मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक दिन में 7 विभागों की समीक्षा की, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
तृप्ति भटनागर
भोपाल, 21 मई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में अपनी व्यापक प्रशासनिक सक्रियता का परिचय देते हुए एक ही दिन में सात प्रमुख विभागों की समीक्षा बैठकें लीं। स्कूल शिक्षा से लेकर लोक निर्माण तक, हर विभाग की कार्यप्रगति को बारीकी से परखा गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री का यह कदम राज्य सरकार की “शासन में जवाबदेही” की नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
स्कूल शिक्षा विभाग: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मध्याह्न भोजन योजना, छात्रवृत्ति वितरण, शाला प्रवेश उत्सव और डिजिटल शिक्षा अभियान सहित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षा की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति व पाठ्यक्रम का समयबद्ध पूर्ण होना सुनिश्चित किया जाए।
परिवहन विभाग: सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधा पर फोकस
परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा, वाहन पंजीकरण प्रक्रिया और नागरिक सुविधाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने परिवहन सेवाओं को और अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जनसुलभ बनाने के निर्देश दिए। ओवरलोडिंग और नशे में वाहन चलाने पर कड़ी कार्रवाई के भी आदेश दिए गए।
सहकारिता विभाग: किसानों तक लाभ पहुँचाने की प्राथमिकता
सहकारिता विभाग की समीक्षा में सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति, किसानों को ऋण वितरण, उर्वरक व बीज आपूर्ति और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन को प्रदेश में और मजबूत किए जाने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितता पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए और हर किसान तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे।
जनजातीय कार्य विभाग: आदिवासी हितों की होगी सर्वोच्च प्राथमिकता
जनजातीय कार्य विभाग की बैठक में आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति, आश्रम शालाओं की स्थिति, वन अधिकार पट्टे, जनजातीय उत्पादों के विपणन और रोजगार योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनजातीय समुदाय का सामाजिक और आर्थिक उत्थान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुँचे।

पशुपालन विभाग: पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर
पशुपालन विभाग की समीक्षा में पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता, टीकाकरण अभियान, दुग्ध उत्पादन योजनाएं और पशु बीमा योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों और पशुपालकों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों को और तेज करने के निर्देश दिए गए।
लोक निर्माण विभाग: निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेशभर में सड़क, पुल-पुलिया और सरकारी भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और ठेकेदारों पर समयसीमा का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा और घटिया काम करने वाली एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जल गंगा संवर्धन अभियान: गंगा दशमी पर पूरे प्रदेश में होगा श्रमदान
मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में चल रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंगा दशमी के पावन अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में एक साथ सभी कुएँ, बावड़ी, नहर, तालाब और अन्य जल स्रोतों पर श्रमदान का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है और यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
एक दिन में सात बैठकें — प्रशासनिक सक्रियता का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस एकदिवसीय गहन समीक्षा श्रृंखला से यह स्पष्ट संदेश गया है कि राज्य सरकार विकास के मोर्चे पर किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। हर विभाग में जवाबदेही तय करना, योजनाओं का जमीनी असर दिखाना और आम जनता तक शासन की पहुँच सुनिश्चित करना — यही इन सभी बैठकों का केंद्रीय संदेश रहा।




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