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पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील का असर, ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में 6% तक गिरावट

न्यूज़म ब्यूरो

नई दिल्ली, 1 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में लोगों से जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इसके बाद मंगलवार को टाइटन कंपनी, स्काई गोल्ड और कल्याण ज्वैलर्स जैसी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार के कारोबार में टाइटन कंपनी के शेयर 2 प्रतिशत गिरकर 5,015 रुपये पर आ गए, जबकि कल्याण ज्वैलर्स के शेयर 6 प्रतिशत गिरकर 578 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गए। बीएसई पर थंगामयिल ज्वैलरी के शेयर 2 प्रतिशत गिरकर 5,322 रुपये पर रहे, जबकि स्काई गोल्ड के शेयर 6.3 प्रतिशत गिरकर 756 रुपये प्रति शेयर पर आ गए।

प्रधानमंत्री की ओर से लोगों से की गई यह दूसरी ऐसी अपील है। इससे पहले मई में हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से अगले एक साल तक शादियों के लिए सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। यह अपील ईंधन और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के मकसद से की गई एक बड़ी अपील का हिस्सा थी।

प्रधानमंत्री ने लोगों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से काम करने के तरीके को फिर से अपनाने और गैर-जरूरी यात्राओं, जिनमें विदेश यात्राएं भी शामिल हैं, को कम करने का भी आग्रह किया था। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान देश ने हर महीने औसतन 60 टन सोने का आयात किया, जिसका मासिक आयात बिल लगभग 6 अरब डॉलर रहा।

पीएम मोदी की बातों का क्या मतलब है?

भारतीय परिवारों के लिए सोना परंपरा, सुरक्षा, शादी-ब्याह, बचत और पीढ़ियों की संपत्ति का प्रतीक है। इतिहास में भारतीय परिवारों के लिए सोना लंबे समय तक मूल्य सुरक्षित रखने का प्रमुख जरिया माना गया है, खासकर अनिश्चितता के समय में। यही वजह है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद बाजार में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और सोमवार को अचानक हुई बिकवाली के कारण ज्वेलरी कंपनियों के शेयर 9 प्रतिशत तक गिर गए।

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बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया से अलग प्रधानमंत्री की अपील एक बड़ी व्यापक आर्थिक चिंता से भी जुड़ी मानी जा रही है। वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये पर दबाव के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा एक अहम मुद्दा है।

सोने का भविष्य

जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड और अरबपति हेज फंड मैनेजर जॉन पॉलसन के अनुसार, सोने में हालिया गिरावट निवेशकों के लिए धीरे-धीरे सोना जमा करने का मौका दे सकती है। दोनों का मानना है कि यह कीमती धातु लंबे समय तक तेजी के दौर की शुरुआत में हो सकती है।

पॉलसन ने कहा कि जैसे-जैसे लोगों का कागजी मुद्राओं से भरोसा कम होगा, सोने की मांग एक विकल्प के तौर पर बढ़ती रहेगी। अरबपति पॉलसन ने सबप्राइम मॉर्गेज के खिलाफ दांव लगाकर वॉल स्ट्रीट के इतिहास के सबसे फायदेमंद कारोबार में से एक किया था। इसके बाद 2009 में उन्होंने सोने की ओर ध्यान दिया।

पॉलसन का तर्क था कि वित्तीय संकट के बाद दिए गए राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहनों से अंततः अमेरिकी डॉलर कमजोर हो सकता है। तब से सोने की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ चुकी हैं और 5,000 डॉलर का स्तर पार करने के बाद इनमें कुछ गिरावट आई है।

उन्होंने कहा कि सोने की मांग लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना जोड़ रहे हैं और निजी क्षेत्र की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। पॉलसन के मुताबिक, सोना दुनिया में एक महत्वपूर्ण रिजर्व करेंसी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और सरकारी मुद्राओं के विकल्प के तौर पर इसकी मांग बढ़ रही है।

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