Follow

दो महीने में जीआरपी पुलिस स्टेशन की जर्जर इमारत और व्यवस्थाओं को सुधारें अधिकारी : चीफ जस्टिस शील नागू एवं जस्टिस संजीव बेरी

Listen to this article

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 19 जनवरी, 2026 : सिटी ब्यूटीफुल की इन तस्वीरों को देखकर यक़ीनन आपका माथा ठनक जाएगा। कहीं और की नहीं, अव्यवस्था की इंतहा दर्शाती ये तस्वीरें आई हैं चंडीगढ़ के जीआरपी पुलिस स्टेशन की, जिस पर कभी भी किसी भी जिम्मेवार अधिकारी की नजर पड़ी ही नहीं। ऐसा तब है, जबकि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण को लेकर केंद्र सरकार ने पानी की तरह करोड़ों नहीं, अरबों रुपए बहाए हैं। खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन में हो रहे विकास कार्यों का अवलोकन करने यहां आते रहे हैं, लेकिन कभी किसी अधिकारी ने उन जीआरपी पुलिस मुलाजिमों को मयस्सर होने वाली सुविधाओं को जानने की कोशिश नहीं की, जो हर मर्तबा उनकी और माननीयों की विजिट के दौरान मुस्तैदी से ड्यूटी पर डटे दिखाई देते हैं।

Advertisement

ये बीड़ा उठाया एडवोकेट सुनैना ने, जिन्होंने चंडीगढ़ में मौके पर पहुंचकर वस्तु स्थिति की तस्वीरें कैमरे में कैद करवाईं और बाकायदा एक जनहित याचिका की शक्ल में पूरा मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के माननीय चीफ जस्टिस की बेंच के सामने रख डाला। 

 

आज पीआईएल पर सुनवाई करते हुए माननीय हाईकोर्ट ने जीआरपी पुलिस स्टेशन के जीर्णोद्धार के लिए अधिकारियों को दो महीने की मोहलत दी है।  दिलचस्प है कि मामले में केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन को न केवल ख़ुद मौजूद रहना पड़ा, बल्कि हाईकोर्ट को ये आश्वासन देना पड़ा कि संबंधित रेलवे अधिकारी अब जर्जर जीआरपी पुलिस स्टेशन का पुरसा हाल लेंगे और सब कुछ व्यवस्थित कराएंगे। इस अकेले मामले ने मौजूदा समय की विडंबना को सामने लाते हुए सवाल खड़ा का दिया है कि करोड़ों अरबों रुपए फूंकने के बाद भी रेलवे पुलिस की ड्यूटी जिम्मेवारी से करने वालों पर संबंधित अफसरों की निगाह क्यों नहीं पड़ती है। कौन है इन सबका जिम्मेवार…?

माननीय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू और माननीय न्यायमूर्ति संजीव बेरी शामिल थे, ने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर स्थित सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) पुलिस स्टेशन और कर्मचारियों के आवासीय क्वार्टरों की खतरनाक जर्जर स्थिति के संबंध में याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं उपस्थित हुईं एडवोकेट सुनैना द्वारा दायर जनहित याचिका का निपटारा किया। 

Special Offer
ADVERTISEMENT

एडवोकेट सुनैना द्वारा दायर जनहित याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जीआरपी पुलिस स्टेशन की इमारत, जो ब्रिटिश काल की संरचना है, की कभी भी पर्याप्त मरम्मत या आधुनिकीकरण नहीं किया गया है और उसी परिसर में करोड़ों की रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना के निष्पादन के बावजूद यह खतरनाक स्थिति में बनी हुई है।

 

एडवोकेट सुनैना ने रिकॉर्ड पर तस्वीरें, समाचार रिपोर्टें और लिखित शिकायतें प्रस्तुत कीं, जिनमें छतों से पानी टपकना, दीवारों में दरारें पड़ना और उनका गिरना, बिजली के तारों का खुला होना, असुरक्षित मलखाना खिड़कियां, चारदीवारी का अभाव जिसके कारण आरोपी व्यक्ति भाग निकले, और पीने योग्य पानी और बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव दिखाया गया था।

सुनवाई के दौरान, भारत सरकार और रेल मंत्रालय की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने माननीय न्यायालय को आश्वासन दिया कि संबंधित रेलवे अधिकारी जीआरपी पुलिस स्टेशन भवन की मरम्मत, नवीनीकरण और उन्नयन का कार्य करेंगे, जो वर्तमान में जर्जर और असुरक्षित स्थिति में है।

न्यायालय को दिए गए इस आश्वासन को ध्यान में रखते हुए माननीय खंडपीठ ने जनहित याचिका का निपटारा किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मत, नवीनीकरण और उन्नयन कार्य करने के लिए दो महीने का समय दिया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता एडवोकेट सुनैना को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रभावी कदम उठाने में विफल रहते हैं तो वे पुनः न्यायालय में अपील कर सकती हैं।

माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि दो महीने के भीतर कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो एडवोकेट सुनैना को यह सूचित करने के लिए उचित याचिका दायर करने की स्वतंत्रता होगी कि दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया गया है और कोई मरम्मत या नवीनीकरण कार्य नहीं किया गया है।

एडवोकेट सुनैना द्वारा दायर जनहित याचिका में सार्वजनिक सुरक्षा, पुलिस कर्मियों की गरिमा और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के मुद्दे उठाए गए, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि प्रमुख सार्वजनिक परिवहन केंद्रों पर तैनात कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बुनियादी ढांचे से वंचित करना सीधे तौर पर जनहित और कानून के शासन को प्रभावित करता है।

 

What are your Feelings
Advertisement
Tap to Refresh