न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता आज यहाँ हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में छोटे करदाताओं/ व्यापारियों को राहत देने के लिए जीएसटी कर नियम लागू होने से पूर्व बकाया वसूली के लिए हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना (ओटीएस-2026) को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना का उद्देश्य पुराने मुकदमों को कम करना और पहले के कर कानूनों के तहत बकाया वसूली में तेजी लाना है।
यह योजना 1 जून, 2026 को शुरू होगी और 120 दिनों तक लागू रहेगी। इस अवधि के दौरान, करदाता योजना का लाभ उठाने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
GST लागू होने से पहले के निम्नलिखित 7 अधिनियमों के तहत बकाया राशि की वसूली के लिए योजना लाई गई है –
- हरियाणा मूल्य संवर्धन कर अधिनियम, 2003 (2003 का 6)
- केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (केंद्रीय अधिनियम 1956 का 74)
- हरियाणा विलासिता कर अधिनियम, 2007 (2007 का 23)
- हरियाणा मनोरंजन शुल्क अधिनियम, 1955 (पंजाब अधिनियम 1955 का 16)
- हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 (1973 का 20)
- हरियाणा स्थानीय क्षेत्र विकास कर अधिनियम, 2000 (2000 का 13)
- हरियाणा स्थानीय क्षेत्रों में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2008 (2008 का 8)
इस योजना के तहत ऐसे करदाता जिनका1 लाख रुपये तक का बकाया किसी विशेष आंकलन वर्ष के लिए लंबित है वह किसी भी पारसंगिक अधिनियम के तहत ब्याज तथा जुर्माने सहित सम्पूर्ण बकाया राशि माफ़ी का लाभ ले सकता है और उसे यह लाभ लेने के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत बकाया राशि के लिए कर में विशेष छूट प्रदान की गई है; इस अधिनियम के तहत वैट लागू होने से पहले के समय का पुराना बकाया शामिल है।
- हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत कर छूट:
– 1 रुपये से 1 लाख रुपये तक की राशि पर 100 प्रतिशत छूट
– 1 लाख रुपये से अधिक की राशि पर 70 प्रतिशत छूट
इसके अतिरिक्त उपर्युक्त कर माफ़ी योजना में 100 प्रतिशत ब्याज व जुर्माना भी माफ़ किया जायेगा।
अन्य छह संबंधित अधिनियमों के अंतर्गत कर की छूट का प्रावधान-
| श्रेणी | छूट का प्रतिशत |
| 1 रुपये से 1 लाख रुपये तक | 100% |
| 1 लाख से अधिक से 10 लाख तक | 60% |
| 10 लाख से अधिक से 1 करोड़ तक | 50% |
| 1 करोड़ से अधिक से 10 करोड़ तक | 40% |
| 10 करोड़ रुपये से 30 करोड़ तक | 35% |
| 30 करोड़ रुपये से 60 करोड़ तक | 30% |
| 60 करोड़ रुपये से अधिक | 0% |
इसके अतिरिक्त उपर्युक्त कर माफ़ी योजना में 100 प्रतिशत ब्याज व जुर्माना भी माफ़ किया जायेगा।
निपटान टैक्स के भुगतान को आसान बनाने के लिए, किस्तों की निम्नलिखित उदार व्यवस्था शुरू की गई है –
- 5 लाख रुपये तक – एकमुश्त भुगतान
- 5 लाख रुपये से ज़्यादा और 25 लाख रुपये तक – दो बराबर किस्तें (एक किस्त आवेदन जमा करते समय और दूसरी किस्त अनंतिमआदेश की तारीख से 60 दिनों के भीतर)
- 25 लाख रुपये से ज़्यादा – तीन किस्तें(निपटान राशि का 40% आवेदन जमा करते समय, दूसरी किस्त 30% की अनंतिम आदेश के 60 दिनों के भीतर, और तीसरी किस्त दूसरी किस्त के समय से 60 दिनों के भीतर)
करदाता हर स्लैब के लिए अलग से छूट पाने के हकदार होंगे, जिससे करदाताओं को हर पिछले स्लैब में दी गई टैक्स छूट का फ़ायदा संबंधित स्लैब तक मिलेगा। इसके अलावा, करदाता को ज़्यादा लचीलापन मिलता है क्योंकि वह चुने हुए सालों के लिए इस योजना को चुन सकता है।
OTS योजना में ‘दस्तावेज़-आधारित छूट’ (Document Linked Waiver) का एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे करदाता संबंधित कानूनों के तहत उपलब्ध वैधानिक दस्तावेज़ और फ़ॉर्म जमा कर सकते हैं; और जमा किए गए दस्तावेज़ों/फ़ॉर्मों के सफल सत्यापन के आधार पर, टैक्स की मांग को आगे निपटाया जाता है।
कैबिनेट ने पिछली अधिसूचना के तहत 2024-25 में जारी BC-A/BC-B नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता को मंज़ूरी दी
एचपीएससी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को होगा लाभ
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में गत 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान जारी BC-A और BC-B नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता देने के संबंध में एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।
कैबिनेट द्वारा लिया गया यह निर्णय हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2024 में विभिन्न विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) के 3069 पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापनों के मद्देनज़र लिया गया है। गत 23 जुलाई, 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के अनुसार, BC-A और BC-B श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को नवीनतम सरकारी निर्देशों और 16 जुलाई, 2024 की अधिसूचना के अनुरूप नए प्रमाणपत्र जमा करने की आवश्यकता थी।
16 जुलाई, 2024 की नई अधिसूचना जारी होने के बाद, 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत पहले जारी किए गए प्रमाणपत्रों को एचपीएससी द्वारा वैध नहीं माना जा रहा था, जिसके परिणामस्वरूप कई आवेदकों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। इसके बाद, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष कई रिट याचिकाएँ दायर की गईं।
