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बाबा अम्बेडकर ने भूली-भटकी मानवता को दिखाया जीवन का सच्चा रास्ता : नायब सिंह सैनी

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डॉ अम्बेडकर की 135 वीं जयंती के अवसर पर पंचकूला में समारोह आयोजित

कांग्रेस ने हमेशा बाबा साहेब की राजनीतिक उपेक्षा की – मुख्यमंत्री

बाबा साहेब ने नारा दिया- पढ़ो, एक हो जाओ और संघर्ष करो.

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बाबा साहेब की जयंती को 13 अप्रैल से 20 अप्रैल तक ‘सामाजिक न्याय सप्ताह’ के रूप में मना रहे

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 14 अप्रैल। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अपने समय में भूली-भटकी मानवता को जीवन का सच्चा रास्ता दिखाया था , ऐसे में उनकी विरासत को सँभालने व सहेजने की जिम्मेदारी हम सबकी है। मुख्यमंत्री आज पंचकूला में बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की 135 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

नायब सिंह सैनी ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस वर्ष बाबा साहेब की जयंती को 13 अप्रैल से 20 अप्रैल तक ‘सामाजिक न्याय सप्ताह’ के रूप में मना रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बाबा साहेब के सामाजिक न्याय और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह की शुरूआत स्वच्छता अभियान से की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब का सपना था एक ऐसा समाज, जहां किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसकी योग्यता और उसके कर्म से हो। हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस सामाजिक न्याय सप्ताह से हम उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने, समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय सुनिश्चित करने और समानता के उनके सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर महान समाज सुधारक थे। उन्होंने जाति-पाति एवं छुआछूत, असमानता, अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया। वे दबे-पिछड़े आवाम की आवाज थे। एक गरीब परिवार में जन्मे बाबा साहेब ने यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और साहस से मनुष्य कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकता है। उनका जीवन संघर्षों से भरा हुआ था, लेकिन उन्होंने उच्च मनोबल से जीवन की हर बाधा को पार किया। वे ओजस्वी लेखक, यशस्वी वक्ता, महान कानूनविद् और अर्थशास्त्री थे। भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पी भी थे। उन्होंने कहा कि देश के प्रति उनकी महान सेवाओं को देखते हुए उन्हें भारत रत्न के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। उनका साधनापूर्ण जीवन हम सबके लिए आदर्श है।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर समाज के पिछड़ेपन व असमानता को दूर करने को सबसे कारगर उपाय शिक्षा को मानते थे। उन्होंने जब ‘पढ़ो, एक हो जाओ और संघर्ष करो’ का नारा दिया तो वे जानते थे कि शिक्षा ही शोषितों को शोषण से बचा सकती है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब को यह बात जन-जन तक पहुंचाने के लिए लम्बे समय तक प्रयास करना पड़ा कि आत्म सम्मान, समान अधिकार और सामाजिक न्याय केवल मांगने से नहीं मिल जाते, उन्हें प्राप्त करने के लिए पहले स्वयं को इस योग्य बनाना पड़ता है और इसके लिए शिक्षित होना पहली शर्त है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब वंचित वर्गों की ही नहीं, महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के पक्षधर थे। वे नारी-शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उनका मत था कि शिक्षा ही उनको आत्मनिर्भर बना सकती है।

उन्होंने कहा कि आज का यह पावन अवसर बाबा साहेब के जीवन दर्शन का स्मरण करने और उनके दिखाए गए रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही, एक सत्य को सामने लाने का दिन भी है। बाबा साहेब जैसे महानायक, जिन्होंने भारत का संविधान बनाया, उन्हें उसी दौर की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने बार-बार राजनीतिक उपेक्षा और अपमान का शिकार बनाया।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि सन् 1946 में जब संविधान सभा का गठन हो रहा था, तब कांग्रेस ने उन्हें वहां पहुंचने से रोकने का हर संभव प्रयास किया। लेकिन, बाबा साहेब अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर वहां पहुंचे। फिर भी, उन्हें कभी कांग्रेस ने दिल से स्वीकार नहीं किया। स्वयं बाबा साहेब ने कहा था कि वे कांग्रेस के विरोधी खेमे से आते हैं और कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें कभी अपना नहीं माना।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह विडंबना ही थी कि देश के कानून मंत्री होते हुए भी उन्हें महत्वपूर्ण निर्णयों और समितियों से दूर रखा गया। विदेश नीति, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर उनकी भूमिका सीमित कर दी गई।

अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए आयोग बनाने की उनकी मांग को भी कांग्रेस सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। सबसे बड़ा अन्याय तब हुआ, जब उनके जीवन के सबसे क्रांतिकारी सामाजिक सुधार, ‘हिंदू कोड बिल’ को कांग्रेस ने जानबूझकर लटकाया, कमजोर किया और अंत में ठंडे बस्ते में डाल दिया। बार-बार आश्वासन देकर भी उसे लागू न करना, बाबा साहेब के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सन् 1951 में बाबा साहेब को मंत्रिमंडल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उस समय उन्होंने कहा था कि उनका इस्तीफा किसी पद की लालसा का नहीं, बल्कि सिद्धांतों के साथ समझौता न करने का परिणाम है। यह कांग्रेस की उस सोच की पराजय थी, जो सामाजिक न्याय के नाम पर राजनीति करती रही।
उन्होंने कांग्रेसी नेताओं पर आरोप लगाया कि आज भी उनका अपमान करने वाले लोग उनके लिखे संविधान की किताब को छाती पर लगाए घूम रहे हैं और कह रहे हैं कि संविधान खतरे में हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर के दिखाए हुए रास्ते पर चलते हुए हमारी सरकार का मूल दर्शन ‘अंत्योदय’ है। इसी भावना को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के महामंत्र में पिरोया है। इसी मूल मंत्र पर चलते हुए हमने समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं। प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जातियों में अब तक वंचित रह गए लोगों को उनका अधिकार दिया है। उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के लिए प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहन लाल कौशिक ने बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर को नमन करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने हम सभी को संविधान में समानता का अधिकार दिया है। उन्होंने बताया कि भाजपा पार्टी बाबा साहेब की जयंती को 13 अप्रैल से 20 अप्रैल तक “सामाजिक न्याय सप्ताह” के रूप में मना रही हैं। इस दौरान गाँव-गाँव जाकर डॉ भीमराव अम्बेडकर द्वारा किए हुए कार्यों की जानकारी दी जाएगी।

इस अवसर पर विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार , शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, सहकारिता मंत्री अरविन्द शर्मा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा , जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, सामाजिक न्याय , सशक्तिकरण, अनुसूचित एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय मंत्री कृष्ण बेदी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर, खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम के अलावा कई विधायक एवं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

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