देशभक्ति का भाव जागृत किया इस गीत ने
अंबाला में पुलिस डीएवी मैदान में शाम 5 से 7 बजे तक चला कार्यक्रम
‘द्विनगर तरुण स्वयंसेवक एकत्रीकरण’ में किया सीधा संवाद
अंबाला शहर और अंबाला छावनी से 1000 से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में हुए शामिल
हरियाणा में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का प्रवास, आज अंबाला पहुंचे, शनिवार को कुरुक्षेत्र में रहेंगे
न्यूज़म ब्यूरो
अंबाला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि संघ ने सौ वर्षों की यात्रा में अपनी दशा बदलीहै, दिशा नहीं बदली, उसी के भरोसे हमें समाज का विश्वास
प्राप्त हो रहा है। संघ को खड़ा करने में सौ साल लगे और अनुकूलता तो पिछले 20 वर्षों से लगातार बढ़ रही है, परंतु उससे पहले का पूरा समय उपेक्षाऔर विरोध में बीता।बहुत कठिन परिस्थितियों में स्वयंसे वकों को कार्य को आगे बढ़ाना पड़ा। डॉ. भागवत पंजाब प्रवास के बादशुक्रवार को हरियाणा के अंबाला पहुंचे।
उनका 28 फरवरी तक हरियाणा का दो दिवसीय प्रवास है। हरियाणा प्रवास के पहले दिन उन्होंने पुलिस डीएवी स्कूल के मैदान में आयोजित ‘द्विनगर तरुण स्वयंसेवक एकत्रीकरण’
में स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान मंच पर प्रांत संघचालक प्रताप सिंह, विभाग संघ चालक रमाकांत और जिला संघचालक प्रदीप खेड़ा उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने संघ के
संस्कार और अनुकूल वातावरण में उत्पन्न होने वाले अहंकार के भाव से बचने के लिए पौराणिक कथा के माध्यम से समझाया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां से अथाह प्रेम करने वाले तीन
सगे भाइयों और एक रानी की कहानी भी सुनाई। दोनों प्रसंगों में उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि व्यक्ति अपने कार्य और उद्देश्य को फलीभूत करते समय किन विषयों पर ध्यानकेंद्रित करे, ताकि उसके परिणाम केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी हितकारी हों। उन्होंने कहा कि संघ ने भी सौ वर्षों की यात्रा में अपनी दशा बदली है, दिशा नहीं बदली उसी
के भरोसे हमें समाज का विश्वास प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि आज संघ के कार्यक्रम बड़े हो रहे हैं, यह सुखद दृश्य है, जो समाज की कृपा और हमारी मेहनत का फल है, लेकिनहमें चिंतन भी करना होगा। अब और अधिक सावधान
रहने की आवश्यकता है, क्योंकि लोग समीक्षा की दृष्टि से संघ को देख रहे हैं।यह इसलिए हो रहा है क्योंकि सौ वर्षों में हम एक विशिष्ट पद्धति, आचार-विचार और संस्कारों के साथ आगे
बढ़े हैं। कार्यक्रम काशुभारंभ सायं साढ़े पांच बजे ध्वजारोहण से हुआ। इसके बाद प्रार्थना, शारीरिक प्रदर्शन, सामूहिक गीत, परिचय, अमृत वचन, एकलगीत तथा सरसंघचालक के
उद्बोधन के उपरांत कार्यक्रम का समापन हुआ। इस कार्यक्रम के पश्चात सरसंघचालक अंबाला से कुरुक्षेत्र के लिए प्रस्थान कर गए। प्रवास के दूसरे दिन 28 फरवरी को डॉ. मोहनराव भागवत
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार मेंआयोजित गोष्ठी में शामिल होंगे। इस गोष्ठी में शिक्षाविद, सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी, न्यायाधीशों की सहभागिता रहेगी। इस दौरान क्षेत्र प्रचारक
प्रमुख बनवीर जी, क्षेत्र कार्यवाह रोशनलाल, सह क्षेत्र कार्यवाह किस्मत कुमार, हेमराज, अंबाला सह जिलासंघचालक ओंकार सिंह, कृष्ण सिंघल, सीताराम व्यास और सरदार जसबीर सिंह
उपस्थित रहे।
…देशभक्ति का भाव जगाया कार्यक्रम गीत ने
अगर हम नहीं देश के काम आए
धरा क्या कहेगी गगन क्या कहेगा
चलो श्रम करें आज खुद को संवारें
युगों से चढ़ी जो खुमारी उतारें
15 से 40 वर्ष आयु वर्ग के एक हजार स्वयंसेवकों की उपस्थिति रही
इस एकत्रीकरण में अंबाला शहर और अंबाला छावनी नगर के एक हजार से अधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। दो घंटे के इस कार्यक्रममें 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग के अपेक्षित स्वयंसेवकों एवं व्य
वस्था में लगे अन्य 40 स्वयंसेवकों ने भागीदारी की।
अंबाला के स्वयंसेवकों के लिए इसलिए विशेष, 20 साल बाद
अंबाला के स्वयंसेवकों के लिए सरसंघचालक का यह हरियाणा प्रवास विशेष रहा, क्योंकि यहां 20 वर्ष पहले सरसंघचालक अंबालाके हिंदू सम्मेलन में पहुंचे थे। उसके बाद 27 फरवरी 2026
को यह अवसर आया जब वे ‘द्विनगर तरुण स्वयंसेवक एकत्रीकरण’ कार्यक्रम में पहुंचे।
सरसंघचालक के समक्ष 40 साल बाद पूर्ण गणवेश का अवसर
अंबाला शहर और अंबाला छावनी के स्वयंसेवकों में कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह रहा, क्योंकि एक हजार से अधिक अपेक्षितस्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में कार्यक्रम में शामिल हुए। सरसंघचालक
की उपस्थिति में अंबाला के स्वयंसेवकों का पूर्ण गणवेशकार्यक्रम का अवसर लगभग 40 वर्ष बाद आया।