न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़ / 17जनवरी :
शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता से गुरु साहिबान के खिलाफ तिरस्कार पूर्ण टिप्पणी करने के लिए विपक्षी नेता आतिशी को विधानसभा मैंबर के रूप में अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया है।विधानसभा स्पीकर को लिखे प. में सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि वह अकाली दल अध्यक्ष और एक निष्ठावान सिख के रूप में सुश्री आतिशी के आचरण से बेहद दुखी हैं। उन्होने कहा कि विधायक दृष्टिकोण से सुश्री आतिशी का आचरण विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना है जो एक विधायक के लिए अशोभनीय आचरण है। उन्होने जोर देकर कहा,‘‘ जो सदस्य सार्वजनिक रूप से गुरु साहिब और अल्पसंख्यक सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का अपमान करता है, वह न केवल नैतिक रूप से बल्कि विधायक बने रहने का भी संवैधानिक अधिकार खो देता है।’’
अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि सिख गुरु साहिबान के खिलाफ सुश्री आतिशी की अपमानजनक टिप्पणी सिख धर्म के अनुसार धार्मिक बेअबदी है। उन्होने कहा,‘‘ इसके आलोक में मैं आपसे सुश्री आतिशी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और आईपीसी की धारा 153ए के तहत समुदाय के बीच शत्रुता और असामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश दर्ज करने का भी अनुरोध करता हूं।’’
सरदार बादल ने कहा कि इस तरह की उकसाने की कार्रवाई पंजाब और देश के बाकी हिस्सों में बड़ी कठिनाई से कायम की गई शांति और साम्प्रदायिक सदभाव के माहौल को गंभीर खतरा पैदा कर रही है। उन्होने कहा कि दुनिया भर के सिख उनकी ओर देख रहे हैं ओर स्पीकर को यह भी बताया कि इस मामले ने सिखों के सर्वोच्च धार्मिक -लौकिक प्राधिकरण- श्री अकाल तख्त साहिब जी की अगुवाई वाले पंथक संस्थानों के भीतर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
अकाली दल अध्यक्ष ने दिल्ली विधानसभा स्पीकर को यह भी बताया कि सिख गुरु साहिबानों ने अकाल पुरख की शाश्वत आध्यात्मिक संप्रभुता और खालसा पंथ की सामूहिक निष्ठा के प्रतीक हैं, जो जाति, पंथ, नस्ल , धर्म, भाषा यां क्षेत्रों से उपर उठकर है और ब्रहांडीय सच और सार्वभौमिक भाईचारे की शिक्षा दी है। उन्होने कहा,‘‘ खालसा पंथ को अपनी रूहानी प्रेरणा और अधिकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब से से प्राप्त हुआ है, जो गुरु साहिबान का शाश्वत जीवंत स्वरूप है।’’ उन्होने अध्यक्ष से आने वानी पीढ़ियों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया ताकि देश वास्तव में सभी धर्मों, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति सम्मान का प्रतीक बन सके।