कैबिनेट को सूचित किया गया कि 16 जुलाई, 2024 की अधिसूचना में किया गया मुख्य बदलाव केवल क्रीमी लेयर की स्थिति निर्धारित करने के लिए वार्षिक आय सीमा को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने से संबंधित है। इसलिए, जो उम्मीदवार 2021 की अधिसूचना के अनुसार नॉन-क्रीमी लेयर के अंतर्गत वर्गीकृत थे, वे संशोधित मानदंडों के तहत भी नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी में ही बने रहेंगे।
इसे ध्यान में रखते हुए, कैबिनेट ने मंज़ूरी दी कि 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान, 23 जुलाई, 2024 से पहले जारी किए गए BC-A/BC-B (नॉन-क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्रों को सभी प्रयोजनों के लिए वैध माना जाएगा। इस निर्णय से प्रभावित उम्मीदवारों को काफी राहत मिलने और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
1 जनवरी, 2026 से एनसीआर बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी, ईवी और स्वछ्तम ईंधन वाली गाड़ियां ही शामिल होंगी
हरियाणा कैबिनेट ने एनसीआर में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एग्रीगेटर और/ या डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नए नियमों को मंज़ूरी दी
चंडीगढ़। हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के तहत मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज़ द्वारा जारी दिशानिर्देश और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निर्देशों के अनुसार एग्रीगेटर लाइसेंस देने के लिए नियमों को मंज़ूरी दी गई। यह फैसला राज्य के एनसीआर जिलों में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और वायु गुणवता को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है।
संशोधित नियमों के तहत 1 जनवरी, 2026 से राष्ट्रीय राजधानी इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल सभी गाड़ियां आवश्यक तौर पर सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां या किसी दूसरे स्वछ्तम ईंधन पर आधारित होंगी। इसके अलावा, एनसीआर इलाकों में मौजूदा बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी या इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर, ऑटो-रिक्शा को ही शामिल करने की अनुमति होगी।
कैबिनेट ने राज्य में चल रहे ऐप-बेस्ड पैसेंजर एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के लिए हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के रूल 86 ए में बदलाव की भी मंज़ूरी दी।
नए नियमों में एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए आवश्यक लाइसेंसिंग, ड्राइवरों और गाड़ियों के लिए ऑनबोर्डिंग नियम, पैसेंजर सुरक्षा के उपाय, शिकायत सुलझाने के तरीके, प्रेरणा और पुनरावलोकन प्रशिक्षण कार्यक्रम, ड्राइवरों और पैसेंजर के लिए इंश्योरेंस कवरेज, ऐप्स के लिए साइबर सिक्योरिटी का पालन और किराए का रेगुलेशन शामिल हैं।
नियमों अनुसार एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थय बीमा और ऑनबोर्डेड ड्राइवरों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य होगा।
इन नियमों के तहत गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना भी ज़रूरी है। एग्रीगेटर्स को पैसेंजर की मदद और शिकायत दूर करने के लिए 24×7 घण्टे कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी बनाने होंगे।
पारदर्षी और जिम्मेवारी को मज़बूत करने के लिए नियमों में वाहन और सारथी पोर्टल के ज़रिए गाड़ी और ड्राइवर की डिटेल्स के वाहन का डिजिटल प्रमाणीकरण का प्रबंध करना है। एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को ऑनबोर्डेड ड्राइवरों और गाड़ियों का डिटेल्ड डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा।
बैठक में मंत्रिपरषद को अवगत करवाया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रोसेस निर्धारित पोर्टल cleanmobility.haryanatransport.gov.in. के ज़रिए संचालन किया जाएगा। नए फ्रेमवर्क में ड्राइवर वेलफेयर, किराया शेयरिंग, सेफ्टी स्टैंडर्ड, दिव्यांगजन-फ्रेंडली गाड़ियों को शामिल करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने से जुड़े नियम भी शामिल किए हैं।
हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग के नए सेवा नियमों 2026 को दी मंत्रिमंडल ने मंजूरी
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अधीक्षक (फील्ड कैडर) के पद के लिए नए सेवा नियमों, यानी ‘हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग, उप-कार्यालय कॉलेज कैडर (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 2026’ को मंजूरी दी गई। ये नियम आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में उनके प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।
नए नियमों के अनुसार नियुक्ति के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता और अनुभव (यदि कोई हो), पदोन्नति (प्रमोशन) और स्थानांतरण (ट्रांसफर) या प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से तय किया जाएगा।
उप-अधीक्षक (डिप्टी सुपरिटेंडेंट) के रूप में एक वर्ष का अनुभव या सहायक (असिस्टेंट) के रूप में 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है।
अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) के रूप में एक वर्ष का अनुभव, मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री, और मैट्रिक (दसवीं) में एक विषय के रूप में हिंदी या संस्कृत, या उच्च शिक्षा में एक विषय के रूप में हिंदी विषय होना अनिवार्य है।
