Follow

नारी शक्ति वंदन से नव भारत उदय

Listen to this article

लेखक : डॉ. सतीश पूनिया
भाजपा हरियाणा प्रभारी तथा राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष

संसद का यह विशेष सत्र भारतीय संसद के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। संसद का यह विशेष सत्र भारतीय जनता पार्टी की देश की आधी आबादी को उनका वांछित अधिकार दिलाने की मंशा और इच्छाशक्ति का भी सत्र है। गुरुवार को संसद में  संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 सदन में प्रस्तुत किए गए। 131 वें संशोधन के माध्यम से विधायिका में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू किये जाने का प्रस्ताव है।

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मोदी सरकार के नेतृत्व में पिछले एक दशक में देश और दुनिया ने यह अनुभव किया है कि भारत में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक तौर पर सशक्त किया गया है। इसके लिए महिला आधारित अनेक योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। महिलाओं को राजनैतिक तौर पर सशक्त करने की उसी मंशा के अनुरूप मोदी सरकार विधानसभा और संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से महिला आरक्षण के प्रावधान को शीघ्र लागू करने की दिशा में पहल की है।

Advertisement

भारत पुरातन प्रवाह का राष्ट्र है। एक विशिष्ट इतिहास,  संस्कृति और विरासत के कारण विश्व में एक पह‌चान वाला राष्ट्र है। जहां भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक भिन्नताएं होते हुए भी ‘अनेकता में  एकता’ ऐसा दृश्य परिलक्षित होता है।
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत आधुनिक युग में लोकतांत्रिक व्यवस्था की अक्षुण्णता के लिए भी माना जाता है। आज विश्व के मानचित्र पर भारत की एक आत्मनिर्भर स्वाभिमानी राष्ट्र की पहचान है।

भारत के लोकतंत्र को दृढ़ता भारत के संविधान ने दी है जो एक वैशिष्ट्य लिए हुए है, जिसमें नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों में बखूबी उल्लेख किया गया है। भारत के संविधान में प्रदत समानता के अधिकारों ने इसे और पुष्ट किया है, इसलिए लैंगिक समानता के अवसर सुनिश्चित करने के लिए यह उत्कंठा हमेशा रही है कि गार्गी, मैत्रेयी के पुरातन परंपरा के देश में महिलाओं यानि आधी आबादी को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले ताकि शासन में, निर्णयों में भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ ही नारी के उत्थान और उत्कर्ष में पूर्वक अपना योगदान दे सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिलाओं को उनका वांछित अधिकार दिलाने का निर्णय भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और उसके नेतृत्व की महिलाओं के प्रति संवेदनशील नीति का ही आईना है।  भारतीय जनसंघ और भाजपा के वैचारिक स्तंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय अपने ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांत में समाज को एक जीवंत इकाई के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार, समाज के प्रत्येक अंग का सशक्त होना आवश्यक है और नारी इसमें केंद्रीय भूमिका निभाती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुरुष और स्त्री परस्पर पूरक हैं। किसी एक की उपेक्षा राष्ट्र को कमजोर बना देती है। यह दर्शन आज मोदी सरकार की नीतियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ महिला सशक्तिकरण को केवल सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनरुत्थान का आधार माना गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को हमेशा प्राथमिकता दी। उन्होंने  संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाने का साहसिक प्रयास किया, भले ही वह उस समय राजनीतिक बाधाओं के कारण सफल नहीं हो सका।
हमने ऐसा समय भी देखा था जब देश की लाखों करोड़ों महिलाओं ने बैंक का दरवाजा भी नहीं देखा था। महिलाएं बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी ही नहीं थी, तो उन्हें बैंकिंग का लाभ कैसे मिलता। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनधन योजना शुरू हुई तो देश की 32 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खाते खुले। आज देश की बेटियां नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं।
मुद्रा योजना में 60% से ज्यादा लोन महिलाओं ने लिए हैं। देश की स्टार्टअप क्रांति को भी महिलाएं लीड कर रही हैं। आज 42% से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। यह हमारे लिए, देश के लिए और देश की आधी आबादी के लिए गौरव की बात है कि इस समय हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री जैसे अहम पद महिलाएं ही संभाल रही हैं। उन्होंने देश की गरिमा और गौरव, दोनों को बढ़ाया है।

