भारत और इंडोनेशिया के रक्षा संबंधों में नया मील का पत्थर; ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल डील पर लगी मुहर
न्यूज़म ब्यूरो
जकार्ता / नई दिल्ली, 8 जुलाई। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) पॉलिसी और स्वदेशी सैन्य हथियारों के एक्सपोर्ट (Defence Exports) को वैश्विक मंच पर एक और बहुत बड़ी सफलता मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को एक नए ऐतिहासिक मुकाम पर ले जाते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos Supersonic Cruise Missile) और अस्त्र मिसाइल (ASTRA Beyond-Visual-Range Air-to-Air Missile) की सप्लाई के लिए ऐतिहासिक रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जकार्ता के ‘इस्ताना मरडेका’ (Merdeka Palace) में पीएम मोदी और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई हाई-लेवल द्विपक्षीय बैठक के बाद इस मेगा-डील की आधिकारिक घोषणा की गई।
“एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत”
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इस दिन को द्विपक्षीय संबंधों का एक “स्वर्णिम अध्याय” बताया, जो न केवल दोनों समुद्री पड़ोसियों के आपसी भरोसे को मजबूत करेगा बल्कि 21वीं सदी के इंडो-पैसिफिक रीजन में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
डील के मुख्य बिंदु और मिसाइल की खासियतें
इस डील के तहत इंडोनेशिया भारत से लगभग $200 मिलियन (करीब 1,600 करोड़ रुपये) की लागत से ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां खरीदेगा। इसके अलावा भारत की ‘भारत डायनेमिक्स लिमिटेड’ (BDL) इंडोनेशियाई वायुसेना के सुखोई (Su-30) लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइलों की सप्लाई और इंटीग्रेशन का काम करेगी।
| रक्षा प्रणाली (Weapon System) | मारक क्षमता और मुख्य विवरण |
| ब्रह्मोस (BrahMos) | दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (गति: Mach 2.8), जिसकी मारक क्षमता 290 किमी से अधिक है। इंडोनेशिया इसका उपयोग मुख्य रूप से तटीय रक्षा (Coastal Defence) के लिए करेगा। |
| अस्त्र (ASTRA Mk-1) | भारत की स्वदेशी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल, जो हवा से हवा में 80 से 110 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के विमानों को मार गिराने में सक्षम है। |
| अन्य खरीदार देश | फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्वी एशिया (ASEAN) का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जो भारत की मारक ब्रह्मोस प्रणाली को अपना रहा है। |
स्पेस और क्रिटिकल मिनरल्स पर भी हुआ समझौता
रक्षा के अलावा दोनों देशों ने अपने व्यापक रणनीतिक सहयोग (Comprehensive Strategic Partnership) का दायरा बढ़ाते हुए अंतरिक्ष और उद्योग क्षेत्र में भी कई समझौते (MoUs) किए हैं:
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स्पेस सेक्टर में सहयोग: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण में इंडोनेशिया के स्पेस सेक्टर की क्षमता निर्माण (Capacity Building) में मदद करेगा।
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क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals): स्टील, निकल और रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के सप्लाई चेन इकोसिस्टम में भारत अब इंडोनेशिया में बड़ा निवेश करेगा।
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सबांग पोर्ट प्रोजेक्ट: मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के पास स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘सबांग पोर्ट’ (Sabang Port) को संयुक्त रूप से विकसित करने की गति में भी दोनों देशों ने तेजी लाने का संकल्प लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के सैन्य ऑपरेशनों में ब्रह्मोस और भारतीय रक्षा प्रणालियों के शानदार प्रदर्शन ने वैश्विक स्तर पर मेड-इन-इंडिया रक्षा उपकरणों के प्रति विश्वसनीयता को काफी बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक डिफेंस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
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