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दिल्ली जाने से रोकी गई राह तो रोहित पवार ने बदला आंदोलन का रुख, युवाओं से की खास अपील

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पहले ट्रेनें रद्द और प्रतिबंध लागू, पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन को तेज करने का आह्वान

राहुल गुप्ता

पुणे, 9 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शनिवार को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले रेल सेवाओं में बदलाव और पुलिस प्रतिबंधों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने शुक्रवार को उन लोगों से पुणे पहुंचने की अपील की, जो ट्रेनें रद्द होने या अन्य पाबंदियों के कारण दिल्ली नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली दूर है तो क्या हुआ, लोकतंत्र की लड़ाई अपने दरवाजे पर भी लड़ी जा सकती है। पवार ने लोगों से शनिवार 10 अक्टूबर और रविवार 11 अक्टूबर को पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया।

दिल्ली जाने वाली कई ट्रेनों पर असर

रेल मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किया है। रेलवे ने इसे स्टेशनों के आसपास भारी सड़क यातायात की आशंका के मद्देनजर एहतियाती कदम बताया है।

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मुंबई सेंट्रल से चलने वाली दो राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का समय भी 5 घंटे आगे बढ़ाया गया है, जबकि बांद्रा टर्मिनस-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस रद्द कर दी गई है। उधर, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश भी लागू हैं।

पुणे के आंदोलन को दिल्ली जैसा बनाने की अपील

रोहित पवार ने कहा कि दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में युवा और नागरिक रवाना हुए थे, लेकिन दिल्ली जाने वाली ट्रेनों के रद्द होने से महाराष्ट्र के पुणे समेत कई इलाकों के लोग रास्ते में फंस गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के विरोध से घबराकर लोगों की आवाजाही रोकने की कोशिश कर रही है।

पवार ने कहा कि सरकार यात्रा पर पाबंदियां लगा सकती है, लेकिन लोगों के विचारों को नहीं रोक सकती। उन्होंने दिल्ली नहीं पहुंच पाने वाले नागरिकों से अपील की कि वे अगले दो दिनों तक पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों के सत्याग्रह को ही दिल्ली का आंदोलन मानकर इसमें पूरी ताकत से शामिल हों।

9 दिनों से जारी है एमपीएससी अभ्यर्थियों का सत्याग्रह

पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थी पिछले 9 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। रोहित पवार और विपक्ष के अन्य नेता भी इस प्रदर्शन में शामिल हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की है।

पवार ने इस आंदोलन को केवल विद्यार्थियों की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि एकजुट होकर आंदोलन जारी रखा जाएगा, ताकि व्यवस्था को मांगें मानने के लिए मजबूर किया जा सके।

सरकार ने हटाने के अधिकार पर क्या कहा?

महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि एमपीएससी अध्यक्ष का पद संवैधानिक है। इसलिए राज्य सरकार स्वयं अध्यक्ष को हटाने का फैसला नहीं कर सकती। वह इस संबंध में राज्यपाल को हटाने की सिफारिश ही कर सकती है।

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