित्व और अनुभवात्मक शिक्षण का सशक्त संगम बताया। अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े अस्पतालों के जटिल गलियारों में मार्गदर्शन पाना कभी-कभी सबसे सक्षम व्यक्ति के लिए भी कठिन हो सकता है; ऐसे में ये युवा स्वयंसेवक सच्चे ‘सारथी’ बनकर रोगियों को सम्मान और संवेदनशीलता के साथ मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
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मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि इस प्रकार की सेवा से प्राप्त मूल्य और सीख स्वयंसेवकों के साथ जीवनभर रहती है और उन्हें जिम्मेदार एवं आदर्श नागरिक बनाती है। उन्होंने सभी से सामाजिक सेवा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया और कहा कि समाज में योगदान देने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने एनएसएस एवं ‘माई भारत’ से जुड़े स्वयंसेवकों सहित सभी प्रतिभागियों के समर्पण की सराहना की।
पहल के व्यापक प्रभाव से प्रभावित होकर एच. राजेश प्रसाद ने कहा, “पीजीआईएमईआर में एक पायलट के रूप में शुरू हुई यह पहल देश के सबसे बड़े सामाजिक सेवा आंदोलनों में विकसित होने की क्षमता रखती है। जब युवा ऊर्जा को सेवा की दिशा में लगाया जाता है, तो देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के अनुभव को बदला जा सकता है।”
इससे पहले निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि 6 मई 2024 को प्रारंभ की गई सारथी पहल के अंतर्गत छात्र स्वयंसेवकों को अस्पताल की व्यवस्था में शामिल कर गैर-चिकित्सीय प्रक्रियाओं—जैसे पंजीकरण, जांच संबंधी मार्गदर्शन, विभिन्न सेवा बिंदुओं के बीच आवागमन तथा वृद्ध एवं जरूरतमंद रोगियों की सहायता—में लगाया जाता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को स्नेहपूर्वक ‘ब्रेवहार्ट्स’ संबोधित करते हुए उन्हें पीजीआईएमईआर की करुणा, सेवा और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक बताया। उन्होंने विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों, नोडल अधिकारियों एवं प्रशासकों की भूमिका की भी सराहना की और उनके सतत सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
संचालन संबंधी प्रभाव को रेखांकित करते हुए उपनिदेशक (प्रशासन) पीजीआईएमईआर पंकज राय ने बताया कि 2,000 से अधिक छात्र स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से 1.24 लाख से अधिक सेवा घंटे प्रदान किए हैं, जिससे लाखों रोगियों और उनके परिजनों को लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि सारथी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में मान्यता मिली है तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा इसे अनुभवात्मक शिक्षण के तहत सराहा गया है।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि इस पहल को और सुदृढ़ एवं विस्तारित किया जाएगा, ताकि देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में इसका प्रभाव और अधिक व्यापक हो सके।
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