मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल के विश्वविद्यालयों को स्थानीय जरूरतों पर रिसर्च बढ़ाने को कहा
उन्होंने जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सतत पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया
न्यूज़म ब्यूरो
शिमला, 25 सितंबर | सोलन में आयोजित शैक्षणिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री सुक्खू ने उच्च शिक्षा पर चर्चा की।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से हिमाचल की परिस्थितियों के अनुसार Research Projects तैयार करने को कहा।
सरकार शिक्षा की गुणवत्ता, प्रयोगशालाओं और विद्यार्थियों के कौशल पर ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा को रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विश्वविद्यालयों से हिमाचल की जरूरतों के अनुसार अनुसंधान बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने सोलन में शैक्षणिक सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्मेलन का विषय निजी शिक्षण संस्थानों की भूमिका और भविष्य की प्राथमिकताओं से जुड़ा था। इसका आयोजन हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने किया।

Himachal Education में Research Projects पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रदेश की वास्तविक जरूरतों पर शोध करना चाहिए। उन्होंने मौसम परिवर्तन, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने सतत पर्यटन, अक्षय ऊर्जा और बागवानी पर भी ध्यान देने को कहा। स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी उन्होंने प्राथमिक क्षेत्रों में शामिल किया।
उन्होंने कहा कि इन विषयों पर उपयोगी शोध प्रदेश के लिए मददगार हो सकता है। साथ ही विश्वविद्यालयों को नवाचार की संभावनाएं बढ़ाने पर काम करना चाहिए। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
Private Universities को शिक्षा व्यवस्था का सहयोगी बताया

सुक्खू ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं हैं। उनके अनुसार ये उच्च शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने संकाय विकास और शोध सहयोग पर जोर दिया। छात्र आदान-प्रदान, स्टार्ट-अप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ाने की बात कही। इससे विद्यार्थियों को नए अनुभव और अवसर मिल सकते हैं।
हिमाचल सरकार निजी विश्वविद्यालयों के लिए नियामक ढांचे के तहत उच्च शिक्षा व्यवस्था को संचालित करती है।
Skill-Based Education से रोजगार अवसर बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रमों को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करना चाहिए। इससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से बदलते रोजगार बाजार के अनुसार पाठ्यक्रम अपडेट करने को कहा। बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि तकनीक पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
पर्यटन और आतिथ्य, अक्षय ऊर्जा तथा वानिकी को भी शामिल किया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में कौशल आधारित कार्यक्रम बढ़ाने का आग्रह किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम हिमाचल की अर्थव्यवस्था से जुड़े होने चाहिए।
CBSE Schools पर शिक्षा सुधारों का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक सुधार कर रही है।
राज्य में 156 सरकारी स्कूल सीबीएसई से संबद्ध किए जा चुके हैं। इन स्कूलों में आगे तीनों संकाय उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी काम हुआ है।
उन्होंने प्रयोगशालाओं और अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही। विद्यार्थियों की पहुंच, गुणवत्ता और कौशल विकास पर भी जोर दिया गया।
Education Quality में हिमाचल की स्थिति का जिक्र
मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता में हिमाचल की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पांचवें स्थान पर पहुंचा है।
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2025 में हिमाचल को पांचवां स्थान मिला था। 2021 के सर्वेक्षण में राज्य 21वें स्थान पर था।
यह आंकड़ा मुख्यमंत्री के शिक्षा क्षेत्र में सुधारों के दावे के संदर्भ में सामने आया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
Sustainable Development के लिए छात्रों से संवाद

मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों से भी संवाद किया। उन्होंने प्रदेश में जल आधारित आत्मनिर्भरता की सोच विकसित करने का आग्रह किया।
उन्होंने प्राकृतिक कृषि और दूध उत्पादन जैसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया। बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
Himachal Education को Education Hub बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हिमाचल को शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए बेहतर पाठ्यक्रम और आधुनिक सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने उद्योगों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई। उनके अनुसार शिक्षा और रोजगार के बीच सीधा संबंध मजबूत होना जरूरी है।
कार्यक्रम में मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल, अधिकारी और निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। विश्वविद्यालयों के कुलपति, उपकुलपति और विद्यार्थी भी सम्मेलन में शामिल हुए।
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