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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा नियम 2007 में संशोधन मंजूर

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बढ़ेंगे काबिल न्यायिक अधिकारियों के लिए मौके, बाकी 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरी जाती रहेंगे

 

डॉक्टर आराधना सिंह 

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चंडीगढ़, 24 मार्च। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में न्यायिक सेवा सुधारों से संबंधित अलग-अलग फैसलों में भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी।

ये बदलाव, अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ और अन्य बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य जैसे ऐतिहासिक केस में दिए गए निर्देशों और दूसरे संबंधित फैसलों के बाद किए गए हैं। इनका उदेश्य हायर ज्यूडिशियल कैडर में भर्ती और सर्विस की शर्तों के संरचना, पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत करना है।

मंज़ूर किए गए बदलावों के अनुसार, हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा में भर्ती के तरीके में बड़े बदलाव किए गए हैं। मेरिट-कम-सीनियरिटी के ज़रिए प्रमोशन के लिए मौजूदा कोटा 65 प्रतिशत से संशोधित कर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

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सीमित प्रतियोगी परीक्षा (एलसीई) के ज़रिए भर्ती का हिस्सा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे काबिल न्यायिक अधिकारी के लिए मौके बढ़ेंगे।

बाकी 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरी जाती रहेंगी। हालांकि, पात्रता को बढ़ाकर इसमें न सिर्फ बार के वकील बल्कि सबऑर्डिनेट न्यायिक सेवा के योग्य उम्मीदवार भी शामिल किए गए हैं।

कैबिनेट ने पात्रता मानदंड और सेवा शर्तें में बदलाव को भी मंज़ूरी दे दी है। अलग-अलग भर्ती चैनल से आने वाले उम्मीदवारों के लिए अनुभव, आयु और योग्यता सेवा से जुड़े प्रावधानों को रैशनलाइज़ किया गया है।

इसके अलावा, वरिष्ठता और रोस्टर प्रबंधन के नियमों में बदलाव किए गए हैं। जिन मामलों में भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग सालों में होती है, उनमें वरिष्ठता तय करने के लिए साफ़ नियम बनाए गए हैं, ताकि निष्पक्षता और एक जैसा पन बना रहे।

मौजूदा रोस्टर को भी बदला गया है ताकि आपसी वरिष्ठता को ठीक किया जा सके और भर्ती के अलग-अलग सूत्र के बीच संतुलित वितरण बनाए रखा जा सके।

कानूनी अस्पष्टता दूर करने को पंजाब न्यायालय अधिनियम 1918 में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी 

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में कानूनी अस्पष्टता दूर करने और मौजूदा केंद्रीय कानून के साथ तालमेल बनाने के लिए हरियाणा राज्य पर लागू पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 की धारा 30 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

यह निर्णय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की सिफारिश के बाद लिया गया है, जिन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि धारा 30 में वर्तमान प्रावधान भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1865 और प्रोबेट एवं प्रशासन अधिनियम, 1881 से जुड़ा है – ये दोनों अधिनियम निरस्त कर दिए गए हैं और इनकी जगह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू किया गया है।

इस विसंगति को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल ने पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 (जैसा कि हरियाणा में लागू है) की धारा 30 की उपधारा (2) के खंड (क) में पुराने संदर्भों को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 से प्रतिस्थापित करने को मंजूरी दे दी है।

इस संशोधन का उद्देश्य अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा संचालित कुछ उत्तराधिकार संबंधी कार्यवाही में क्षेत्राधिकार को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे में स्पष्टता लाना है।

 

 

 

 

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