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IISF भारत की वैज्ञानिक सोच का प्रतीक : राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष

राज्यपाल ने भव्य समापन समारोह को किया संबोधित
भारत विज्ञान और इनोवेशन में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है

पंचकूला, 9 दिसंबर : हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) सिर्फ़ विज्ञान का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक सोच, तकनीकी क्षमता और भविष्य के लिए दूरदर्शी दिशा का प्रतीक है। प्रो. असीम कुमार घोष आज यहां इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2025 के भव्य समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रो.घोष की धर्मपत्नी मित्रा घोष और राज्यपाल के सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस दुष्मंत कुमार बेहरा भी मौजूद रहे। 

राज्यपाल ने कहा कि पिछले चार दिनों में हमने विज्ञान के जीवंत रंग, नवाचारपूर्ण विचारों की चमक और अनुसंधान व ज्ञान की प्रेरणादायक ऊंचाइयों को पूरे देश में गूंजते हुए देखा है। यहाँ प्रस्तुत हर विचार, हर चर्चा, हर शोध-पत्र और हमारे युवा दिमागों द्वारा उठाया गया हर जिज्ञासु प्रश्न इस सच्चाई को पुनः स्थापित करता है कि भारत विज्ञान और नवाचार में एक वैश्विक नेता के रूप में तेजी से उभर रहा है।

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियाँ पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बनी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व में हरियाणा विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। गुरुग्राम एक महत्वपूर्ण आईटी, एआई और स्टार्ट-अप हब बन चुका है। अनुसंधान संस्थान नए वैज्ञानिक आयाम खोल रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय एग्री-टेक, डेयरी साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग, क्लाइमेट साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को सुदृढ़ कर रहे हैं। 

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उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने विज्ञान-आधारित भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से विभिन्न दूरदर्शी पहल भी शुरू की हैं। इनमें हरियाणा साइंस एंड इनोवेशन मिशन, यूनिवर्सिटी टेक-इंक्यूबेशन हब, एग्री-टेक और क्लाइमेट-टेक कार्यक्रम, स्कूलों में रोबोटिक्स, ड्रोन और कोडिंग लैब शामिल हैं।

युवाओं, छात्रों और वैज्ञानिकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने उनसे निरंतर प्रश्न पूछते रहने, कल्पना करते रहने और नवाचार करते रहने का आग्रह किया। उनके द्वारा किया गया हर प्रयोग, बनाया गया हर प्रोजेक्ट और लिखा गया हर शोध-पत्र राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

 

इस अवसर पर उन्होंने सभी से विज्ञान को समाज तक पहुँचाने, समाज को विज्ञान का सहभागी बनाने और भारत को एक वैश्विक वैज्ञानिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने सभी आयोजकों, वैज्ञानिकों, वालंटियर्स, सहभागी संस्थानों, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों और विशेष रूप से उन हजारों युवा मस्तिष्कों को हृदय से बधाई दी, जिन्होंने इस फेस्टिवल को न केवल सफल बनाया, बल्कि ऐतिहासिक भी बनाया।

इस मौके पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव डी. सेंथिल पांडियन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग हरियाणा के महानिदेशक राजीव रतन, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, विभा के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिक डॉ. जगवीर सिंह, आईआईटीएम, पुणे के वैज्ञानिक डॉ. अनूप महाजन, पंचकूला के उपायुक्त सतपाल शर्मा, पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्ता, नगराधीश जागृति और अन्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

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