Listen to this article
चंडीगढ़, 17 नवंबर। पंजाब विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली गेस्ट हाउस सभागार में सोमवार को विश्वविद्यालय रजिस्ट्रारों के लिए रणनीतिक नेतृत्व और नवाचार (स्ट्रैटेजिक लीडरशिप एंड इनोवेशन फॉर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार्स) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू), नई दिल्ली और पंजाब विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए 33 रजिस्ट्रार इस कार्यशाला में भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का उद्घाटन सत्र उच्च शिक्षा प्रशासन में नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक सुधारों पर केंद्रित रहा।
मुख्य अतिथि एवं एआईयू की महासचिव तथा भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की मुख्य आयुक्त डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अब तक की सबसे बेहतर और सबसे लोकतांत्रिक नीति है क्योंकि इसके निर्माण में करीब दो लाख लोगों के सुझाव लिए गए थे। उन्होंने अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (शैक्षणिक क्रेडिट बैंक) को सबसे आधुनिक लेकिन अक्सर गलत समझा जाने वाला विचार बताया। डॉ. मित्तल ने समझाया कि जिस तरह हम बैंक में पैसा जमा करते हैं, उसी तरह छात्र अपने क्रेडिट इस बैंक में जमा कर सकते हैं और लचीली एवं बहु-विषयी डिग्री हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से स्पष्ट करने को कहा कि वे शोध विश्वविद्यालय बनना चाहते हैं, शिक्षण विश्वविद्यालय बनना चाहते हैं या स्वायत्त डिग्री देने वाले संस्थान। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एआईयू द्वारा बनाए गए आईएनआईएचई मंच की भी जानकारी दी गई। एआईयू की भूमिका को मां की तरह पोषक बताते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और सांस्कृतिक/भाषाई आदान-प्रदान के लिए एआईयू द्वारा बनाए गए आईएनआईएचई प्लेटफ़ॉर्म की जानकारी दी।
छात्रों का भावनात्मक सहारा हमारी जिम्मेदारी : कुलपति प्रो. रेनू विग
पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेनू विग ने प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि घर से दूर पढऩे वाले छात्रों का भावनात्मक सहयोग और मार्गदर्शन देते हुए सही और गलत का अंतर समझाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन में ई-ऑफिस, तेज निर्णय प्रक्रिया, कर्मचारी अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य और छात्र हितैषी व्यवस्था पर जोर दिया।
डिजिटल सुरक्षा और ई-ऑफिस जरूरी : डॉ. अश्वनी पारीक
राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (नाबी) के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्वनी पारीक ने ई-ऑफिस, डिजिटल सुरक्षा, समय पर सूचना का अधिकार जवाब, कानूनी तैयारी और मानव संसाधन नेतृत्व को मजबूत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी सीखना हो, उसमें पूरी तरह डूब जाओ, डर से कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि जीवविज्ञान भारत के भविष्य को बदलने वाली प्रमुख तकनीकों में से एक है। उन्होंने इंडिया बीआईओई विजऩ (इकोनॉमी, एनवायरमेंट, इंप्लायमेंट) को भारत के बायो-इनोवेशन आधारित भविष्य की रूपरेखा बताया।
रजिस्ट्रार का पद अब बहुत जटिल : प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने कहा कि आज रजिस्ट्रार का पद दिन-प्रतिदिन जटिल होता जा रहा है। कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच बेहतर तालमेल बहुत जरूरी है। उन्होंने शैक्षणिक क्रेडिट बैंक और एक साथ दो डिग्री करने की सुविधा को नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने एबीसी को छात्रों के लिए एनईपी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया तथा दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को एक साथ करने की नई स्वतंत्रता को बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 21 मुक्त विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिससे उच्च शिक्षा की पहुँच बढ़ी है।
पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. वाई. पी. वर्मा ने एआईयू का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पंजाब विश्वविद्यालय का चयन किया। कार्यशाला में यह संदेश भी जोर-शोर से दिया गया कि आने वाला दशक युवाओं का है। विश्वविद्यालयों को छात्रों को नवाचार आधारित कार्यक्रमों से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।
उद्घाटन सत्र के बाद प्रश्न-उत्तर सत्र हुआ जिसमें रजिस्ट्रारों ने उच्च शिक्षा शासन, कानूनी प्रक्रियाओं और नीति क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।कार्यशाला में पीयू डीयूआई प्रो. योजना रावत, पीयू रजिस्ट्रार प्रो. वाई. पी. वर्मा, आरडीसी निदेशक प्रो. मीनाक्षी गोयल, सीवीओ प्रो. सिमरित काहलों, रूसा समन्वयक प्रो. जी. आर. चौधरी, पीआई–राही निदेशक प्रो. रजत संधीर, एआईयू–पीयू–एएडीसी के समन्वयक प्रो. वाई. के. रावल के अलावा विभिन्न विभागों के अनेक चेयरपर्सन भी मौजूद रहे।
What are your
Feelings