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सीएम हेल्पलाइन जैसे प्लेटफॉर्म पर आने वाली शिकायतों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए : संजय गुप्ता

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न्यूज़म ब्यूरो

शिमला, 29 जनवरी, 2026 : हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आज यहां ‘कैपेसिटी बिल्डिंग एंड टैक्नोलॉजिकल इंटरवेंशन इन जल शक्ति विभाग’ विषय पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि हिमाचल के सभी घरों तक साफ़ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने जल शक्ति विभाग को जल जीवन मिशन के तहत भारत सरकार की आवश्यक शर्तों की शीघ्र पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना से संबंधित फंड से जुड़े मामले को जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग के समक्ष उठाया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि टैक्नोलॉजी के इस युग में जल शक्ति विभाग को डिजिटल बुनियादी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने पर बल देना चाहिए। पेपर लैस डिजिटल कार्यशैली को अपना कर लोगों को पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के शीघ्र निष्पादन के लिए विभाग अपनी कार्य प्रणाली में आधुनिक तकनीक का समावेशन करें। उन्होंने कहा कि ई-ऑफ़िस जैसी प्रणालियों को विस्तृत स्तर पर अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों के निवारण की दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ काम किया जाना चाहिए और सीएम हेल्पलाइन जैसे प्लेटफॉर्म पर आने वाली शिकायतों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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सचिव जल शक्ति डॉ. अभिषेक जैन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में ई-ऑफिस प्रणाली को सशक्त किया जा रहा है। विभाग में स्किल डिवेल्पमेंट की दिशा में इनोवेशन, डिजिटल टैक्नोलॉजी एण्ड गवर्नंेस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाएगा। विभाग के कार्यबल को डिजिटल तकनीकों की जानकारी प्रदान करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग को मजबूत बनाने के लिए रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।
इस अवसर पर ठेकेदारों के लंबित भुगतानों के बारे में भी विचार विमर्श किया गया।

कार्यशाला में डिटिजल कौशल और ई-ऑफिस पर सत्र आयोजित किए गए। कार्यशाला में विभिन्न जोनल अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यशाला में इंजीनियर-इन-चीफ अंजू शर्मा, इंजीनियर-इन-चीफ (परियोजना) डॉ धर्मेन्द्र गिल और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 

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