दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समीक्षा बैठक की
न्यूज़म ब्यूरो
नई दिल्ली , 10 सितंबर | Delhi Pollution Plan के तहत दिल्ली सरकार ने सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियां तेज कर दी हैं। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समीक्षा बैठक में सड़क की धूल, निर्माण मलबे, वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन और खुले में कचरा जलाने पर चर्चा की। दिल्ली के 47 प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए 13 वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। सड़क मरम्मत, पानी के छिड़काव और मशीनों से सफाई की निगरानी बढ़ाई जाएगी। यातायात जाम वाले 62 स्थानों की भी समीक्षा होगी। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग केंद्र बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

Delhi Pollution Plan की समीक्षा
बैठक में सड़क की धूल, निर्माण मलबे और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चर्चा हुई।
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं और खुले में कचरा जलाने पर भी ध्यान दिया गया।
प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
संधू और गुप्ता ने अलग-अलग विभागों की संयुक्त साप्ताहिक बैठकें करने को कहा।
दिल्ली के 47 चिन्हित प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
इन क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने की विस्तृत योजना लागू की जाएगी।
47 क्षेत्रों की निगरानी की जिम्मेदारी

सरकार ने 47 प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए 13 वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है।
इन अधिकारियों में अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
हर क्षेत्र के तीन किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण नियंत्रण पर काम होगा।
अधिकारियों को स्थानीय समस्याओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बाद संबंधित विभागों के साथ मिलकर समाधान लागू किया जाएगा।
सरकार इन क्षेत्रों में कार्रवाई की प्रगति पर नियमित नजर रखेगी।
सड़क की धूल पर विशेष ध्यान
सड़क की धूल को प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना गया है।
बैठक में निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोकने पर भी जोर दिया गया।
दिल्ली मेट्रो के निर्माण स्थलों पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
सड़कों की मरम्मत का काम भी तेज करने को कहा गया है।
सड़क निर्माण सामग्री की सीमित उपलब्धता के कारण कुछ काम प्रभावित हुए थे।
अब बिटुमिन और सीमेंट से जुड़ी मरम्मत को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
धूल प्रभावित सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और गड्ढों की मरम्मत पर निगरानी होगी।
सड़क बहाली के काम की रोजाना समीक्षा करने को कहा गया है।
यातायात व्यवस्था में बदलाव पर जोर

दिल्ली में 62 यातायात जाम वाले स्थानों की दोबारा समीक्षा की जाएगी।
पुलिस और संबंधित विभाग मिलकर इन स्थानों पर सुधार के उपाय करेंगे।
सिग्नल व्यवस्था बेहतर करने और अतिक्रमण हटाने पर ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा चौराहों में सुधार और पार्किंग व्यवस्था को भी व्यवस्थित किया जाएगा।
दुर्घटनाओं या अन्य घटनाओं के बाद यातायात सामान्य करने में तेजी लाई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य वाहनों की भीड़ और इंजन चालू रखने का समय घटाना है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने की योजना पर भी चर्चा हुई।
दो पहिया और तीन पहिया वाहनों में बदलाव तेज करने पर जोर दिया गया।
हल्के और मध्यम व्यावसायिक वाहनों को भी इस बदलाव में शामिल किया जाएगा।
इसके लिए पर्याप्त चार्जिंग केंद्र विकसित करने की जरूरत बताई गई।
सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए स्वच्छ परिवहन को महत्वपूर्ण माना है।
औद्योगिक प्रदूषण की होगी निगरानी
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की प्रभावशीलता जांचने को कहा गया।
निरंतर उत्सर्जन निगरानी व्यवस्था से वास्तविक प्रदूषण कमी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
समिति को हर सप्ताह अनुपालन और उल्लंघन से जुड़ी रिपोर्ट देनी होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों की माप योग्य निगरानी पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई समयबद्ध तरीके से आगे बढ़नी चाहिए।
उपराज्यपाल ने पर्यावरण सचिव से पंद्रह दिन में प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
यह रिपोर्ट मुख्य सचिव के माध्यम से उनके कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी।
रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की प्रगति आंकड़ों के साथ बतानी होगी।
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