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डॉ मोहन यादव ने इंदौर के प्राचीन अहिल्या कुंड के जीर्णोद्धार का किया निरीक्षण

जल संरक्षण और विरासत संवर्धन पर मध्य प्रदेश सरकार का है जोर

तृप्ति भटनागर

इंदौर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र स्थित बरलाई जागीर में प्राचीन अहिल्या कुंड के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता Ahilyabai Holkar द्वारा 18वीं सदी में निर्मित यह ऐतिहासिक बावड़ी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस धरोहर को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का प्रेरणास्रोत बन सके।

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‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत हो रहा पुनर्जीवन

राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan का उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्जीवन और संवर्धन करना है। इसी अभियान के अंतर्गत प्राचीन बावड़ियों, कुंडों, तालाबों और जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है, और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।

अहिल्याबाई होलकर की विरासत से जुड़ा है अहिल्या कुंड

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान कहा कि यह बावड़ी लोकमाता Ahilyabai Holkar की दूरदर्शिता और जनकल्याणकारी सोच का प्रतीक है। 18वीं सदी में राहगीरों और ग्रामीणों की सुविधा के लिए निर्मित इस बावड़ी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि उस समय जल संरक्षण और जनसुविधाओं को लेकर जो सोच थी, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है।

पुराने स्वरूप में लौटेगी ऐतिहासिक बावड़ी

मुख्यमंत्री ने बताया कि जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद अहिल्या कुंड अपने पुराने भव्य स्वरूप में दिखाई देगा। इसके संरक्षण से न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे ऐतिहासिक जल स्रोतों को संरक्षित कर उन्हें पर्यटन, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है।

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प्रदेशभर में हो रहा प्राचीन जल स्रोतों का संरक्षण

Mohan Yadav ने कहा कि मध्य प्रदेश में कई प्राचीन जल स्रोतों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है और यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

सरकार का मानना है कि पारंपरिक जल संरचनाएं आज के समय में जल संकट से निपटने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं। यही कारण है कि पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुंडों को पुनर्जीवित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे जल संरक्षण के महत्व को समझें और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर प्रयास करें तो जल संकट जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

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सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संगम

विशेषज्ञों के अनुसार अहिल्या कुंड जैसे ऐतिहासिक जल स्रोत केवल जल संरचनाएं नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली और स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरण संतुलन, भूजल स्तर और सांस्कृतिक विरासत तीनों को लाभ मिलता है।

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