साल 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था। तब एक सुर में ये बात भी उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू हो जाना चाहिए। खासकर, हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर इस बात पर जोर डाला था कि 2029 में ये लागू हो जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने उसी संकल्प को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में महिला सशक्तिकरण को लेकर जो ठोस कदम उठाए गए हैं, उन्होंने समाज की संरचना को बदलने का कार्य किया है। फिर चाहे वह सम्मानजनक जीवन जीने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालयों के निर्माण की बात हो, या फिर ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के माध्यम से महिलाओं को धुएँ से मुक्ति दिलाने का प्रयास हो। यह योजनाएँ केवल सुविधाएँ नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मसम्मानी बनाने के साधन हैं। आर्थिक सशक्तिकरण के मोर्चे पर भी मोदी सरकार लगातार महिलाओं के लिए कार्य कर रही हैं।

जन-धन खातों, स्वयं सहायता समूहों और मुद्रा योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है। आज ग्रामीण भारत में लाखों महिलाएँ उद्यमिता की ओर अग्रसर हैं। लखपति दीदी के माध्यम से मोदी सरकार ने महिलाओं को उद्यमिता में आगे बढ़ाने का काम किया है।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान के माध्यम से महिलाओं के प्रति समाज की सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाने में मोदी सरकार ने अभूतपूर्व काम किया। इस अभियान से निश्चित रूप से सामाजिक मानसिकता में परिवर्तन आया है। इसका परिणाम भी हमें पिछले दस-ग्यारह वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिला है। खेल, विज्ञान, शिक्षा, राजनीति और आर्थिक क्षेत्र में देश की महिलाओं ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

73वें और 74वें संविधान संशोधन के बाद पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण तो मिला, लेकिन लंबे समय तक ‘सरपंच पति’ जैसी प्रवृत्तियाँ इस व्यवस्था को कमजोर करती रहीं।  मोदी सरकार ने ‘सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान’ के माध्यम से इस प्रवृत्ति को चुनौती दी है। सशक्त पंचायत – नेत्री अभियान जैसी महत्वपूर्ण पहल से  पूरे देश में पंचायती राज संस्थाओं की महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त किया गया। 4 मार्च 2025 को नई दिल्ली में ‘सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान’ का शुभारंभ किया गया। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व को सुदृढ़ बनाने के ये प्रयास इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि आरक्षण और संस्थागत सहयोग के माध्यम से लोकतांत्रिक संरचनाओं में वास्तविक परिवर्तन संभव है।

हमने देखा कि सालभर पहले देश की सीमा पर सेना द्वारा चलाए गए आपरेशन सिंदूर में भी देश की जाबांज महिला सैनिकों ने अपने हौसलों से शत्रु को घुटने टेकने पर विवश कर दिया था। सीमा की सुरक्षा में देश की नारी शक्ति पूरी ताकत से जुटी हुई है।

भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, फाइटर पायलट्स की नियुक्ति और सामरिक निर्णयों में उनकी भूमिका यह दर्शाती है कि नारी शक्ति अब हर क्षेत्र में अग्रणी है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों ने यह सिद्ध किया है कि नारी केवल करुणा का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस और रणनीति की भी धुरी है।

वर्षों की जड़ता और संघर्ष तथा विमर्श के बाद मोदी सरकार में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक उल्लेखनीय, ऐतिहासिक एवं स्तुत्य कदम है। 2029 तक संसद और विधानसभाओं में में 33% महिला प्रतिनिधित्व का लक्ष्य भारत को न केवल एक आर्थिक शक्ति, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समावेशी लोकतंत्र के रूप में स्थापित करेगा।

 

What are your Feelings
Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
Tap to Refresh