इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने साधा निशाना, उच्च शिक्षा में बढ़ती पहुंच और सरकार की योजनाओं का भी किया जिक्र
राहुल गुप्ता
नई दिल्ली, 20 सितंबर।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी छात्रों के बीच ‘सिस्टम बनाम छात्र’ का नैरेटिव लेकर जाते हैं, जबकि छात्रों को राजनीतिक ड्रामा नहीं बल्कि अपने सवालों के जवाब चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी के कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों को एक कब्जे वाले सिस्टम का सबूत बताने की कोशिश कर रहे हैं और शिक्षा के जटिल इकोसिस्टम को राजनीतिक नारों तक सीमित कर रहे हैं।
‘छात्रों को ड्रामे नहीं, सवालों के जवाब चाहिए’
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इंदौर में राहुल गांधी अपने साथ माइक और ‘सिस्टम बनाम छात्र’ का बना-बनाया नैरेटिव लेकर पहुंचे। उनके मुताबिक, छात्रों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान पर चर्चा करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे जटिल हैं और उन्हें केवल राजनीतिक नारों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। प्रधान ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी छात्रों की समस्याओं के समाधान की बात करेंगे या उनकी चिंताओं को राजनीतिक मुद्दा बनाते रहेंगे।
‘भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ी’
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि 2014-15 में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर 23.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया।
उन्होंने केंद्र सरकार की पीएम विद्यालक्ष्मी और पीएम-उषा जैसी योजनाओं का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, पीएम विद्यालक्ष्मी योग्य छात्रों को बिना गारंटी वाले शिक्षा ऋण और ब्याज से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने में मदद करती है, जबकि पीएम-उषा राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग और परीक्षा सुधार का जिक्र
धर्मेंद्र प्रधान ने भारत के विश्वविद्यालयों की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में भारत की स्थिति में सुधार हुआ है और संस्थागत क्षमता भी बढ़ी है।
परीक्षा सुधारों को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि पेपर आधारित परीक्षाओं से जुड़ी कमियों और गड़बड़ियों को कम किया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा की शुचिता को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कानून का जिक्र
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने 2024 में परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कानून बनाया था। उन्होंने कहा कि अब इसे कड़ी सजा और फास्ट-ट्रैक अदालतों के प्रावधानों के साथ और मजबूत किया गया है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
‘क्या राहुल गांधी समाधानों के बारे में बात करेंगे?’
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अवसर बढ़ाने, शिक्षा को किफायती बनाने, बुनियादी ढांचे में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे कामों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह छात्रों की समस्याओं के समाधान के बारे में बात करेंगे या उनकी चिंताओं को राजनीतिक मुद्दा बनाते रहेंगे।
इंदौर में राहुल गांधी ने छात्रों से किया संवाद
दरअसल, 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, सरकारी भर्ती, परीक्षाओं और शिक्षण संस्थानों से जुड़ी समस्याओं को उठाया था।
कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘सिस्टम बनाम छात्र’ थी। राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को व्यापक शिक्षा व्यवस्था और सरकारी तंत्र से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि देश पर सिस्टम का कब्जा है और सिस्टम को देश के शीर्ष छह लोग चला रहे हैं। राहुल गांधी ने इसे सिस्टम के खिलाफ लड़ाई बताया था।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।
