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न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़ : खाड़ी युद्ध (विशेष रूप से अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष) का असर अब भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल और एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने से ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है। हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति बाधित होने से देश में घरेलू गैस सिलेंडरों के दाम बढ़े हैं। हाल ही में (7 मार्च 2026 से) घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़कर दिल्ली में ₹913 हो गए हैं, जबकि कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर ₹115 महंगा होकर ₹1,883 पहुंच गया है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा, “महंगाई की मार पहले से झेल रही जनता पर अब गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों और कमी ने दोहरी मार डाल दी है। इससे घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार दामों में कमी नहीं करती और आपूर्ति सुचारू नहीं बनाती, तो हरियाणा कांग्रेस प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
हरियाणा में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कमी की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश में केवल 7 दिन का स्टॉक बचा हुआ है (इंडियन ऑयल के पास लगभग 3.5 दिन, भारत पेट्रोलियम के पास 7.1 दिन, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पास 5.8 दिन का)। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, और लोग परेशान हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर अब घरेलू सिलेंडर बुकिंग के लिए न्यूनतम 25 दिन का अंतराल अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। शादियों के सीजन में यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जिससे अराजकता जैसा माहौल पैदा हो गया है।
इसके अलावा, पानीपत में गैस आधारित लगभग 250 टेक्सटाइल और हैंडलूम इंडस्ट्रीज बंद हो गई हैं। पॉलिएस्टर धागों के दाम 20% तक बढ़ गए हैं, और खान-पान से जुड़े कारोबार पर भी गहरा संकट है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आम जनता के साथ-साथ उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इसके अलावा, पानीपत में गैस आधारित लगभग 250 टेक्सटाइल और हैंडलूम इंडस्ट्रीज बंद हो गई हैं। पॉलिएस्टर धागों के दाम 20% तक बढ़ गए हैं, और खान-पान से जुड़े कारोबार पर भी गहरा संकट है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आम जनता के साथ-साथ उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस संकट पर पहले ही चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव से भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है, क्योंकि हमारी 40% से अधिक तेल आयात और अधिकांश एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है। अब यही हो रहा है—एलपीजी के दाम बढ़े हैं, और आगे पेट्रोल-डीजल पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियां और अमेरिका के साथ समझौते ने भारत को कमजोर बनाया है, जिससे ऊर्जा संकट गहरा रहा है।
कांग्रेस पार्टी की मांग है कि केंद्र सरकार तुरंत ठोस कदम उठाए—एलपीजी उत्पादन बढ़ाए, दामों में कमी करे, आपूर्ति सुचारू बनाए, और जनता को किसी प्रकार की परेशानी से बचाए। यदि आवश्यक हुआ तो पार्टी आंदोलन के रास्ते पर भी जाएगी।
यह संकट केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में महसूस किया जा रहा है, जहां कई शहरों में होटल-रेस्तरां बंद होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार को अपनी ऊर्जा सुरक्षा, जनहित और वैकल्पिक आयात स्रोतों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
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