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Cyber Fraud : फर्जी WhatsApp से ₹1 करोड़ ट्रांसफर, 1930 ने बचाई पूरी रकम

Haryana Police saves ₹1 crore in Cyber Fraud case Haryana Police saves ₹1 crore in Cyber Fraud case
Haryana Police saves ₹1 crore in Cyber Fraud case

Cyber Fraud के करनाल मामले में जालसाजों ने शोरूम मालिक के नाम और फोटो से फर्जी WhatsApp नंबर बनाया

कर्मचारियों से ₹1 करोड़ ट्रांसफर करवाए गए

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़ | करनाल के ज्वेलरी शोरूम में बॉस स्कैम के जरिए ₹1 करोड़ ट्रांसफर करवाए गए। हरियाणा पुलिस की 1930 टीम ने बैंकिंग चैनल के साथ तुरंत कार्रवाई की। समय पर शिकायत से पूरी राशि सुरक्षित बच गई।

हरियाणा पुलिस की साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 ने एक बड़े मामले में ₹1 करोड़ की रकम बचा ली। करनाल के एक ज्वेलरी शोरूम में कर्मचारियों से यह रकम ट्रांसफर करवाई गई थी। जालसाजों ने शोरूम मालिक के नाम और फोटो का इस्तेमाल किया था। उन्होंने फर्जी व्हाट्सऐप नंबर बनाकर कर्मचारियों को संदेश भेजा। संदेश में एक बैंक खाते में ₹1 करोड़ भेजने के निर्देश दिए गए थे। कर्मचारियों ने नाम और फोटो देखकर इसे मालिक का आदेश समझ लिया। इसके बाद आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम ट्रांसफर कर दी गई।

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₹1 crore saved in Cyber Fraud case
₹1 crore saved in Cyber Fraud case

फर्जी WhatsApp नंबर से कर्मचारियों को बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार, करनाल के नेहरू प्लेस में एक ज्वेलरी शोरूम है। शोरूम से जुड़े कर्मचारियों को एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला था। इस नंबर पर शोरूम मालिक विकास का नाम और फोटो लगी थी। जालसाजों ने इसी पहचान का इस्तेमाल करके कर्मचारियों को भरोसे में लिया। संदेश में एक बैंक खाते में ₹1 करोड़ ट्रांसफर करने को कहा गया था। कर्मचारियों ने इसे वास्तविक निर्देश समझकर रकम भेज दी। इस तरह जालसाजों ने बॉस स्कैम के जरिए पूरा ट्रांजैक्शन करवाया।

खाते से रकम कटने के बाद सामने आया फर्जीवाड़ा

पुलिस के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 को ममता बंसल ने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। वह सेक्टर-13, करनाल की निवासी हैं और उनके पति विकास शोरूम से जुड़े हैं। उन्हें खाते से ₹1 करोड़ कटने का एसएमएस मिला था। इसके बाद उन्होंने तुरंत शोरूम में फोन करके इस ट्रांजैक्शन की जानकारी ली। बातचीत में पता चला कि मालिक ने ऐसी कोई रकम ट्रांसफर करने को नहीं कहा था। इसके बाद परिवार और कर्मचारियों को पूरे मामले की जानकारी हुई। जांच में सामने आया कि जालसाजों ने मालिक की पहचान का इस्तेमाल किया था।

1930 पर शिकायत मिलते ही शुरू हुई कार्रवाई

फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही पीड़ित पक्ष ने 1930 पर शिकायत की। शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम हेल्पलाइन की बैंक फॉलो-अप टीम सक्रिय हुई। टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनल के साथ तुरंत संपर्क स्थापित किया। इसके बाद रकम को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस के अनुसार, समय पर हुई कार्रवाई से पूरी ₹1 करोड़ की रकम बच गई। राशि जालसाजों के हाथों में जाने से पहले बैंकिंग स्तर पर कार्रवाई हो गई। यह मामला समय पर शिकायत करने की अहमियत को भी सामने लाता है।

डीजीपी अजय सिंघल ने टीम को दी बधाई

हरियाणा पुलिस के डीजीपी अजय सिंघल ने 1930 टीम को बधाई दी। उन्होंने बैंकिंग चैनल के साथ किए गए प्रभावी समन्वय की भी सराहना की। डीजीपी ने कहा कि ऐसे मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। शुरुआती स्तर पर कार्रवाई से ठगी की रकम सुरक्षित कराने में मदद मिलती है। उन्होंने लोगों से साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करने की अपील की। उनका कहना है कि देरी करने से रकम को आगे ट्रांसफर होने का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या है बॉस स्कैम?

बॉस स्कैम में जालसाज किसी कंपनी या कारोबार के वरिष्ठ व्यक्ति की पहचान अपनाते हैं। इसके लिए उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद फर्जी व्हाट्सऐप नंबर या प्रोफाइल तैयार की जाती है। जालसाज कर्मचारियों को पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश भेजते हैं। कई मामलों में तुरंत भुगतान और गोपनीयता बनाए रखने का दबाव बनाया जाता है। इसका उद्देश्य कर्मचारी को वास्तविक अधिकारी से संपर्क करने से रोकना होता है। इस मामले में भी मालिक की पहचान का इस्तेमाल करके कर्मचारियों को भ्रमित किया गया।

नाम और डीपी देखकर भरोसा नहीं करने की अपील

हरियाणा पुलिस ने लोगों और व्यावसायिक संस्थानों से सावधानी बरतने को कहा। पुलिस ने कहा कि केवल नाम और डीपी देखकर किसी व्यक्ति पर भरोसा नहीं करें। बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। इसके लिए अधिकारी या मालिक के आधिकारिक नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। नए बैंक खाते में पैसा भेजने से पहले खाते का विवरण भी जांचें। बड़ी राशि के भुगतान में दो-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया अपनाना सुरक्षित तरीका है।

समय पर शिकायत से बच सकती है ठगी की रकम

हरियाणा पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में तत्काल शिकायत करने की अपील की। पुलिस के अनुसार, 1930 पर तुरंत शिकायत मिलने से बैंकिंग चैनल सक्रिय किए जा सकते हैं। इससे ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिल सकती है। करनाल के इस मामले में भी समय पर शिकायत बेहद महत्वपूर्ण रही। पुलिस की बैंक फॉलो-अप टीम ने तत्काल कार्रवाई की। इससे ₹1 करोड़ की पूरी रकम जालसाजों के हाथों में जाने से बच गई।

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