57वीं जीएसटी परिषद ने गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के साथ सामान्य जुर्माना घटाकर 10,000 रुपये किया, रिफंड और छोटे कारोबारियों के लिए भी नियम आसान किए
राहुल गुप्ता
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार ने कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े बदलावों की घोषणा की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति पूरी तरह हटाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही जीएसटी के तहत अभियोजन की मौद्रिक सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। परिषद ने जीएसटी की दरों में कोई नया बदलाव नहीं किया।
वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जीएसटी के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान हटाया जा रहा है। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाने की सिफारिश की गई है। अब किसी मामले में जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा होगी, इसका फैसला अदालत करेगी।
25 हजार की जगह अब 10 हजार रुपये का सामान्य जुर्माना
जीएसटी परिषद ने सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की सिफारिश की है। इसके अलावा छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया गया है। छोटे कारोबारी दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार कर सकेंगे और कुछ शर्तों के तहत उनका पंजीकरण सिस्टम के जरिए अपने आप किया जा सकेगा।
परिषद ने टैक्स रिफंड की प्रक्रिया तेज करने और वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी को सप्लायर की गलती या डिफॉल्ट के असर से बचाने के उपायों की भी सिफारिश की है।
रिफंड के लिए 15 दिन की जगह 10 दिन
रिफंड आवेदन मिलने के बाद एक्नॉलेजमेंट या कमी का मेमो जारी करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है। अगर 10 दिनों के भीतर इनमें से कोई भी जारी नहीं होता है तो सिस्टम की ओर से आवेदन को स्वत: एक्नॉलेज्ड माना जाएगा।
जीरो-रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े पात्र रिफंड दावों में 90% राशि जोखिम आकलन के आधार पर सिस्टम से प्रोविजनल रूप से मंजूर की जा सकेगी। वहीं इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में अतिरिक्त बैलेंस के पूरे रिफंड को अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना ऑटोमैटिक तरीके से मंजूर करने की व्यवस्था की सिफारिश की गई है।
10 हजार रुपये से कम के मामलों में नोटिस नहीं
परिषद ने जीएसटी नोटिस जारी करने के लिए न्यूनतम 10,000 रुपये की सीमा तय करने की सिफारिश की है। यानी 10,000 रुपये से कम टैक्स राशि वाले मामलों में शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में न्यूनतम जुर्माने की शर्त हटाने और तय समय के भीतर टैक्स व ब्याज जमा करने पर कम जुर्माने का प्रावधान करने की भी सिफारिश की गई है।
अगले वित्त वर्ष से लागू होंगे बदलाव
जीएसटी परिषद ने नोटिस जारी करने, उसकी जानकारी देने, प्री-नोटिस, धोखाधड़ी के आरोप, सुनवाई और आदेश जारी करने की प्रक्रिया के लिए एक समान मानक तैयार करने की सिफारिश की है। परिषद की ओर से सुझाए गए इन सुधारों को 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने की बात कही गई है।
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