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मान को तुरंत संजीव अरोड़ा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए : प्रताप सिंह बाजवा

न्यूज़म ब्यूरो 

चंडीगढ़, 10 मई। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद उन्हें तुरंत पंजाब मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।

 

बाजवा ने कहा कि भगवंत मान ईमानदारी और जवाबदेही के उन मानकों को कायम रखने में पूरी तरह विफल रहे हैं, जिनका वादा आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले किया था। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े विवादों में आम आदमी पार्टी के नेताओं का बार-बार नाम आना पार्टी की तथाकथित साफ-सुथरी राजनीति के मॉडल की सच्चाई को उजागर करता है।

 

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बाजवा ने कहा, “भगवंत मान को तुरंत संजीव अरोड़ा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए। मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामले में गिरफ्तार मंत्री जांच पूरी होने तक पद पर नहीं रह सकता। अगर मान अब भी कार्रवाई नहीं करते, तो यह साफ हो जाएगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता के आम आदमी पार्टी के दावे केवल राजनीतिक नारे थे।”

 

उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी ने अब “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” को हर जांच और कानूनी कार्रवाई के समय एक तय बहाना बना लिया है। उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी हर मामले में राजनीतिक बदले की कार्रवाई का रोना रोकर लोगों को गुमराह नहीं कर सकती। पंजाब की जनता पूछ रही है कि आखिर क्यों आम आदमी पार्टी के नेता बार-बार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं।”

 

बाजवा ने कहा कि यह मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की विश्वसनीयता के पतन का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा, “जो पार्टी कभी पूरे देश को नैतिकता और ईमानदारी का पाठ पढ़ाती थी, वही आज गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मंत्रियों और नेताओं का बचाव करने में लगी हुई है।”

 

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नैतिकता यह मांग करती है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से तुरंत जवाबदेही तय की जाए।

 

बाजवा ने कहा, “भगवंत मान को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ खड़े हैं या गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मंत्रियों के साथ। मुख्यमंत्री की चुप्पी और निष्क्रियता केवल इस धारणा को मजबूत करेगी कि आम आदमी पार्टी ने उन सभी सिद्धांतों को छोड़ दिया है, जिनके नाम पर उसने जनता से वोट मांगे थे।”

 

बाजवा ने आगे कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि आम आदमी पार्टी, जो एक मजबूत लोकपाल और स्वच्छ शासन की मांग करने वाले जन आंदोलन से पैदा हुई थी, सत्ता में आने के बाद उन्हीं सिद्धांतों को लागू करने में विफल रही।

 

उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली थी और उसने लोकपाल जैसी संस्थाओं के जरिए जवाबदेही का वादा किया था, लेकिन दिल्ली में लंबे शासनकाल के दौरान भी पार्टी ने कभी एक मजबूत और प्रभावी लोकपाल व्यवस्था को गंभीरता से लागू नहीं किया। पंजाब में भी अक्टूबर 2025 से लोकपाल का पद खाली पड़ा है। यह आम आदमी पार्टी की राजनीति के पूर्ण पाखंड को उजागर करता है और साबित करता है कि उसका भ्रष्टाचार विरोधी नैरेटिव केवल सत्ता हासिल करने का एक राजनीतिक हथियार था।”

 

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