Kewal Singh Dhillon ने पंजाब की AAP सरकार पर नशे, अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बढ़ते कर्ज को लेकर सवाल उठाए
उन्होंने सरकार से हर वादे और रुपये का हिसाब देने की मांग की
न्यूज़म ब्यूरो
Kewal Singh Dhillon ने AAP के अभियान पर उठाए सवाल
चंडीगढ़ में पंजाब भाजपा अध्यक्ष Kewal Singh Dhillon ने आम आदमी पार्टी के डोर-टू-डोर अभियान पर सवाल उठाए। AAP ने 20 सितंबर से राज्यभर में घर-घर संपर्क अभियान शुरू किया है। इस अभियान में 2.68 लाख बूथ समिति सदस्यों के शामिल होने की बात कही गई है।
Kewal Singh Dhillon ने आरोप लगाया कि साढ़े चार साल के शासन में पंजाब के सामने कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने नशे, अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कर्ज को प्रमुख मुद्दा बताया।
उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले AAP ने पंजाब को बदलने के बड़े वादे किए थे। अब सरकार को अपने वादों और योजनाओं का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल
Kewal Singh Dhillon ने नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि AAP ने तीन महीने में नशा खत्म करने का दावा किया था।
उनका आरोप है कि पंजाब में नशे की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर किए गए वादों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने गैंगस्टरवाद, फिरौती और अपराध की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, इन घटनाओं से व्यापारियों और आम नागरिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
हालांकि, नशे और कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हालिया BJP अभियान के दौरान भी AAP सरकार की नशा नीति को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर मांगा जवाब
भाजपा नेता ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कामकाज में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Kewal Singh Dhillon ने कहा कि AAP ने भ्रष्टाचार मुक्त पंजाब का वादा किया था। अब सरकार को बताना चाहिए कि नागरिकों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।
उन्होंने कहा कि जनता केवल दावों के बजाय सरकारी कामकाज का वास्तविक हिसाब जानना चाहती है।
₹20,000 करोड़ की खनन आय के वादे पर सवाल
Kewal Singh Dhillon ने रेत और बजरी से होने वाली आय का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने AAP के ₹20,000 करोड़ वार्षिक राजस्व के पुराने दावे का हवाला दिया।
द ट्रिब्यून की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में पंजाब की खनन आय करीब ₹600 करोड़ रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि करीब ₹150 करोड़ अन्य राज्यों से पंजाब में आने वाली खनन सामग्री पर कर से जुड़े थे।
Kewal Singh Dhillon ने इसी अंतर को लेकर सरकार से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि ₹20,000 करोड़ के लक्ष्य और करीब ₹600 करोड़ की आय के बीच अंतर का हिसाब कौन देगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर भी निशाना
Kewal Singh Dhillon ने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल पुरानी इमारतों का रंग-रोगन विकास का प्रमाण नहीं हो सकता।
उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों और स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े मुद्दे उठाए। उनके मुताबिक, सरकार को जमीनी स्तर पर सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार का आकलन केवल विज्ञापनों से नहीं होना चाहिए। इसके लिए अस्पतालों और स्कूलों की वास्तविक स्थिति भी देखनी चाहिए।
उद्योग और रोजगार पर उठाए सवाल
Kewal Singh Dhillon ने उद्योग और निवेश के माहौल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतिगत अस्थिरता से उद्योग जगत में चिंता पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में निवेश बढ़ाने के लिए भरोसेमंद कारोबारी माहौल जरूरी है। उनके अनुसार, निवेश और उद्योग बढ़ने से ही रोजगार के अवसरों में विस्तार हो सकता है।
पंजाब के कर्ज को लेकर सरकार से जवाब मांगा
Kewal Singh Dhillon ने पंजाब की वित्तीय स्थिति का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्य के कुल कर्ज को करीब ₹4.5 लाख करोड़ के स्तर पर बताया।
राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर अलग-अलग आंकड़े और आकलन सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में राजस्व बढ़ने के साथ राज्य के वित्तीय दबाव और कर्ज भुगतान की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार को पंजाब की वित्तीय स्थिति पर स्पष्ट जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।
हर वादे का हिसाब मांगने की बात
Kewal Singh Dhillon ने कहा कि किसान, मजदूर, कर्मचारी, शिक्षक, युवा, व्यापारी और महिलाएं सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल तक पंजाब की जनता ने सरकार के दावे और विज्ञापन सुने हैं। अब सरकार को अपने काम और वादों का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से खजाने, योजनाओं और वादों का पूरा हिसाब देने की मांग दोहराई।
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