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नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश की आधी आबादी को मिलेगा पूरा हक : डा. अर्चना गुप्ता

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भारत की वीरांगनाएं हो जाएं चुनावी युद्ध के रण में उतरने के लिए तैयार : डा अर्चना गुप्ता

नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाएं बनेंगी नीति निर्माता : डा. अर्चना गुप्ता

न्यूज़म ब्यूरो 

चंडीगढ़, 13 अप्रैल। भाजपा प्रदेश महामंत्री डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक और महिला सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार का क्रांतिकारी कदम है इससे देश की आधी आबादी को पूरा हक मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जो विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करेगा और नीति निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करेगा। डा. अर्चना गुप्ता सोमवार को भाजपा कार्यालय कर्ण कमल में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थी। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण लाठर, जिला मीडिया प्रभारी डा. अशोक कुमार एवं भाजपा से जुड़ी प्रमुख महिला पदाधिकारियों सहित सामाजिक संगठनों से जुड़ी अन्य महिला कार्यकर्ता भी मौजूद रहीं।

डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे लोकतंत्र अधिक समावेशी और संतुलित होगा।
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उन्होंने इस मौके पर सभी महिलाओं को आगामी चुनावों में चुनावी युद्ध के रण में अभी से तैयारी करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को सशक्त बनाने का जो संकल्प लिया था, उसे इस अधिनियम के माध्यम से धरातल पर उतार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कानून नए भारत की नारी के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता अब और अधिक प्रभावी होगी।
भाजपा प्रदेश महामंत्री डा. अर्चना गुप्ता ने प्रधानमंत्री के इस दूरदर्शी निर्णय की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि  इस कानून के आने से आने वाले समय में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं का नेतृत्व और अधिक सशक्त होकर उभरेगा।
डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल समानता का मुद्दा नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज निर्माण का आधार है। वैश्विक शोध लगातार दर्शाते हैं कि जब महिलाएं कार्यबल में अधिक संख्या में शामिल होती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और आय में समानता आती है। महिलाओं की शिक्षा और नेतृत्व से विकास अधिक टिकाऊ और समावेशी बनता है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर व्यापक परिवर्तन हुए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 72 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम पर हैं। मुद्रा योजना के 69 प्रतिशत ऋण महिलाओं को दिए गए हैं, जबकि स्टैंड-अप इंडिया योजना के 84 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि मोदी सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं से महिलाओं के जीवन में काफी सुधार आया है।  उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन दिए गए, जिससे महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली। जल जीवन मिशन के माध्यम से करोड़ों घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचा, जिससे महिलाओं के दैनिक जीवन की कठिनाइयां कम हुईं। स्वच्छ भारत मिशन ने खुले में शौच की समस्या को खत्म कर महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित किया।
उन्होंने कहा हिक जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है, तो वे केवल पद नहीं संभालतीं, बल्कि शासन को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाती हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का प्रयास है। यह कानून महिलाओं को केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति निर्माता के रूप में स्थापित करेगा।
डा. अर्चना गुप्ता ने कहा कि पिछले वर्षों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मजबूत आधार तैयार हुआ है। करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खुले हैं, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं संगठित हो रही हैं, और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। “लखपति दीदी” और “नमो ड्रोन दीदी” जैसी पहलें महिलाओं को तकनीकी और आधुनिक क्षेत्रों में आगे बढ़ा रही है
भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि नीति निर्माण में महिलाओं की प्राथमिकताएं अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएंगी। जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में होंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी। इससे शासन अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनेगा। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक कदम है। जब देश की आधी आबादी नेतृत्व में आगे आएगी, तभी विकास वास्तव में समावेशी, संतुलित और टिकाऊ बन पाएगा।
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